Stock Market Closing Bell, March 19: भारतीय शेयर बाजार लगातार तीन ट्रेडिंग सेशन में बढ़त के बाद गुरुवार (19 मार्च) को बड़ी गिरावट में बंद हुए। अमेरिका और इजरायल के ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र और आसपास के ढांचे पर हमले की धमक से बाजार सहम गया। बदले में कतर में दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी प्लांट पर ईरान के हमले ने निवेशकों और डरा दिया। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। इसके अलावा इंडेक्स हैवी एचडीएफसी बैंक के शेयरों में तेज गिरावट ने भी बाजार को नीचे खींचा।
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 1500 से ज्यादा अंक गिरकर 74,750.92 पर खुला। कारोबार के दौरान यह ज्यादातर समय इसी स्तर के आस-पास रहा। लेकिन अंतिम 10 मिनट में बिकवाली तेज हो गई। अंत में सेंसेक्स 2496.89 अंक या 3.26 फीसदी गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ।
इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 23,180.95 पर खुला। कारोबार के दौरान यह ज्यादातर समय 2 प्रतिशत के नीचे ही बना और अंत में 775.65 अंक या 3.26 प्रतिशत की बहुत बड़ी गिरावट के साथ 23,002 पर बंद हुआ।
रेलिगेयर ब्रोकिंग में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट अजीत मिश्रा ने कहा, ”बिकवाली सभी सेक्टरों में देखी गई और हर सेक्टर लाल निशान में बंद हुआ, जो बाजार की व्यापक कमजोरी को दर्शाता है। ऑटो, रियल्टी और वित्तीय शेयर सबसे ज्यादा कमजोर रहे। व्यापक बाजार में भी भारी गिरावट आई, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक करीब 3-3 प्रतिशत टूट गए।”
उन्होंने कहा, ”कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी कीमतों को 119 डॉलर के करीब ले गई, जिससे नकारात्मक माहौल और गहरा गया। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव डाला। रुपये की कमजोरी और महंगाई व आर्थिक वृद्धि को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भी बाजार की धारणा को और कमजोर किया।”
सेंसेक्स की सभी कंपनियों के शेयर गुरुवार को गिरावट में रहे। सबसे ज्यादा गिरावट इटरनल, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, बनज फिनसर्व, ट्रेंट लिमिटेड और एक्सिस बैंक में आई। वहीं, सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार के ब्रोडर इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 3.19 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 2.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, क्रूड की कीमतों में तेजी
तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़त हुई, जब ईरान ने साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमले के बाद मध्य पूर्व के कई ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया। यह अमेरिका और इजरायल के साथ तेहरान के युद्ध में बड़ा कदम माना जा रहा है।
ब्रेंट क्रूड के फ्यूचर्स 3.69 डॉलर या 3.44 प्रतिशत बढ़कर 111.07 डॉलर हो गए। जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 2.29 डॉलर या 2.38 प्रतिशत बढ़कर 98.61 डॉलर पर पहुंच गया।
जियोजित इंवेस्टमेन में चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि युद्ध को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े LNG रिफाइनरी पर हमला किया है। ब्रेंट क्रूड अब 111 डॉलर पर पहुंच गया है।
HDFC Bank में बिकवाली
HDFC Bank के शेयरों में 8 प्रतिशत की गिरावट आ। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के चलते शेयरों में गिरावट आई। एनएसई इंडेक्स के अनुसार, एचडीएसी बैंक का निफ्टी 50 में 11 प्रतिशत से अधिक वजन है। इस बीच, पूर्व सीईओ केकी मिस्त्री को देश के सबसे बड़े निजी बैंक का अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया।
तीन दिन की तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग
बाजार में पिछले तीन ट्रेडिंग सेशन में बढ़त के बाद आज मुनाफा वसूली भी देखने को मिली। पिछले तीन ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स 2,140.21 अंक या 2.87 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निफ्टी 50 626 अंक या 2.7 प्रतिशत ऊपर गया।
एशिया के बाजार गुरुवार की शुरुआती ट्रेडिंग में गिरावट के साथ खुले। यह वॉल स्ट्रीट में रातभर आई गिरावट को दर्शाते हैं। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी क्रमशः 2.74 फीसदी और 2.50 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। निवेशकों की नजरें बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर निर्णय पर भी टिकी हुई है।
वहीं, एसएंडपी 500 और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज क्रमशः 1.36 प्रतिशत और 1.63 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। नैस्डैक कंपोजिट 1.46 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को दो दिवसीय नीति बैठक के अंत में अपनी प्रमुख नीति दर को 3.5–3.75% पर स्थिर रखा। चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि ईरान संघर्ष ने महंगाई के दृष्टिकोण को और अनिश्चित बना दिया है, जिससे ब्याज दरों के भविष्य के रास्ते का अनुमान लगाना कठिन हो गया है।
इज़राइल और ईरान के बीच हुए हमलों से एनर्जी व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र से सप्लाई में व्यवधान अपेक्षा से अधिक समय तक बना रह सकता है। ब्रेंट का मई फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट 120 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।