Editorial: सीमाओं से परे बढ़ता सेवाओं का व्यापार
वैश्विक व्यापार में आ रहे बदलावों को समझने का एक तरीका है गुरुत्व मॉडल जो कहता है कि दो देशों के बीच होने वाला द्विपक्षीय व्यापार उनके आर्थिक आकार के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य में प्रकाशित एक अध्ययन दिखाता है […]
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पारंपरिक प्रसारण की ढीली होती पकड़ के बीच रेटिंग का शोर-गुल, नियमन पर उठे सवाल
जुलाई 2000 से हर सप्ताह रात 9 बजे सबके घरों से एक आवाज जरूर सुनाई देती थी। लगभग सभी उम्र के लोगों पर जादू चलाने वाली वह आवाज थी ‘मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूं और आप देख रहे हैं कौन बनेगा करोड़पति’। भारत के 35 करोड़ टीवी दर्शकों में आधे से अधिक (उस समय) […]
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आत्मनिर्भरता से आगे: भारत के भविष्य को क्यों परस्पर निर्भरता आकार देगी?
एक पुराना चीनी शाप कहता है, ‘ईश्वर करे तुम्हारा दिलचस्प समय आए।’ यह कहावत सुनने वाले के लिए ‘अव्यवस्था, अनिश्चितता और उथल-पुथल’ की कामना करती है। यही पिछले छह हफ्तों में दुनिया का सार है, जब अमेरिका और इजरायल ने जंग छेड़ी। इस युद्ध ने गैस की कमी, व्यापक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान और तेल की […]
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संकट को अवसर में बदलें: युद्ध से सबक लेकर भारत को अपनी आर्थिक नीतियां सुधारने की जरूरत
संकट प्रबंधन के मामले में भारत सरकार का प्रदर्शन मिलाजुला रहा है। कुछ आपात स्थितियों से निपटने के वर्षों के अनुभव ने प्रशासनिक तंत्र को प्रबंधन के उपाय पहले से ही कर लेने की कला सिखाई है। नतीजतन भारत में सूखे की मार अब उतनी गंभीर रूप से नहीं पड़ती (जैसा कि इस वर्ष पड़ने […]
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