राजनीति

केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में कोर्ट से क्लीन चिट: क्या अब बदल जाएगी 2026 की राजनीति?

शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई है, जिससे आगामी गुजरात और पंजाब चुनावों में सियासी समीकरण बदलना तय माना जा रहा है

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- March 01, 2026 | 10:57 PM IST

लगभग सभी विपक्षी दलों ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व अन्य सहयोगियों को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि अदालत का फैसला केंद्र द्वारा अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का जीता-जागता प्रमाण है।

इसके विपरीत, कांग्रेस की दिल्ली इकाई ने फैसले के समय पर सवाल उठाया है। दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि इस तरह बरी करने जैसे फैसले अक्सर विधान सभा चुनावों के आसपास लिए जाते हैं। केजरीवाल को भी गुजरात विधान सभा चुनाव नजदीक होने के कारण छोड़ा गया है। 

गुजरात विधान सभा चुनाव अगले साल नवंबर-दिसंबर में होने हैं। हाल के दशकों में गुजरात विधान सभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई रही है, जिसमें कांग्रेस ने 2017 के विधान सभा चुनावों में भाजपा को तगड़ा झटका देकर डरा दिया था। लेकिन 2022 में आप ने राज्य में 5 सीटें जीतीं और लगभग 13 प्रतिशत वोट हासिल किए। आप के इस तरह मजबूत होने का सीधा फायदा भाजपा को हुआ और कांग्रेस को खासकर अपने पुराने गढ़ रहे दक्षिणी गुजरात के आदिवासी बहुल जिलों में भारी नुकसान उठाना पड़ा। 

आप ने गुजरात में 2021 के निकाय चुनावों में बढि़या प्रदर्शन किया था। सूरत नगर निगम में भाजपा पहले और आप दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी जबकि कांग्रेस को उसने तीसरे स्थान पर धकेल दिया था। वर्ष 2013 में चुनावी राजनीति में अपनी शुरुआत और उस वर्ष के दिल्ली विधान सभा चुनाव से आप ने अपनी ऊर्जा ज्यादातर उन राज्यों में चुनाव लड़ने पर केंद्रित की है, जहां भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं।

असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल तथा केंद्र शासित प्रदेश पुदुच्चेरी में इसी साल अप्रैल-मई में विधान सभा चुनाव होने हैं। इसमें आप की उप​स्थिति न के बराबर है। असम को छोड़कर अन्य राज्यों में भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला नहीं होता है। हालांकि, 2027 में पंजाब में विधान सभा चुनाव होने हैं, जहां आप और कांग्रेस प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं। ये चुनाव केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी की भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। वर्ष 2027 में मणिपुर, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में मार्च तक तथा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में नवंबर-दिसंबर तक विधान सभा चुनाव होने वाले हैं।

इनमें मणिपुर, गोवा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस सीधे तौर पर आमने-सामने होंगे जबकि गुजरात में आप के उभार से मुकाबला त्रिको​णीय हो सकता है। पंजाब में 2022 के विधान सभा चुनावों में आप ने बड़ी जीत हासिल करते हुए कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया था। यह भाजपा थोड़ी मजबूत हुई है तो शिरोमणि अकाली दल का गिराव हो रहा है। इसलिए आगामी चुनाव में मुख्य मुकाबला पुन: कांग्रेस और आप के बीच होने की संभावना है। 

First Published : March 1, 2026 | 10:57 PM IST