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जबर्दस्ती कब्जा : टाटा मोटर्स फाईनेंस उपभोक्ता को देगा एक लाख रूपये

PTI

- July,05 2013 9:35 AM IST

नयी दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने कहा कि उच्चतम न्यायालय, कई उच्च न्यायालयों एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने वित्त कम्पनियों को निर्देश दिया है कि वाहन पर कब्जा लेते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन करें न कि लठैतों का प्रयोग कर उसे छीनें ।

सी. के. चतुर्वेदी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, कब्जा लेने से पहले दूसरी पार्टी :टाटा मोटर्स फाईनेंस: की तरफ से किसी भी साक्ष्य के अभाव में बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए वाहन पर जबर्दस्ती कब्जा लेने में हम उसे सेवा में कमी का दोषी मानते हैं ।

पीठ ने कहा, उच्चतम न्यायालय, राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने फैसला दिया है कि कम्पनियां लठैत भेजने जैसी प्रक्रियाएं नहीं अपना सकतीं और वाहन पर कब्जा लेने के लिए उसे कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी ।

पीठ ने टाटा मोटर्स फाईनेंस को निर्देश दिया कि वह विक्रम राणा को उत्पीड़न के लिए एक लाख रूपये का भुगतान करे ।

राणा की शिकायत पर यह आदेश आया । राणा ने शिकायत की थी कि 28 अगस्त 2006 को जब वह कार चला रहे थे तो वित्त कंपनी के एजेंट ने नारायणा के नजदीक उनकी कार रोकी और वे वाहन जबर्दस्ती ले गए ।

राणा ने दावा किया था कि रिण का ईएमआई वह लगातार चुका रहे थे और कम्पनी बिना नोटिस दिए कार ले गई ।

वाहन का फिर से कब्जा देने से इंकार करते हुए टाटा मोटर्स फाईनेंस ने कहा कि राणा नियमित रूप से भुगतान नहीं कर रहे थे । इसने कहा कि उन्हें नोटिस भी जारी किए गए थे ।

बहरहाल फोरम ने तर्क को खारिज करते हुए कहा कि वित्त कम्पनी ने ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया जो दर्शाता हो कि कार पर कब्जा लेने से पहले उसने राणा को नोटिस जारी किया था ।

भाषा

07041809 दि

नननन

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