बिजनेस स्टैंडर्ड - कॉरपोरेट कर में कटौती का वादा
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कॉरपोरेट कर में कटौती का वादा

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली August 09, 2019

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत को आज आश्वासन दिया कि सरकार के राजस्व की स्थिति सहज होने पर सभी कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर 25 फीसदी कर दिया जाएगा और प्रत्यक्ष कर के नियमों को सरल बनाया जाएगा। सीतारमण ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि कर मामलों में प्रताडऩा की शिकायतें सुनने और इससे होने वाली परेशानियों को समझने के लिए वह खुद मझोले शहरों का दौरा करेंगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म की भी स्थापना की जाएगी, जिस पर प्रताडऩा से जुड़ी जानकारियां डाली जाएंगी। इनमें पहचान सार्वजनिक की जा सकती है या छुपाई भी जा सकती है।
 
दूसरी ओर उद्योग जगत ने सरकार से अपनी परियोजनाओं के लिए समय पर भुगतान करने और संकट से जूझ रही वाहनों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती की मांग की। अभी वाहनों पर 28 फीसदी कर लगता है।  वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों से निवेश पटरी पर लौटेगा। उन्होंने कहा, 'हम कंपनियों का कर घटाना चाहते हैं और इस पर दोबारा सोचने की कोई जरूरत नहीं है।' सीतारमण ने उद्योग जगत को भरोसा दिया कि जैसे ही सरकार की राजस्व की स्थिति सहज होगी, सभी कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर की दर घटाकर 25 फीसदी कर दी जाएगी। अभी केवल कुछ बड़ी कंपनियां ही 30 फीसदी कॉरपोरेट कर के दायरे में आती हैं और बाकी कंपनियों के लिए इसे 25 फीसदी कर दिया गया है।
 
सीतारमण ने कहा कि प्रत्यक्ष कर संहिता पर गठित कार्यबल 15 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा और सरकार तुरंत उसकी सिफारिशों पर विचार करेगी। उन्होंने कहा, 'हम करों को सरल बनाना चाहते हैं। जैसे ही हमें रिपोर्ट मिलेगी, हम उसकी सिफारिशों पर विचार शुरू कर देंगे।' वित्त मंत्री ने बुनियादी चीजों से जुड़े कुछ अहम पहलुओं की समीक्षा की संभावना से इनकार भी नहीं किया। उन्होंने कहा कि खास तौर पर प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और रोजगार सृजन को प्रभावित करने वाली परियोजनाएं आगे लाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए सस्ती आवास योजनाओं को प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं क्योंकि प्रमुख क्षेत्रों पर ये असर छोड़ते हैं।' उन्होंने कंपनी अधिनियम में हाल में पारित संशोधन में निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पर शामिल आपराधिक जुर्माना प्रावधानों की समीक्षा का भी आश्वासन दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली तारीखों से प्रभावी सीएसआर नोटिस स्वीकार्य नहीं होंगे और वह ऐसे नोटिस आगे बढऩे नहीं देंगी। कंपनी अधिनियम में संशोधनों के बाद सरकार को संबंधित कंपनियों के अधिकारियों को तीन साल तक कारावास में रखने का अधिकार मिल गया है। इसके साथ ही सीएसआर नियमों का पालन नहीं करने पर उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 
 
नए संशोधनों के बाद कंपनियों को सीएसआर पर खर्च करना होगा। पहले कंपनियां शेयरधारकों को सीएसआर पर खर्च नहीं करने का कारण बताकर पल्ला झाड़ लेती थीं लेकिन अब इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार पर कंपनियों का बहुत बकाया है और वह इस समस्या के समाधान की दिशा में काम कर रही हैं। सूक्ष्म, लघु और मझोली कंपनियों का सरकार पर करीब 48,000 करोड़ रुपये बकाया है। पहले कदम के तौर पर सरकार उस राशि को जारी करेगी जिसमें कोई विवाद नहीं है। इस मौके पर सीआईआई के अध्यक्ष उदय कोटक ने सीतारमण से अनुरोध किया कि सरकार को विकास की गति बढ़ाने के लिए साहसिक कदमउठाने चाहिए।
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