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महंगे भाव ने बदली किसानों की पसंद, मक्का छोड़ फिर सोयाबीन की खेती की ओर लौटे किसान

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सोयाबीन की ज्यादा बोआई के संभावना के बीच इसका उत्पादन अगले 3 माह के दौरान बारिश पर निर्भर करेगा

Last Updated- July 02, 2026 | 1:42 PM IST
soybean
सोयाबीन की फसल

किसान कमजोर मानसून के बावजूद इस साल सोयाबीन खूब बो रहे हैं। जिससे इसका रकबा पिछले साल से अ​धिक होने की संभावना है। इसकी वजह सोयाबीन के दाम ज्यादा होना मानी जा रही है। हालांकि हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सोयाबीन की बोआई पिछड़ रही है। लेकिन किसान और सोया उद्योग का कहना है कि ऐसा आंकड़ा जुटाने में देरी के कारण हो सकता है। 

बढ़ेगा सोयाबीन का रकबा

सोयाबीन उद्योग के प्रमुख संगठन सोयाबीन प्रोसेसिंग उद्योग सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक ने कहा “हमें उम्मीद है कि इस वर्ष सोयाबीन का रकबा पिछले साल के मुकाबले अधिक रहेगा। हालांकि कुल उत्पादन इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले तीन महीनों के दौरान मानसून इस फसल के कितना अनुकूल रहता है”। 

मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसान रोहित का​शिव ने कहा कि सोयाबीन की बोआई के लिए अभी मानसून में ज्यादा देरी नहीं हुई। 15 जुलाई तक का समय है। दो–तीन दिन से बारिश भी होने लगी है। गुरुवार को भी बारिश हुई । मैं इस साल करीब 45 एकड़ में साेयाबीन बो रहा हूं। पहले मैंने इसकी खेती कम करने की सोची थी। हमारे इलाके में ज्यादातर किसान पिछले साल से अ​धिक सोयाबीन की खेती कर रहे हैं। सोयाबीन किसान दिलीप पाटीदार ने भी बताया कि भले मानसून में देरी हुई हो लेकिन किसान सोयाबीन की बोआई खूब कर रहे हैं।

अब तक कितनी हुई बोआई?

सोपा द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक 30 जून 28.92 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोआई हो चुकी है, यह आंकड़ा पिछले सप्ताह तक के सरकारी रकबा 6.92 लाख हेक्टेयर से अ​धिक है। उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के जारी होने में आमतौर पर 7 से 10 दिनों की देरी होती है, इसलिए आधिकारिक आंकड़े हमारे अनुमान से कम दिखाई दे रहे हैं।

सोपा के मुताबिक ​पिछले साल खरीफ सीजन में 115.20 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोआई हुई थी, जो 2024 के रकबा 118.31 लाख हेक्टेयर से कम थी। सोपा के अनुसार इस साल सोयाबीन की बोआई 115.20 लाख हेक्टेयर से अ​धिक हो सकती है। 

क्यों बढ़ेगा सोयाबीन का रकबा?

पाठक ने क​हा कि पिछले साल जिन किसानों ने मक्का की खेती पर जोर दिया था, उनमें से कई इस बार सोयाबीन की अच्छी कीमतों को देखते हुए फिर से सोयाबीन की खेती की ओर लौट आए हैं। हालांकि मानसून में देरी के कारण इस वर्ष सोयाबीन की बोआई पिछले साल की तुलना में देर से शुरू हुई है।

मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त बारिश होने से यह तेजी से आगे बढ़ रही है और हमें उम्मीद है कि 15 जुलाई तक पूरे राज्य में बोआई पूरी हो जाएगी। महाराष्ट्र में पर्याप्त मिट्टी की नमी नहीं होने के कारण बोआई की रफ्तार धीमी है, लेकिन अगले दो सप्ताह में इसमें तेजी आने की उम्मीद है। अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी बोआई संतोषजनक गति से जारी है।

का​शिव ने कहा “मैंने भी इस साल 10 एकड़ में मक्का की बोआई करने की तैयारी कर ली थी। लेकिन सिर्फ 2.5 एकड़ में ही इसकी बोआई की क्योंकि इस बार एक तो सोयाबीन के दाम ज्यादा हैं। साथ ही मानसून में देरी के कारण मक्का की फसल में भी देरी हो सकती है। जिससे गेहूं की बोआई प्रभावित होगी।” साेयाबीन की फसल मक्का की तुलना में कम समय में आ जाती है।

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First Published - July 2, 2026 | 1:42 PM IST

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