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सवालों के घेरे में एग्जिट पोल: पश्चिम बंगाल में सर्वे से क्यों पीछे हटी बड़ी एजेंसियां?

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मतदाताओं की चुप्पी और पिछले रिकॉर्ड्स को देखते हुए एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई राज्यों में पुराने अनुमान 50% तक गलत रहे हैं

Last Updated- May 01, 2026 | 10:45 PM IST
Exit Poll
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

चुनाव विश्लेषण करने वाली फर्म ऐक्सिस मायइंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक प्रदीप गुप्ता ने कहा कि कंपनी ने इस बार पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनावों के लिए एग्जिट पोल आयोजित नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि 70 से 80 फीसदी प्रतिभागियों ने बात करने से इनकार कर दिया। यह पश्चिम बंगाल के संदर्भ में कम से कम अन्य चुनाव बाद सर्वेक्षणों (एग्जिट पोल) की विश्वसनीयता के बारे में चिंता बढ़ाता है।

वर्ष 2011 और 2021 के बीच 17 एजेंसियों के विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें से 56 परिणाम अंतिम परिणामों से काफी अलग थे। इस विश्लेषण में हाल ही में हुए चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुदुच्चेरी को कवर करने वाले 70 एग्जिट पोल परिणाम भी शामिल किए गए हैं। इन चुनावों के परिणाम 4 मई को आएंगे।  मालूम हो कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम में अभी तक सबसे ज्यादा एग्जिट पोल अनुमान गलत साबित हुए हैं।

वर्ष 2021 में एग्जिट पोल के अनुमान और वास्तविक परिणामों के बीच का अंतर महत्त्वपूर्ण था। इंडिया टुडे-ऐक्सिस मायइंडिया के अनुमान और अंतिम परिणाम में पश्चिम बंगाल में 50.3 फीसदी का अंतर दिखा, रिपब्लिक-सीएनएक्स के असम चुनावों के अनुमान और अंतिम परिणाम में 24 फीसदी का अंतर था और न्यूज 24-टुडेज चाणक्य के केरल के लिए लगाए गए अनुमान और अंतिम परिणाम में 22.5 फीसदी का अंतर दर्ज किया गया।  इस बार भी अधिकांश एग्जिट पोल ने अनुमान लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी की अगुआई में राष्ट्रीय

जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 2026 के पश्चिम बंगाल, असम और पुदुच्चेरी विधान सभा चुनावों में जीत हासिल कर सकती है।

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First Published - May 1, 2026 | 10:37 PM IST

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