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Editorial: सीजफायर की जमीनी हकीकत, होर्मुज संकट गहराया

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जब दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौ सेना समुद्री वैध सीमाओं के करीब खाड़ी की सीमाओं से काफी दूर, ईरानी पोतों का पीछा कर रही है तो इस गतिरोध को दूर कर पाना मुश्किल नजर आ रहा है

Last Updated- April 22, 2026 | 10:18 PM IST
Iran US Conflict

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की अवधि आगे बढ़ाए जाने ने इस बात को रेखांकित किया है कि पश्चिम एशिया के युद्ध में शामिल बड़ी शक्तियों और उनके सहयोगियों में युद्ध की इच्छा कमजोर पड़ी है। बहरहाल अमेरिका द्वारा अप्रत्याशित रूप से होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करने के निर्णय के बाद भविष्य की राह अनिश्चित नजर आ रही है।

जब दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौ सेना समुद्री वैध सीमाओं के करीब खाड़ी की सीमाओं से काफी दूर, ईरानी पोतों का पीछा कर रही है तो इस गतिरोध को दूर कर पाना मुश्किल नजर आ रहा है। ईरान ने भी अमेरिका की बंदी की प्रतिक्रिया में होर्मुज स्ट्रेट को एक बार खोलकर दोबारा बंद कर दिया है। ऐसे में राजनीतिक और आर्थिक हालात दो सप्ताह पहले युद्ध विराम के शुरुआती समय की तुलना में कहीं अधिक बिगड़ चुके हैं।

यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अमेरिका को गतिरोध दूर करने के लिए एक उपयुक्त हल तलाश करना होगा। युद्ध विराम की अवधि बढ़ा कर लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करके अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान में कथित मतभेद पर दांव लगा रहे हैं ताकि ईरान के वार्ताकारों को बातचीत के लिए दोबारा राजी किया जाए। हालांकि अब तक इस कदम के पीछे का तर्क समझ से परे है।

यदि, जैसा कि रिपोर्ट किया गया है, शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) सक्रिय रूप से राजनीतिक नेताओं को दरकिनार कर रही है, तो साझा आधार खोज पाना कठिन है। अपनी प्रकृति से ही ईरान की सर्वोच्च शासकीय एजेंसी होने के कारण, आईआरजीसी राजनीतिक नेतृत्व की तुलना में कहीं अधिक कठोर होगी और अमेरिका की चुनौतीपूर्ण शर्तों यानी यूरेनियम संवर्धन पर रोक और हमास व हिज्बुल्लाह जैसे सहयोगी समूहों के हथियारविहीन होने को स्वीकार करने में अनिच्छुक रहेगी, जब तक कि इजरायल परमाणु हथियारों से लैस विस्तारवादी शक्ति बना रहता है।

इसलिए बहुत कुछ लेबनान और इजरायल के बीच अमेरिका-प्रायोजित शांति वार्ताओं पर निर्भर करता है। इसके अलावा, अमेरिकी नाकाबंदी ईरान की निर्यात आय और खाद्य पदार्थ, अनाज तथा दवाइयों जैसे आवश्यक आयातों को निस्संदेह सीमित करेगी, जिससे उसके लोगों का कष्ट बढ़ेगा। वास्तव में, संघर्ष शुरू होने के बाद भी देश ने अपना तेल निर्यात जारी रखा और ऊंची कीमतों का लाभ उठाया। होर्मुज स्ट्रेट से पारगमन शुल्क लगाने के साथ-साथ, ईरान ने एक तरह का बफर तैयार कर लिया है।

मार्च में, उसने पिछले डेढ़ वर्ष में अपनी पांचवीं सबसे ऊंची आय दर्ज की। इसके अलावा, दशकों से बढ़ती पाबंदियों ने ईरानी जनता को कठिनाइयों के प्रति अभ्यस्त बना दिया है। इस स्थिति में, एक और नाकाबंदी झेलना उनके लिए बहुत कठिन नहीं होना चाहिए। इतना कष्ट झेलने के बाद, ईरानी शायद इस समय पीछे हटने के लिए तैयार न हों।

इस बीच, दुनिया ईंधन की कमी के कारण विनाशकारी आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से जूझ रही है। तेल की कीमतें, जो युद्ध विराम की घोषणा के समय कुछ हद तक स्थिर हुई थीं, फिर से बढ़ गईं जब अमेरिकी नौ सेना ने एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पहले ही 2026 की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 3.3 फीसदी से घटाकर 3.1 फीसदी कर दिया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह आकलन आशावादी प्रतीत होता है।

भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया, जो आर्थिक वृद्धि के लिहाज से सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक है, नाकाबंदी का सबसे अधिक खमियाजा भुगत रहे हैं। खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आने वाला 80 फीसदी से अधिक कच्चा तेल और अन्य जीवाश्म ईंधन एशिया के लिए होता है।

यह तथ्य कि ईरान का 90 फीसदी तेल चीन जाता है, चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ने का जोखिम बढ़ाता है, जिसके परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। संक्षेप में, युद्ध विराम और नाकाबंदी ने जमीनी हकीकतों को उतना नहीं बदला है जितना कि युद्ध को फिर से शुरू करने से बदलता।

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First Published - April 22, 2026 | 10:14 PM IST

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