नई दिल्ली में बीएस मंथन कार्यक्रम में बोलती हुईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, फोटो क्रेडिट: कमलेश
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि कई बार राज्यों में बजट का पूरा पैसा खर्च नहीं हो पाता। इसकी एक बड़ी वजह राजनीतिक सोच भी होती है। वह नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित बीएस मंथन कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के हालात बजट के अनुमान के मुताबिक चल रहे हैं। हालांकि, दुनिया में चल रही अनिश्चित स्थिति और राज्यों में योजनाओं को सही तरीके से लागू न कर पाना चुनौती बना हुआ है।
वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों को पूंजी खर्च के लिए 50 साल का बिना ब्याज का कर्ज देती है। लेकिन सभी राज्य इसका पूरा फायदा नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि कुछ सुधारों से जुड़ी योजनाओं में बहुत कम राज्यों ने रुचि दिखाई। उनका कहना था कि कई बार राज्य यह देखते हैं कि उन्हें इससे राजनीतिक फायदा होगा या नहीं। अगर फायदा नहीं दिखता, तो वे उस योजना से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ समझा सकती है कि यह योजना राज्यों के हित में है, उससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकती।
सीतारमण ने कहा कि सरकार सिर्फ सरकारी कंपनियां बेचने पर ध्यान नहीं दे रही है, बल्कि कई क्षेत्रों को निजी कंपनियों के लिए खोल रही है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में अब निजी कंपनियों को मौका दिया जा रहा है। परमाणु ऊर्जा के छोटे रिएक्टरों में भी निजी भागीदारी की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि विनिवेश जरूरी है, लेकिन यह बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करता है। कोई फैसला लेने के बाद उसे लागू करने में समय लगता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि चीन से आने वाले निवेश की जांच की जाती है। यह प्रेस नोट 3 के नियमों के तहत होता है। उन्होंने कहा कि सरकार यह देखती है कि निवेश के पीछे असली मालिक कौन है। सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि सुरक्षा जैसे मुद्दे भी ध्यान में रखे जाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि टैक्स से जुड़े फैसले भारत का अधिकार हैं और इसमें कोई समझौता नहीं होगा।
सीतारमण ने कहा कि आयात शुल्क में बदलाव एक-एक चीज को देखकर किया जाता है। सब पर एक साथ फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि अब देश के अंदर से भी कारोबार के लिए पैसा आ रहा है। भारतीय निवेशक भी बाजार में सक्रिय हैं।
वित्त मंत्री ने एआई सम्मेलन में कांग्रेस के विरोध को गलत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम में प्रदर्शन करना ठीक नहीं है और इससे देश की छवि खराब होती है। उन्होंने कहा कि मजबूत विपक्ष जरूरी है, लेकिन देश के हित से जुड़े कार्यक्रमों में विरोध नहीं होना चाहिए।