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भारत-ईयू FTA से भारतीय कार कंपनियों के सामने सुनहरा मौका; मारुति, टाटा व महिंद्रा के लिए खुलेंगे दरवाजे

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भारत-ईयू एफटीए से यूरोपीय कारों को भारत में सस्ती एंट्री मिलेगी, वहीं मारुति, टाटा और महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियों को यूरोप में निर्यात का बड़ा मौका मिलेगा

Last Updated- September 13, 2026 | 10:00 PM IST
Cars
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के पहले साल में यूरोप की कार कंपनियों को तेल-गैस इंजन वाली और हाइब्रिड तकनीक की 1 लाख तक कारों के लिए भारतीय बाजार में रियायती पहुंच मिलेगी। यह संख्या साल 2025 में इस ब्लॉक से भारत आयात की गई 17,191 कारों की तुलना में लगभग छह गुना ज्यादा है। इससे देश की कार विनिर्माता कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। दूसरी ओर यह समझौता मारुति सुजूकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा जैसी कंपनियों के लिए निर्यात का काफी बड़ा मौका भी मुहैया कराएगा।

यूरोप की गैस-तेल इंजन और प्लग-इन हाइब्रिड से अलग कारों के लिए भारत का कोटा 10वें साल तक बढ़कर 1,60,000 हो जाएगा और 5वें साल तक कोटे के अंदर लगने वाला शुल्क घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। इसके बदले में ईयू 50,000 यूरो तक मूल्य की भारत में बनी तेल-गैस इंजन वाली और हाइब्रिड कारों को पहले साल में 2,50,000 गाड़ियों का कोटा देगा, जो 10वें साल तक बढ़कर 4,00,000 गाड़ियां हो जाएगा। साथ ही 5वें साल तक टैरिफ घटकर शून्य हो जाएगा।

यह कोटा यूरोप से कार आयात की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। इसके बाद भी गाड़ियां भारत आ सकती हैं, लेकिन तब वे कोटे से बाहर की होंगी और उस हिसाब से शुल्क लगेगा। लेकिन यह भी समय के साथ कम होता जाएगा। भारत कुल यात्री वाहन कार के सीबीयू (पूरी तरह से तैयार) कोटे के 15 प्रतिशत तक किसी मॉडल की सीमा भी तय कर सकता है, जो प्रति वर्ष अधिकतम 25,000 गाड़ी होगा।

हालांकि प्रतिस्पर्धा पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा। भारत ने 15,000 यूरो से कम कीमत की तेल-गैस इंजन और हाइब्रिड कारों को छूट के दायरे से बाहर रखा है, ताकि आम बाजार वाली श्रेणी को बचाया जा सके। यूरोप की इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) को शुरुआती चार सालों तक कोई रियायती पहुंच नहीं मिलेगी। पांचवें साल से केवल 20,000 यूरो या उससे ज्यादा कीमत वाली गाड़ियों को ही रियायतें मिलेंगी।

लग्जरी कार बनाने वाली यूरोपीय कंपनियों के मामले में एफटीए से उनकी स्थानीयकरण की रणनीति में कोई बड़ा बदलाव किए बिना ही आयातित मॉडल तक पहुंच बेहतर हो सकती है। मर्सिडीज-बेंज इंडिया का कहना है कि उसे निकट भविष्य में एफटीए की वजह से कीमतों में किसी कमी के आसार नहीं दिख रहे हैं। कंपनी की 90 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री स्थानीय स्तर पर बनी कारों की होती है और सीबीयू आयात से केवल 5 प्रतिशत बिक्री होती है।

इसके बजाय मर्सिडीज-बेंज को भारत के लिए आयात किए जाने वाले टॉप-एंड मॉडल का ज्यादा कोटा हासिल करने का मौका दिख रहा है।

मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अ​धिकारी संतोष अय्यर ने कहा, ‘एफटीए से हमें भारतीय बाजार के लिए ज्यादा गाड़ियां आवंटित करने की गुंजाइश जरूर मिलेगी। इसलिए पहले के मुकाबले ज्यादा ग्राहकों को हमारी टॉप-एंड गाड़ियों तक बेहतर पहुंच का फायदा मिलेगा।’ उन्होंने कहा कि कंपनी 30 सालों से भारत में विनिर्माण कर रही है और उसने धीरे-धीरे स्थानीय उत्पादन बढ़ाया है।

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First Published - September 13, 2026 | 9:59 PM IST

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