देश में टू-व्हीलर खरीदने वाले लोगों की पसंद धीरे-धीरे बदल रही है। पहले ज्यादातर लोग किसी मॉडल का सबसे सस्ता और बेसिक वर्जन खरीदना पसंद करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ये दावा TVS मोटर ने किया है।
TVS मोटर के इंडिया टू-व्हीलर बिजनेस के प्रेजिडेंट गौरव गुप्ता ने गुरुवार को बताया कि अगर किसी मॉडल में पांच वैरिएंट हैं, तो ग्राहक अब सबसे ज्यादा फीचर्स वाले टॉप वैरिएंट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यानी ग्राहक अब टेक्नोलॉजी, सेफ्टी और दूसरे फीचर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।
TVS के प्रीमियम बिजनेस हेड विमल सुमली ने कहा कि 150 CC और उससे ज्यादा इंजन क्षमता वाली प्रीमियम मोटरसाइकिलों की मांग दो तरह के ग्राहकों की वजह से बढ़ रही है। इनमें एक वे लोग हैं, जो पहले से बाइक चला रहे हैं और अब बड़ी बाइक खरीदना चाहते हैं। दूसरे वे लोग हैं, जो पहली बार बाइक खरीद रहे हैं।
सुमली के मुताबिक, बाइक खरीदने के लिए फाइनेंस की सुविधा आसान होने और लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ने से नए ग्राहक भी इस सेगमेंट में तेजी से आ रहे हैं।
इसके अलावा देश में सड़क और हाईवे बेहतर होने से लोग अपनी बाइक से ज्यादा परफॉर्मेंस की उम्मीद करने लगे हैं। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि नए बाइक खरीदारों और अपनी पुरानी बाइक से अपग्रेड करने वाले ग्राहकों में से किसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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यह जानकारी नई दिल्ली में हुए एक मीडिया राउंडटेबल के दौरान दी गई। इस मौके पर TVS ने अपने प्रीमियम मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो, यानी अपाचे और रोनिन में त्योहारी सीजन के लिए कुछ नए बदलाव पेश किए।
कंपनी के मुताबिक, प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट हर साल 22 फीसदी से ज्यादा की दर से बढ़ रहा है। पूरी मोटरसाइकिल इंडस्ट्री में 150 CC और उससे ज्यादा इंजन वाली बाइकों की हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है। पिछले दो से ढाई साल में TVS का प्रीमियम बाइक कारोबार 29 फीसदी बढ़ा है, जबकि इसी अवधि में पूरी इंडस्ट्री की ग्रोथ 12 फीसदी रही।
कंपनी ने अपनी ग्रोथ के उदाहरण के तौर पर रोनिन का भी जिक्र किया। इसकी औसत मासिक बिक्री पिछले साल 3,000 से 3,500 यूनिट थी, जो अब बढ़कर 9,000 से 9,500 यूनिट हो गई है। सुपर-प्रीमियम कैटेगरी में रोनिन की मार्केट हिस्सेदारी करीब 5.2 से 5.3 फीसदी है।
गौरव गुप्ता ने बताया कि कंपनी अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए अलग-अलग इलेक्ट्रिक मोटर टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है। इससे पहले सेमीकंडक्टर और मैग्नेट की कमी के कारण कंपनियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
उनके मुताबिक, कंपनी लंबे समय तक किसी एक मोटर टेक्नोलॉजी पर निर्भर नहीं रहना चाहती। इसलिए वह कई तरह के मोटर कॉम्बिनेशन को परख रही है, ताकि ग्राहकों को समय पर गाड़ियां मिलती रहें। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कंपनी किन खास टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है और इन्हें अपनाने में कितना समय लगेगा।
TVS के मुताबिक, इस साल अब तक इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी पहुंच गई है। कंपनी के पास फिलहाल करीब 40,000 से 45,000 यूनिट की EV प्रोडक्शन कैपेसिटी है। इसे नजदीकी भविष्य में बढ़ाकर 50,000 यूनिट से ज्यादा करने की योजना है।