भारत में कुछ नौकरियां अब इतनी ज्यादा सैलरी दे रही हैं कि आंकड़े सुनकर ही हैरानी हो सकती है। हायरिंग कंपनी माइकल पेज की इंडिया सैलरी गाइड 2026 के मुताबिक, बड़ी कंपनियों में काम करने वाले चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) की सालाना सैलरी 8 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं प्राइवेट इक्विटी फंड के वरिष्ठ अधिकारी भी 6 करोड़ रुपये तक कमा रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि भले ही कुल मिलाकर सैलरी बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो रही हो, लेकिन कंपनियां अब भी खास स्किल वाले प्रोफेशनल्स के लिए मोटी सैलरी देने को तैयार हैं। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर्स में नौकरी बदलने वाले लोगों को 30 प्रतिशत तक ज्यादा सैलरी मिल सकती है।
कॉरपोरेट दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वालों में CFO सबसे आगे हैं। जिन कंपनियों की सालाना आय 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, वहां CFO की कमाई 1.75 करोड़ से 8 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
मिड साइज कंपनियों में भी इनकी कमाई कम नहीं है। 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये की आय वाली कंपनियों में CFO को 1.5 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं। वहीं 1,000 से 5,000 करोड़ रुपये वाली कंपनियों में भी यह सैलरी 1 करोड़ से 3 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
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भारत में प्राइवेट इक्विटी और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग अब भी सबसे ज्यादा कमाई वाले करियर में शामिल हैं। वैश्विक प्राइवेट इक्विटी फंड में एसोसिएट स्तर के अधिकारी 60 लाख से 1.2 करोड़ रुपये तक कमा सकते हैं। वहीं वाइस प्रेसिडेंट की सैलरी 1.3 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
वरिष्ठ स्तर पर कमाई और भी ज्यादा हो जाती है। डायरेक्टर की सैलरी 1.85 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक और मैनेजिंग डायरेक्टर की सैलरी 4 करोड़ से 6 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में भी पैसा कम नहीं है। मल्टीनेशनल बैंकों में कॉरपोरेट फाइनेंस और मर्जर एंड एक्विजिशन (M&A) से जुड़े एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट को 55 लाख से 90 लाख रुपये तक मिलते हैं। वहीं डायरेक्टर को 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये और मैनेजिंग डायरेक्टर को 2.5 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक सैलरी मिल सकती है।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग सेक्टर भी तेजी से बदल रहा है और इसके साथ ही सैलरी भी बढ़ रही है। बड़ी कंपनियों में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) साल में 1 करोड़ से 3 करोड़ रुपये तक कमा सकते हैं। वहीं मैन्युफैक्चरिंग या ऑपरेशंस हेड की सैलरी 80 लाख से 2 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
15 साल से ज्यादा अनुभव वाले प्लांट या साइट हेड आम तौर पर 70 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक कमाते हैं। खासकर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी जैसे नए सेक्टर्स में इंजीनियरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी सैलरी तेजी से बढ़ रही है। बड़े प्रोजेक्ट संभालने वाले वरिष्ठ अधिकारी 1.5 करोड़ से 6 करोड़ रुपये तक कमा सकते हैं। इसके अलावा 15 से 25 साल अनुभव वाले प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग विशेषज्ञ भी 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक सैलरी पा सकते हैं।
हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में भी अब तकनीक का असर दिख रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से दवा खोज, रिसर्च और डायग्नोस्टिक्स के तरीके बदल रहे हैं। फार्मा कंपनियों में 25 साल से ज्यादा अनुभव वाले वरिष्ठ पेशेवर 65 लाख से 1.2 करोड़ रुपये तक कमा सकते हैं। वहीं मेडिकल डिवाइस कंपनियों में शीर्ष अधिकारी 3.5 करोड़ रुपये तक सैलरी पा सकते हैं।
एक समय ऐसा था जब एचआर को सिर्फ सपोर्ट फंक्शन माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। बड़ी कंपनियों में एचआर प्रमुख की सैलरी 1.5 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वहीं 15 साल से ज्यादा अनुभव वाले कंपनसेशन और बेनिफिट्स प्रमुख को 1 करोड़ से 1.8 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा संकेत यह है कि अब केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि खास स्किल ज्यादा मायने रखने लगे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सेक्टर्स में विशेषज्ञता रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे स्किल रखने वाले लोग नौकरी बदलने पर 30 से 40 प्रतिशत तक ज्यादा सैलरी पा सकते हैं। यानी आने वाले समय में नौकरी की दुनिया में सबसे बड़ा फर्क स्किल ही तय करेगा।