AI Impact Summit 2026
AI Impact Summit 2026: भारत-एआई इम्पैक्ट समिट के तीसरे दिन का एजेंडा स्पष्ट रूप से इस बात पर केंद्रित है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artifical Intelligence) की महत्वाकांक्षाओं को जमीन पर कैसे उतारा जाए। बुधवार को होने वाली चर्चाओं में संप्रभु एआई अवसंरचना, वैश्विक स्तर पर अपनाने की चुनौतियां, शोध में नई प्रगति और नीतिगत प्राथमिकताओं जैसे अहम विषय शामिल हैं। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw सहित कई वैश्विक एआई विशेषज्ञ इस दिन अपने विचार साझा करेंगे।
समिट का तीसरा दिन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस बात पर फोकस करेगा कि एआई से जुड़े बड़े लक्ष्यों को व्यावहारिक रणनीतियों में कैसे बदला जाए। चर्चा का मुख्य विषय तकनीकी ढांचे में भरोसा बढ़ाना, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में एआई को तेजी से अपनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना होगा। नीति निर्माता, टेक कंपनियां, शोधकर्ता और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधि मिलकर इस बात की रूपरेखा तैयार करेंगे कि एआई का विस्तार जिम्मेदारी के साथ कैसे किया जाए ताकि राष्ट्रीय क्षमताएं भी सशक्त हों।
यह भी पढ़ें: AI Impact Summit 2026: PM बोले- लाभ सभी तक पहुंचे, सिर्फ शुरुआती उपयोगकर्ताओं तक सीमित न रहें
रिसर्च सत्र की शुरुआत Demis Hassabis के मुख्य भाषण से होगी, जो Google DeepMind के सीईओ और सह-संस्थापक हैं। वे वैश्विक एआई शोध की दिशा, नवाचार की प्राथमिकताओं और उन्नत एआई प्रणालियों के भविष्य पर प्रकाश डालेंगे। माना जा रहा है कि उनका संबोधन एआई अनुसंधान की बदलती प्रकृति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर केंद्रित रहेगा।
‘बिल्डिंग सॉवरेन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर’ विषयक कार्यकारी सत्र में एआई के पूरे जीवनचक्र पर चर्चा होगी। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर आर्किटेक्चर, डेटा और सॉफ्टवेयर लेयर, रणनीतिक स्वायत्तता और उद्योग परिवर्तन जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। इस सत्र में Calista Redmond और John Fanelli जैसे तकनीकी नेता भाग लेंगे। चर्चा का फोकस इस बात पर रहेगा कि देश अपनी जरूरतों के अनुरूप एआई ढांचा कैसे विकसित कर सकते हैं।
उद्घाटन सत्र में समिट की व्यापक दृष्टि और आगे की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया जाएगा। Ashwini Vaishnaw के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव S Krishnan भी इस मंच से संबोधित करेंगे। इस दौरान विभिन्न कार्य समूहों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और सिफारिशें भी प्रस्तुत की जाएंगी।
‘ग्लोबल साउथ में एआई अपनाने को बढ़ावा’ विषयक चर्चा में भरोसे की भूमिका पर विशेष जोर रहेगा। उभरती अर्थव्यवस्थाओं में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए मजबूत ट्रस्ट फ्रेमवर्क की जरूरत पर विचार किया जाएगा। Ria Strasser-Galvis और Terah Lyons जैसे विशेषज्ञ इस सत्र में अपने अनुभव साझा करेंगे।
‘एआई इन सस्टेनमेंट’ सत्र में सैन्य उपकरणों के रखरखाव और संचालन क्षमता बढ़ाने में एआई की भूमिका पर चर्चा होगी। भारतीय सेना के दक्षिणी कमान मुख्यालय से जुड़े PS Bindra और Tata Elxsi के प्रतिनिधि इस विषय पर प्रकाश डालेंगे। इसमें डेटा आधारित रखरखाव और उपकरणों की कार्यक्षमता सुधारने पर फोकस रहेगा।
‘इंजीनियरिंग द फ्यूचर’ सत्र में Google DeepMind और Google Cloud से जुड़े विशेषज्ञ बताएंगे कि एंड्रॉयड इकोसिस्टम के लिए उच्च प्रदर्शन एआई समाधान कैसे विकसित किए जा सकते हैं। Anand Rangarajan, Prashanth Subrahmanyam और Aneesha Dhar जैसे वक्ता तकनीकी स्टैक के विभिन्न स्तरों पर एआई के उपयोग की व्याख्या करेंगे।
‘आधार और एआई: द आइडेंटिटी पैराडॉक्स’ सत्र में डिजिटल पहचान प्रणालियों पर एआई के प्रभाव की चर्चा होगी। इसमें पक्षपात, गोपनीयता, डीपफेक, धोखाधड़ी रोकथाम और नैतिक उपयोग जैसे मुद्दों को उठाया जाएगा। UIDAI के इंजीनियरिंग प्रमुख Barada Prasad Sabut और डिजाइन सलाहकार Sridhar Dhulipala इस विषय पर अपने विचार रखेंगे।
समिट के दूसरे दिन सरकार, उद्योग और रक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने यह संकेत दिया कि एआई अब प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक उपयोग में आ चुका है। भारत के 200 अरब डॉलर के एआई निवेश लक्ष्य, स्वदेशी रक्षा तकनीक, कृषि सलाह प्रणालियां और डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने यह भी स्वीकार किया कि व्यापक स्तर पर अपनाने में अभी कई अंतराल हैं, विशेषकर कौशल विकास और कार्यबल परिवर्तन के क्षेत्र में। साथ ही भरोसेमंद और स्थानीय रूप से विकसित एआई सिस्टम की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
समिट का तीसरा दिन इस पूरी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए यह तय करेगा कि भारत और अन्य उभरते देश एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और जिम्मेदार विकास की दिशा में किस प्रकार ठोस कदम उठा सकते हैं।