संसद के बजट सत्र की शेष अवधि की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्षी नेताओं के बीच समझौता होने के बाद लोक सभा ने मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। निर्णय की घोषणा करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन के भीतर या संसद परिसर में कहीं भी तख्तियां, पोस्टर, तस्वीरें या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से निर्मित चित्र प्रदर्शित नहीं किए जाने चाहिए।
इन आठ सांसदों को गत 3 फरवरी को नियम विरुद्ध आचरण करने पर पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। बजट सत्र आगामी 2 अप्रैल को समाप्त होना है। कांग्रेस के सुरेश ने अध्यक्ष से आग्रह किया था कि निलंबन रद्द किया जाए। उन्होंने कहा था कि सदन में हुई घटनाएं अफसोसनाक हैं और उनकी पार्टी सुचारु कामकाज चलाने में सहयोग के लिए तैयार है। विपक्षी सांसदों ने सत्तारूढ़ दल के कुछ सदस्यों, विशेषकर भाजपा के निशिकांत दुबे के आचरण पर भी सवाल उठाए। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्य नियमों का उल्लंघन नहीं करेंगे और उन्होंने पहले भी ऐसा कभी नहीं किया है।
उन्होंने कहा, ‘एक लक्ष्मण रेखा खींची जानी चाहिए।’ आगामी सार्वजनिक अवकाशों के दौरान कोई बैठक निर्धारित नहीं है और कई सांसदों द्वारा चुनावी राज्यों में प्रचार करने की उम्मीद है तथा वे कार्यवाही से अनुपस्थित रह सकते हैं। ऐसे में सरकार भी सत्र के शेष दिनों में अपने लंबित विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है। सदन में एक विधेयक प्रस्तुत होना है जो महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन करेगा ताकि परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही इसका क्रियान्वयन संभव हो सके। इस मुद्दे पर सरकार ने विपक्षी दलों से संपर्क किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने किरण रिजिजू को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि अधिनियम के ‘क्रियान्वयन की रूपरेखा और प्रक्रिया’ पर चर्चा हो सके।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अभी तक प्रस्तावित विधेयक को मंजूरी नहीं दी है। बुधवार को कैबिनेट बैठक निर्धारित है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि विधेयक एजेंडे में है या नहीं। सूत्रों ने कहा कि इसे पहले राज्य सभा में पेश किया जा सकता है।
महिला आरक्षण अधिनियम संसद द्वारा 2023 में पारित किया गया था। परंतु लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला संवैधानिक संशोधन केवल परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा। राज्य सभा में विपक्षी सांसदों ने अध्यक्ष सी. पी. राधाकृष्णन को लिखे पत्र में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय या विदेश मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की मांग की। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष, उसके भारत के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव, तथा अमेरिका सहित भारत द्वारा किए गए या चल रही व्यापार वार्ताओं का हवाला दिया।
विपक्ष द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य सभा ने 2010 से अब तक इन दोनों मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा नहीं की है। इसके अलावा 29 मंत्रालयों और विभागों पर भी तब से ऐसी चर्चा नहीं हुई है। इनमें रसायन और उर्वरक, नागरिक उड्डयन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, खान, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, तथा शिपिंग आदि शामिल हैं। विपक्ष के पत्र में कहा गया है कि इसके हस्ताक्षरकर्ता लगभग 100 सांसदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बजट सत्र में अब तकराज्य सभा ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय पर चर्चा की है।