महिला वोटरों के लिए मुफ्त योजनाओं की होड़, क्या इससे बदल रही महिलाओं की आर्थिक स्थिति?
भारत की महिलाओं, विशेषकर गरीबी रेखा के आसपास रहने वाली महिलाओं की स्थिति इतनी अच्छी कभी नहीं रही। पिछले कई वर्षों से बढ़ती संख्या में राजनीतिक दलों ने उन्हें चुनावी प्रक्रिया का एक संभावित लाभदायक पहलू मान लिया है। उत्तर भारत में, बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने 2016 में राज्य में […]
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Editorial: यूपीआई के बाद अब ऋण क्रांति की बारी, फिनटेक बढ़ाएं सेवाओं का दायरा
भारत में वित्त-तकनीक (फिनटेक) क्षेत्र में आई क्रांति का दायरा अब बढ़ना चाहिए। इसे केवल भुगतान तक न सीमित रहकर अब ऋण आवंटन दिशा में भी कदम बढ़ाना चाहिए। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिये होने वाले लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने के बाद फिनटेक कंपनियों के लिए राजस्व की तस्वीर अब […]
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RBI की डॉलर-रुपया स्वैप से मिली बड़ी राहत, अब टिकाऊ और बिना कर्ज वाली विदेशी पूंजी पर जोर जरूरी
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि उसने अपनी विशेष डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा अदला-बदली (स्वैप) सुविधा के तहत 136.37 अरब डॉलर रकम जुटाई है। इसमें विदेशी मुद्रा अनिवासी या एफसीएनआर (बी) जमा की हिस्सेदारी 127.23 अरब डॉलर रही है। यह कुल रकम का 93 फीसदी है। आरबीआई को उम्मीद से कहीं अधिक रकम मिली […]
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वैश्विक व्यापार नीतियों में बढ़े विरोधाभास, अमेरिका-चीन से भारत तक दोहरे मानदंडों ने बढ़ाई चिंता
दुनिया भू-राजनीति के प्रचंड दबाव और कोविड महामारी के दौरान आपूर्ति व्यवस्था में आए व्यवधान की कठिन चुनौती से निपटने में लगी है। दुनिया को झकझोर देने वाली इन समस्याओं की जटिलता रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ और बढ़ गई थी और अब अमेरिका व चीन के बीच व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा […]
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