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EPS पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की तैयारी में EPFO? जानें, इस पर एक्सपर्ट्स क्या सोचते हैं

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिकॉर्ड क्लेम सेटलमेंट के बाद अब EPFO EPS-95 पेंशन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, जिससे करोड़ों रिटायर्ड कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है

Last Updated- May 01, 2026 | 5:29 PM IST
EPFO
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश के करोड़ों प्राइवेट नौकरीपेशा लोगों और रिटायर हो चुके बुजुर्गों के लिए जल्द बड़ी राहत की खबर आ सकती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO अपने लाखों पेंशनर्स को फायदा देने की तैयारी में है। चर्चा है कि EPS-95 स्कीम के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन में जल्द अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है। बता दें कि EPFO ने अपनी पुरानी धीमी कामकाज वाली छवि भी बदली है। संस्था ने सिर्फ एक साल में रिकॉर्ड 8.31 करोड़ क्लेम निपटाकर नया रिकॉर्ड बना दिया है, जिससे करोड़ों लोगों को राहत मिली है।

पेंशन में 7.5 गुना इजाफे की तैयारी: क्या है हकीकत?

देशभर के रिटायर कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम 1,000 रुपये पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये किया जाए। उनका कहना है कि आज के दौर में 1,000 रुपये महीने महंगाई के मुकाबले बेहद कम है और इससे गुजारा करना मुश्किल हो रहा है।

इस मुद्दे पर एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार इसे बढ़ाने की सोच रही है तो उनकी सोच सही है, लेकिन इसे लागू करना इतना भी आसान नहीं होगा। बजाज कैपिटल के जॉइंट चेयरमैन और MD संजीव बजाज का कहना है कि खासकर शहरों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए 1,000 रुपये महीने की पेंशन का अब ज्यादा मतलब नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसे एक साथ 7.5 गुना बढ़ाना सरकार और EPFO दोनों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

बजाज कहते हैं, “EPFO का फंड पहले से ही आर्थिक दबाव में है और मौजूदा 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन जारी रखने के लिए भी सरकार को अतिरिक्त सहायता देनी पड़ रही है। ऐसे में अगर अचानक पेंशन बढ़ाकर 7,500 रुपये कर दी जाती है, तो इससे फंड पर बड़ा बोझ पड़ सकता है।”

उनका मानना है कि पेंशन में बढ़ोतरी जरूरी है, लेकिन इसे एक बार में लागू करने के बजाय धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से बढ़ाना ज्यादा व्यावहारिक और समझदारी वाला कदम होगा।

क्या EPFO फंड इस भारी बोझ को उठा पाएगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पेंशन को सात गुना से ज्यादा बढ़ाया जाता है, तो इसके लिए इतना पैसा आएगा कहां से? फिलहाल देश में 81 लाख से ज्यादा लोग EPS-95 स्कीम के तहत पेंशन पा रहे हैं। ऐसे में पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर सरकारी खर्च पर पड़ेगा।

सिट्रीन कूपरमैन इंडिया LLP में वाइस प्रेसिडेंट (फाइनेंस) अमित रजावत इस पूरे मामले को आर्थिक नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि 1,000 रुपये की पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये करना सरकार के खजाने पर बहुत बड़ा अतिरिक्त बोझ डाल सकता है।

Also Read: EPFO का नया सिस्टम: मई से शुरू होगी UPI से पैसे निकालने की सुविधा, तुरंत निकाल सकेंगे 75% तक बैलेंस

राजावत बताते हैं, “EPS-95 एक ‘डिफाइंड बेनिफिट’ स्कीम है। इसका मतलब यह है कि इसमें आने वाला पैसा यानी कर्मचारियों और कंपनियों का योगदान तय होता है, लेकिन पेंशन देने की जिम्मेदारी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में अगर बिना किसी बड़े सुधार या अतिरिक्त फंडिंग के अचानक पेंशन में भारी बढ़ोतरी कर दी जाती है, तो भविष्य में रिटायर होने वाले लोगों के लिए फंड पर दबाव बढ़ सकता है।”

दोनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले पूरी आर्थिक स्थिति का गहराई से आकलन करना होगा, ताकि मौजूदा पेंशनर्स को राहत भी मिले और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी फंड सुरक्षित बना रहे।

सिस्टम में बदलाव की जरूरत: पुरानी स्कीम, नई उम्मीदें

एक्सपर्ट्स का मानना है कि 1995 में बनाई गई यह पेंशन स्कीम अब 2025 की जरूरतों के हिसाब से काफी पुरानी पड़ चुकी है। उनका कहना है कि बदलते समय और बढ़ती महंगाई को देखते हुए इसमें बड़े और बुनियादी बदलाव करना जरूरी हो गया है।

बजाज ने भी इसी तरफ इशारा करते हुए कहा कि EPFO की ‘सैलरी सीलिंग’ यानी 15,000 रुपये की सीमा कई सालों से जस की तस बनी हुई है। उनका मानना है कि जब तक इस सीमा को नहीं बढ़ाया जाएगा, तब तक फंड में ज्यादा योगदान नहीं आएगा और पेंशन की रकम भी सीमित ही रहेगी।

राजावत के मुताबिक, टिकाऊ सुधार वही है जो बैलेंस बनाकर चले। वे सुझाव देते हैं कि सरकार को पेंशन राशि बढ़ाने के साथ-साथ योगदान की दरों (Contribution Rates) और पेंशन फार्मूले में भी सुधार करना चाहिए।

बजाज का कहना है कि पेंशन को महंगाई से जोड़ना भी बहुत जरूरी है, ताकि समय के साथ बुजुर्गों के पैसों की ताकत कम न हो। असली रिफॉर्म का मतलब है एक ऐसा सिस्टम बनाना जो केवल आज देखने में अच्छा न लगे, बल्कि आने वाले कई दशकों तक लोगों को आर्थिक सुरक्षा दे सके। सरकार और EPFO के बीच चल रही यह पूरी कवायद करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों के भविष्य की तस्वीर बदलने वाली साबित हो सकती है।

इस बीच EPFO ने ‘क्लेम सेटल’ में दिखाई तेजी

पेंशन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच EPFO की काम करने की तेजी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2025-26 में संस्था ने रिकॉर्ड 8.31 करोड़ क्लेम सेटल किए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के 6.01 करोड़ क्लेम के मुकाबले काफी ज्यादा है और इसे EPFO की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

बजाज का कहना है कि EPFO की इस तेजी पर जितनी चर्चा होनी चाहिए, उतनी नहीं हो रही है। उनके मुताबिक सिर्फ क्लेम की संख्या बढ़ना ही बड़ी बात नहीं है, बल्कि उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी और आसान तरीके से निपटाया जाना असली बदलाव दिखाता है।

उन्होंने कहा कि अब PF निकालने या एडवांस क्लेम करने के लिए दफ्तरों की खाक नहीं छाननी पड़ती। डिजिटलाइजेशन, आधार-लिंक्ड वेरिफिकेशन और ‘ई-प्राप्ति’ (E-PRAPTI) जैसे प्रोजेक्ट्स की वजह से अब PF का पैसा कुछ ही दिनों में लोगों के बैंक खातों में पहुंच रहा है।

दोनों एक्सपर्ट की सहमति है कि सरकार द्वारा पेंशन का पैसा बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसे पूरी प्लानिंग के साथ बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही उनका कहना है कि EPFO में हो रहा लगातार बदलाव सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी आसान बना रहा है, क्योंकि हर क्लेम के पीछे किसी न किसी की कोई बड़ी आर्थिक जरूरत जुड़ी होती है।

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First Published - May 1, 2026 | 5:29 PM IST

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