Editorial: तेल, महंगाई और वैश्विक संकट के बीच ब्याज दरों पर विराम के आसार
अप्रैल में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की पिछली बैठक के बाद से आर्थिक अनिश्चितता में उल्लेखनीय कमी नहीं आई है और इस सप्ताह भी इसकी चर्चा पर हावी रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम टिक नहीं पाया और होर्मुज स्ट्रेट फिर से अवरुद्ध हो गया। इसके साथ ही इस […]
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RBI की ‘इंतजार करो और देखो’ की रणनीति, ब्याज दरें स्थिर रहने के आसार
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों के लिए पिछला पखवाड़ा घटनापूर्ण रहा। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान ने अपनी नीतिगत ब्याज दर को 1 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। उसने मुद्रास्फीति के जोखिम बढ़ने की स्थिति में उधार लागत बढ़ाने की अपनी तत्परता दोहराई। उसकी नीतिगत बैठक में मध्य जून में बढ़ोतरी कर 1 प्रतिशत करने के […]
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जेनज़ी ने उजागर की खामी क्या लाभ ले पाएगा विपक्ष?
आप अपने राजनीतिक रुझान के अनुसार जंतर मंतर को एक क्रांति के रूप में अथवा एक गुजरे हुए तूफान के रूप में देख सकते हैं। मेरे तर्कों से किसी की सोच नहीं बदलने वाली। बहरहाल, क्या मैं यह कहने का प्रयास करूं कि क्या हुआ और क्या नहीं? जो कुछ हुआ वह मोदी सरकार के […]
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तकनीकी सामंतवाद का खतरा: क्या अब देशों की सरकारों से भी ताकतवर हो रही हैं कॉरपोरेट कंपनियां?
जैसे-जैसे दुनिया अलग-अलग देशों के छोटे और संकरे गुटों में बंटती जा रही है, यह खतरा खड़ा हो गया है कि राज्य से परे कॉरपोरेट हित वैश्विक निर्णयों पर हावी होने लगेंगे। कई तरह के व्यवधानों के इस दौर में प्रौद्योगिकी पर संप्रभु नियंत्रण और ऐसी भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण का चलन है, जिन […]
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