एसयूवी की बिक्री में बढ़ोतरी के बाद छोटी कारों की मांग में गिरावट और उनकी कम बिक्री के कारण भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी ने अपनी हैचबैक इग्निस का उत्पादन बंद कर दिया है। इस घटनाक्रम से जुड़े उद्योग के कई सूत्रों और डीलरों ने यह जानकारी दी।
हालांकि यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब एस-प्रेसो और वैगन आर जैसे दूसरे एंट्री-लेवल और छोटी कारों के मॉडलों को उत्पादन की तंगी के कारण आपूर्ति की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जीएसटी 2.0 से मिली तेजी के बाद इन छोटी कारों की मांग काफी बढ़ गई है। पूरे देश में डीलरों ने इन सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडलों की आपूर्ति में कमी की बात कही है, जिसके चलते कुछ जगहों पर बुकिंग भी रोक दी गई बताई है।
अप्रैल की शुरुआत में कंपनी ने बताया था कि उसके पास 1.9 लाख कारों की बुकिंग के ऑर्डरों का अच्छा-खासा बैकलॉग है, जिसकी वजह जीएसटी के बाद आई तेजी है। इग्निस के बारे में जानकारी के लिए संपर्क करने पर कंपनी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के सवालों का जवाब नहीं दिया।
हालांकि दूसरे मॉडलों की आपूर्ति की समस्या उत्पादन में तालमेल की रणनीति का हिस्सा है ताकि इन सभी मॉडलों की प्रतीक्षा अवधि का प्रबंध किया जा सके। मारुति सुजूकी इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी (विपणन और बिक्री) पार्थो बनर्जी ने कहा, हमारे दोनों मॉडलों (वैगन आर और एस-प्रेसो) की मांग लगातार बनी हुई है और सभी बाजारों में इनकी जोरदार बुकिंग हो रही है। हम महीने के आखिर में होने वाली अपनी ब्रीफिंग के दौरान इस बारे में जानकारी देंगे।
दूसरी ओर, पश्चिम और दक्षिण भारत के कई डीलरों ने बताया कि उन्हें मारुति सुजूकी इंडिया से इग्निस कारों की आपूर्ति नहीं मिल रही है। मुंबई के कुछ डीलरों के पास अभी भी कुछ इन्वेंट्री है और वे इन कारों की बिलिंग जल्द से जल्द करने की कोशिश कर रहे हैं।
कई डीलरों ने बताया कि मारुति सुजूकी ने चुपचाप इग्निस हैचबैक का उत्पादन बंद कर दिया है। इसका मतलब है कि अब इसका बहुत कम स्टॉक बचा है और ज्यादातर शोरूम ने इसकी नई बुकिंग बंद कर दी है। हालांकि यह मॉडल अभी भी कंपनी की वेबसाइट पर लिस्टेड है, लेकिन उत्पादन बंद होने और डीलरों के पास स्टॉक कम होने से यह साफ संकेत मिलता है कि इसे असल में बाजार से हटाया जा रहा है।
2017 में लॉन्च हुई और नेक्सा लाइनअप में सबसे किफायती गाड़ी के तौर पर पेश की गई इग्निस अपने क्रॉसओवर प्रेरित डिजायन के बावजूद बिक्री बढ़ाने के लिए जूझती रही। 2022 में इसकी बिक्री लगभग 51,000 वाहनों के शिखर पर पहुंची, लेकिन स्विफ्ट जैसी ज्यादा बिकने वाली गाड़ियों के मुकाबले यह काफी पीछे रही। इसके बाद से इसकी बिक्री में तेजी से गिरावट आई है और हाल के महीनों में इसकी मासिक बिक्री 2,000 वाहनों से भी कम रह गई है।
सीमित लाइफसाइकिल अपडेट, सीएनजी जैसी सुविधाओं की कमी और सुरक्षा से जुड़े अपडेट में धीमी गति ने इसके आकर्षण को और कमजोर कर दिया, जिससे एसयूवी और बेहतर सुविधाओं वाली गाड़ियों की ओर बढ़ रहे बाजार में इसकी प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम होती गई।
वाहन उद्योग के एक विश्लेषक ने इग्निस को पूरी तरह से फेल होने के बजाय उत्पाद और बाजार के बीच तालमेल की कमी का एक क्लासिक उदाहरण बताया। इस सेक्टर पर नजर रखने वाले एक विश्लेषक ने कहा, हालांकि इस मॉडल ने अपने खास डिजायन और शहरी पहचान के साथ अपनी अलग जगह बनाई, लेकिन इसे कभी भी बड़े बाजार में वैसी स्वीकार्यता नहीं मिली, खासकर उस कीमत दायरे में, जहां भारतीय खरीदार अक्सर जानी-पहचानी चीजों, रीसेल वैल्यू और पारंपरिक स्टाइल को ज्यादा अहमियत देते हैं।
इग्निस की बिक्री और स्विफ्ट या वैगन आर की बिक्री के बीच लगातार रहने वाला अंतर यह दिखाता है कि मारुति के मुख्य ग्राहक वर्ग ने इस मॉडल के अनोखे अंदाज को कभी भी पूरी तरह से नहीं अपनाया और प्रतिस्पर्धी कीमत होने के बावजूद इसकी बिक्री सीमित रही।
उद्योग के अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक हाल के समय में इग्निस की मासिक डिस्पैच 1,800–2,500 वाहनों के बीच रही है। इसकी तुलना में वैगन आर और स्विफ्ट ने हर महीने 14,000–17,000 वाहनों की बिक्री दर्ज की है। जहां लोकप्रिय हैचबैक वैगन आर की वित्त वर्ष 25 में लगभग 2,00,000 गाड़ियां बिकीं, वहीं इग्निस की बिक्री 20,000–25,000 वाहनों के दायरे में रही।