Editorial: कच्चा तेल सस्ता, लेकिन वैश्विक वित्तीय जोखिम अब भी भारत के लिए चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है। अब ये कीमतें घटकर लड़ाई के पहले के स्तर तक आ गई हैं जिससे भारत जैसे देशों को काफी लाभ पहुंचा है क्योंकि हम अपनी तेल जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए तेल […]
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म्युचुअल फंड बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर बहस और जमीनी हकीकत
भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो वर्षों में ज्यादातर वक्त एक खास सोच हावी रही है। वह सोच यह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की तरफ से अंधाधुंध बिकवाली के बावजूद शेयरों की कीमतों पर खास फर्क नहीं पड़ा है। घरेलू म्युचुअल फंड (डीएमएफ) ‘आखिरी खरीदार’ या संकट मोचक के रूप में हालात को […]
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श्रम आय को नहीं, तो पूंजीगत लाभ को भी विशेष कर रियायत क्यों?
गत सप्ताह ईलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सूचीबद्धता के साथ ही दुनिया को पहला ट्रिलिनेयर मिल गया और कंपनी का मूल्यांकन दो लाख करोड़ डॉलर के पार हो गया। ऐसा उस कंपनी के साथ हुआ जिसने 2025 में 19 अरब डॉलर से कम का राजस्व हासिल किया और जिसे 4.9 अरब डॉलर का शुद्ध […]
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Editorial: सरकारी आंकड़ों के लिए देश का पहला AI चालित साझा डेटा मंच बेहद जरूरी कदम
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) अपनी तरह का पहला साझा डेटा मंच (सीडीपी) बनाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही वह आधिकारिक आंकड़ों के लिए एक समर्पित एआई चालित लार्ज लैंग्वेंज मॉडल (एलएलएम) बनाने की योजना बना रहा है जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और राष्ट्रीय लेखा प्रभाग से लगभग 300 आधिकारिक डेटासेट को […]
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