अमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को जब अपने लगभग सभी कारोबारी साझेदार देशों के विरुद्ध व्यापार अधिनियम 1974 के सेक्शन 301 के तहत शुल्क लगाए तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। नए शुल्क सेक्शन 122 के तहत लगाए गए शुल्क की जगह आए हैं। इस सेक्शन में अधिकतम 150 दिनों के लिए शुल्क लगाए जा सकते हैं और यह मियाद पिछले हफ्ते खत्म हो गई। सेक्शन 122 के तहत शुल्क तब लगाए गए थे, जब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत पिछले वर्ष लागू किए गए तथाकथित जवाबी शुल्कों को अवैध करार दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का प्रशासन असल में अब भी नए शुल्क लगा रहा है, जिस कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। धारा 301 के तहत कार्रवाई करने के लिए पहले जांच की जाती है और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। मगर शुरू से ही स्पष्ट था कि अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने जांच बाद में शुल्क लगाने की नीयत के साथ आरंभ की हैं। शुक्रवार को नया शुल्क इस आधार पर लगाया गया था कि संबंधित देश ने जबरन श्रम यानी बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इसी प्रकार अत्यधिक उत्पादन क्षमता के मुद्दे पर भी एक जांच चल रही है, जिसके आधार पर भविष्य में और भी शुल्क लगाए जा सकते हैं।
भारत से होने वाले आयात पर सर्वाधिक तरजीही देश पर लागू कर के अलावा 10 फीसदी शुल्क और लगेगा। यूएसटीआर ने पहले भारत पर 12.5 फीसदी शुल्क का प्रस्ताव रखा था। किंतु बंधुआ मजदूरी से जुड़ा आयात रोकने के लिए जरूरी बदलाव होने के बाद अमेरिका ने शायद भारत के लिए शुल्क की दर कम कर दी। बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों पर भी 10 फीसदी शुल्क ही लागू रहेगा। चीन जैसे देशों को 12.5 फीसदी शुल्क के दायरे में रखा गया है और जापान, दक्षिण कोरिया जैसे कुछ देशों तथा यूरोपीय संघ आदि को सार्वधिक तरजीही देश की दर पर शुल्क देना होगा। अतिरिक्त क्षमता की जांच के बाद शुल्क लगा तो कुल दर जवाबी शुल्क के बराबर हो जाएगी।
दरअसल ट्रंप की आर्थिक नीति शुल्कों के इर्द-गिर्द ही है, जो भूराजनीति और अन्य मुद्दों पर काम करने का पसंदीदा जरिया है। उदाहरण के लिए अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल आयात करने पर भारत के ऊपर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे। हाल ही में एक विधेयक पेश हुआ, जिससे ट्रंप को दोबारा ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाएगा। अमेरिका ने हाल ही में ब्राजील से आयातित कुछ वस्तुओं पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है।
कनाडा से आयातित कुछ वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है और कहा गया है कि वहां अमेरिकी वस्तुओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के कारण किया जा रहा है। ट्रंप ने अगस्त 2028 से जेनेरिक दवाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन द्वारा अपनाई गई नीतियों से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिश्चितता खड़ी हो गई है और अनिश्चितता केवल आर्थिक नीति तक सीमित नहीं है। ईरान के खिलाफ उसका अंतहीन युद्ध पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल रहा है।
भारत फिलहाल अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है और फरवरी में एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा भी घोषित की गई थी। मगर तब से बहुत कुछ बदल गया है और शुल्क व्यवस्था में लगातार हो रहे बदलाव के कारण भारतीय वार्ताकारों के लिए किसी भी बात पर सहमत होना कठिन होगा। संभव है कि अमेरिका अतिरिक्त क्षमता की जांच के परिणाम आने के बाद समझौते के लिए दबाव बनाए। भारतीय पक्ष को अपने हित सुरक्षित रखने और कुछ निश्चितता के साथ अनुकूल व्यापार समझौता करने के लिए लगातार बातचीत करनी होगी।
अमेरिकी नीति की हालत देखते हुए भारत को व्यापार में विविधता लाने के लिए भी जुट जाना चाहिए। उसने कई व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करके अच्छा किया है, जिनमें यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ के साथ समझौते भी शामिल हैं। अब उसे इन व्यापार समझौतों का पूरा उपयोग करने और विश्व स्तर पर होड़ करने की अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।