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क्यों विधानसभा चुनाव हारे केजरीवाल? ये हैं वो 5 बड़े कारण, जिसके चलते जनता ने AAP को दिखाया सत्ता से बाहर का रास्ता

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सत्ता में एक दशक बिताने के बाद, अपने प्रमुख वादों को पूरा करने में विफल रहने के कारण AAP को 2025 के दिल्ली चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा।

Last Updated- February 08, 2025 | 4:28 PM IST
Arvind Kejriwal

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव हार चुकी है। 26 नवंबर 2012 को, भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी से RTI कार्यकर्ता बने केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना की, जिसमें पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति की नई राह दिखाने का वादा किया गया था। हालांकि, सत्ता में एक दशक बिताने के बाद, अपने प्रमुख वादों को पूरा करने में विफल रहने के कारण AAP को 2025 के दिल्ली चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा।

पार्टी के गठन के एक दशक के भीतर, AAP को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया, जिससे यह हाल के समय की सबसे सफल राजनीतिक शुरुआत में से एक बन गई। मतदाताओं ने केजरीवाल की ‘आम आदमी’ वाली छवि और जीवन स्तर सुधारने के वादों से जुड़ाव महसूस किया, जिससे उन्हें 2015 और 2020 में प्रचंड बहुमत मिला। हालांकि, हाल के चुनावी नतीजे बताते हैं कि केजरीवाल की आम आदमी वाली छवि अब कमजोर पड़ गई है।

अब ‘आम आदमी’ नहीं रहे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल का दिल्ली की राजनीति में उदय उनकी ‘आम आदमी’ वाली छवि से जुड़ा था। भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता से दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर आम जनता से जुड़े रहने के निर्णयों से भरा रहा।

केजरीवाल को अक्सर साधारण कपड़ों में देखा जाता था – बिना इस्त्री किए हुए शर्ट और गर्दन पर लिपटा मफलर उनकी पहचान बन गए थे। हालांकि, हाल की सार्वजनिक सभाओं में उनके महंगे पफर जैकेट पहनने से यह छवि बदल गई। भाजपा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल की जैकेट की कीमत ₹25,000 है। हालांकि केजरीवाल ने इस दावे को खारिज किया, लेकिन इससे उनकी ‘आम आदमी’ वाली छवि को नुकसान पहुंचा।

‘शीश महल’ बना बड़ा मुद्दा

दिसंबर 2024 में, भाजपा ने केजरीवाल के आधिकारिक आवास 6 फ्लैग स्टाफ रोड की तस्वीरें जारी कीं और इसे ‘शीश महल’ करार दिया। भाजपा ने उन पर ₹3.75 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि से आलीशान नवीनीकरण कराने का आरोप लगाया, जिसमें जिम, सॉना और जैकुज़ी जैसी सुविधाएं शामिल थीं। यह घटना केजरीवाल की सादगी और मितव्ययिता वाली छवि के विपरीत थी और उन्हें पाखंड का दोषी ठहराया गया।

केजरीवाल ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि विपक्ष उनके खिलाफ गलत जानकारी फैला रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके आधिकारिक निवास के नवीनीकरण में कोई अनियमितता नहीं थी और सरकार के नियमों के तहत किया गया था। उन्होंने यह साबित करने के लिए घर खाली कर दिया, लेकिन तब तक उनकी छवि को नुकसान हो चुका था।

भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा से भ्रष्टाचार के आरोपी तक

केजरीवाल ने पहली बार 2011 के भारतीय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान प्रसिद्धि हासिल की, जब उन्होंने जन लोकपाल बिल की वकालत की। हालांकि, उनकी भ्रष्टाचार विरोधी छवि को झटका तब लगा जब उन्हें और AAP के वरिष्ठ नेताओं को कथित शराब नीति घोटाले में शामिल पाया गया, जिसके चलते वे जेल भी गए।

AAP सरकार की 2021 में शुरू की गई नई उत्पाद नीति का उद्देश्य शराब बिक्री का निजीकरण कर राजस्व बढ़ाना और शराब माफिया को खत्म करना था। हालांकि, आरोप लगे कि यह नीति कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थी, जिससे वित्तीय अनियमितताएं हुईं। जांच में सामने आया कि AAP नेताओं, जिनमें केजरीवाल भी शामिल थे, ने इसमें भ्रष्टाचार किया।

भारत में पहली बार किसी सिटिंग मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी

मार्च 2024 में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया, जो कथित रूप से शराब नीति घोटाले से जुड़ा था। यह भारत में पहली बार था जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया गया। उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा सितंबर 2024 में लगभग छह महीने की हिरासत के बाद जमानत दी गई, लेकिन अपनी छवि बचाने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

इस विवाद ने जनता के बीच उनकी ईमानदारी पर संदेह पैदा कर दिया और उनके राजनीतिक विरोधियों को उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का मौका दे दिया।

केजरीवाल के अधूरे वादे

2015 और 2020 के चुनाव अभियानों में, केजरीवाल ने कई वादे किए, जिनमें यमुना नदी की सफाई, वायु प्रदूषण में कमी, और कूड़े के पहाड़ों को खत्म करना शामिल था। हालांकि, ये वादे अधूरे ही रह गए।

यमुना को पांच साल में साफ करने का दावा पूरा नहीं हो सका, और 2024 तक नदी जहरीले झाग से भरी हुई थी। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लगाए गए स्मॉग टावर और एंटी-स्मॉग गन जैसे उपाय भी कारगर साबित नहीं हुए। दिल्ली के बड़े-बड़े कूड़े के पहाड़ भी जस के तस बने रहे।

केजरीवाल ने इन विफलताओं का दोष केंद्र सरकार के साथ विवादों और पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी पर डाला, लेकिन जनता ने इन्हें अधूरे वादों के रूप में देखा।

 

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First Published - February 8, 2025 | 4:28 PM IST

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