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जोखिम से डरे तो होगा नुकसान

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Last Updated- December 15, 2022 | 2:55 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास मानते हैं कि चुनौती भरे इस समय में बैंकों को जोखिम से ज्यादा डरने की अपनी आदत छोड़ देनी चाहिए और इस वित्तीय माहौल में डटे रहने के लिए जोखिम से निपटने तथा बेहतर निर्णय लेने पर खास ध्यान देना चाहिए। दास ने बिजनेस स्टैंडर्ड के वेबिनार ‘अनलॉक बीएफएसआई 2.0’ के दौरान अपने संबोधन में आज यह सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘जोखिम से एकदम बचे रहने की आदत बैंकों को महफूज तो रख सकती है मगर उनके लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकती है। साथ ही इससे बैंकों के मुनाफे पर बुरा असर पड़ सकता है।’
दास ने कहा कि बैंकों की खराब स्थिति के लिए आम तौर पर कारोबारी माहौल के लिहाज से अनुपयुक्त कारोबारी मॉडल, प्रशासन और निर्णय लेने में ढिलाई अथवा उसकी कमी, बाहरी शेयरधारकों के हितों एवं आंतरिक प्रोत्साहन व्यवस्था में बेमेल तथा दूसरे कारक जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने कहा, ‘इसीलिए बेहतर तथा मजबूत बैंकों की बुनियाद अच्छे प्रशासन, प्रभावी जोखिम प्रबंधन तथा मजबूत आंतरिक नियंत्रण पर टिकी होती है।’ गवर्नर ने चेताया कि कोविड का असर कम करने के लिए किए गए उपाय हमेशा नहीं चलते रह सकते। तरलता, मौद्रिक, नियामकीय एवं निगरानी जैसे उपायों, ब्याज दरों में कटौती और मॉरेटोरियम आदि को धीरे-धीरे वापस ले लिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘आरबीआई द्वारा किए गए विभिन्न उपायों को कोविड संक्रमण खत्म होने के बाद वापस लेने के लिए बहुत ही सावधानी से आगे बढऩा होगा और वित्तीय क्षेत्र को भी नियामकीय सहारे के बगैर सामान्य स्थिति में लौटना होगा।’
मगर दास ने यह भी कहा कि जब जरूरत पड़ेगी, रिजर्व बैंक स्थिति काबू में करने के लिए कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, ‘दरों में कटौती हो या केंद्रीय बैंकिंग का कोई और पहलू हो, हमने अपने सभी नीतिगत विकल्प अभी इस्तेमाल नहीं किए हैं। हमने अपने सभी हथियार खत्म नहीं किए हैं। इस महीने की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ही हाथ रोकने का फैसला किया गया था।’
दरों में कटौती के वांछित लाभ मिले हैं और कुछ का असर अब भी दिख रहा है। दास ने कहा, ‘नियामक के तौर पर हमारी कोशिश है कि बॉन्ड और मुद्रा बाजार समेत वित्तीय बाजार के सभी क्षेत्रों का संचालन प्रभावी और स्थिर तरीके से होता रहे। हम इन पर निरंतर नजर रख रहे हैं और जब भी जरूरत महसूस होगी, हम जरूरी कदम उठाएंगे। मैं अभी यह नहीं बता सकता कि किस तरह के कदम उठाए जाएंगे। मगर हमारी जिम्मेदारी है कि सरकार सुचारु तरीके से और बिना किसी अड़चन के उधारी जुटा ले।’
आरबीआई देसी और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थिति तथा वित्तीय क्षेत्र पर पैनी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, ‘आरबीआई केवल कल की नहीं सोचना बल्कि बहुत आगे तक नजर बनाए रखता है। हम आज, कल या साल-दो साल आगे तक ही सोचकर नहीं रह जाते।’    
रिजर्व बैंक ने आगे की तस्वीर को लेकर काफी अनुमान जताए हैं मगर जब तक यह निश्चित नहीं हो जाता कि कोविड की स्थिति कैसी रहेगी तब तक मुद्रास्फीति और वृद्घि के बारे में अनुमान जताना मुश्किल होगा। दास ने कहा, ‘बहुत अनिश्चितता का दौर है। हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं। आप कोई भी आंकड़ा बता सकते हैं मगर यकीन के साथ यह नहीं कह सकते कि महीने भर बाद उसमें बदलाव नहीं होगा। जब कोई केंद्रीय बैंक आंकड़ा पेश करता है तो उसकी जवाबदेही होती है। हम एक-दो महीने बाद आंकड़े बदल नहीं सकते। जब कोविड संक्रमण की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी तो आरबीआई निश्चित तौर पर अनुमान जारी करेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि आंतरिक स्तर पर आरबीआई इस पर माथापच्ची कर रहा है।
दास के अनुसार नई मौद्रिक नीति समिति का गठन सरकार का विशेषाधिकार है मगर इसमें हितों के टकराव का ध्यान रखा जाएगा। आरबीआई गवर्नर चयन समिति में रहते हैं मगर सदस्यों के चयन का अंतिम निर्णय सरकार का होता है।
गवर्नर की राय है कि बैंकों को नई संभावना वाले क्षेत्रों पर ध्यान जरूर देना चाहिए और उन क्षेत्रों की मदद करनी चाहिए, जिनमें वापस पटरी पर आने की ज्यादा कुव्वत है। तमाम प्रयासों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों पर उतना ध्यान नहीं दिया गया है और स्टार्टअप, अक्षय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, वैल्यू चेन एवं अन्य संभावना भरे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
दास ने कहा, ‘बैंकिंग क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के विकास में जिम्मेदारी भरी भूमिका तो होती ही है, उसे अपनी कमाई पर भी ध्यान देना पड़ता है। इसलिए कारोबारी रणनीति पर पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है।’ महामारी के झटके से बैलेंस शीट पर दबाव काफी बढ़ गया है।

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First Published - August 27, 2020 | 11:33 PM IST

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