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टीकों की नई व्यवस्था

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 5:41 AM IST

केंद्र सरकार ने टीका वितरण की अपनी योजना मेंं बड़े बदलाव किए हैं। नए दिशानिर्देशों को ‘उदार और तीव्र तृतीय चरण नीति’ का नाम दिया गया है। इसमें सबसे अहम बात यह है कि आगामी 1 मई से 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीयों को टीका लगवाने की इजाजत होगी। केंद्र सरकार अपनी भूमिका पहले की तरह 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के अलावा स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति पर काम करने वालों के नि:शुल्क टीकाकरण तक सीमित रखेगी। देश में बनने वाले टीकों में से आधे टीकों पर उसका अधिकार रहेगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे टीका उत्पादक कंपनियों से टीके खरीदें और वे अपने यहां टीका लगाने संबंधी निर्णय ले सकेंगे। सरकार का कहना है कि ये दिशानिर्देश इसलिए तैयार किए गए हैं ताकि आम लोगों, कंपनियों और राज्य सरकारों को टीकों की ‘कीमत, खरीद, पात्रता और उन्हें लगाने’ के मामले में निर्णय लेने की आजादी प्रदान की जा सके।
यह आजादी टीकाकरण की शुरुआत से ही सरकार की योजना का हिस्सा होनी चाहिए थी। यदि गत वर्ष दिसंबर से नहीं तो भी कम से कम मार्च से ऐसा होना चाहिए था जब 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाए जाने की सुविधा दी गई। संभव है कि सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि कोविड-19 संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों की मौत हो रही हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं पर तो दबाव है ही, राजनीतिक विपक्ष ने भी काफी दबाव बनाया है। यदि ऐसा है, तो भी यह अच्छी बात है कि सरकार ने समझदारी अपनाई और उस प्रणाली पर नहीं टिकी रही जो नाकाम साबित हो रही थी। इस निर्णय के बाद टीकाकरण नए सिरे से जोर पकड़ सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि सरकार नए उभरते संकट के मामलों में सहजता से प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। टीकों की मांग को सबके लिए खोलने के बाद सवाल यह है कि आपूर्ति बढ़ाने के लिए क्या करना है।
गत सप्ताह सरकार ने यह घोषणा भी की थी कि कुछ विश्वसनीय विदेशी नियामकों की ओर से स्वीकृत टीकों को भी देश में आपात इस्तेमाल की इजाजत दी जाएगी। इन टीकों को भारतीय मरीजों पर परीक्षण करने की अनिवार्यता भी नहीं होगी। खबरों के मुताबिक मौजूदा टीकाकरण में अहम भूमिका निभाने वाली दो भारतीय टीका निर्माता कंपनियों सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और भारत बायोटेक को सरकार की ओर से क्रमश: 3,000 करोड़ रुपये और 1,500 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि प्रदान की जाएगी। एसआईआई ने हाल ही में सरकार से यह राशि मांगी थी ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। सरकार को अमेरिकी प्रशासन से सीधे बातचीत करके टीका उत्पादन से जुड़े अहम कच्चे माल पर निर्यात नियंत्रण शिथिल करवाने चाहिए। एसआईआई का कहना है कि यह भी टीका उत्पादन बढ़ाने में एक बड़ी बाधा है।
एक चिंता यह भी है कि अब टीकाकरण का दायित्व राज्यों पर होगा जिससे कई तरह के विवाद पैदा हो सकते हैं। राज्य सरकारों को स्वतंत्र रूप से टीका खरीदने के लिए प्रेरित करने से राज्यों मेंं टीका उत्पादकों को धमकाने या उन पर दबाव बनाने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। ऐसे विवाद से बचने के लिए सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हालिया अनुशंसा के अनुरूप अपने नियंत्रण वाले आधे टीकों का राज्यों में बंटवारा करने का पारदर्शी तरीका निकालना चाहिए और उसका अनुसरण करना चाहिए। राज्यों को भी चाहिए कि वे इस नई नीति को स्पष्ट सुझाव मानें कि उन्हें अपने यहां निजी आपूर्तिकर्ताओं की दिक्कतें दूर करनी हैं। भारतीयों ने अतीत मेंं दिखाया है कि वे निजी चिकित्सा सुविधाओं का मूल्य चुकाने को तैयार हैं। राज्य सरकारों को इसका फायदा उठाना चाहिए और निजी क्षेत्र की राह बंद नहीं करनी चाहिए।

First Published : April 20, 2021 | 11:17 PM IST