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संपत्ति और परिवार का भविष्य सुरक्षित करना है? जानें भारत में ट्रस्ट बनाने की पूरी प्रक्रिया

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अपनी संपत्ति सुरक्षित रखने और अगली पीढ़ी को सही हक देने के लिए ट्रस्ट एक बेहतरीन विकल्प है। कम खर्च और आसान कानूनी प्रक्रिया से इसे समझें

Last Updated- March 21, 2026 | 4:44 PM IST
Trust
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ट्रस्ट बनाना परिवार की संपत्ति को सुरक्षित रखने और अगली पीढ़ी तक सही तरीके से पहुंचाने का एक लोकप्रिय तरीका बन चुका है। भले ही ट्रस्ट शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत न पड़े, लेकिन इसकी शुरुआत सही ढंग से करना बेहद जरूरी है। अगर शुरुआत में ही कोई कमी रह गई तो आगे चलकर कानूनी पचड़े और टैक्स की मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। एस्टेट प्लानिंग या फैमिली वेल्थ प्रोटेक्शन के लिए ट्रस्ट काफी लचीला विकल्प है, लेकिन इसके लिए शुरू से ही साफ इरादा, सटीक बनावट और सही अमल जरूरी होता है।

ट्रस्ट कैसे बनता है

ट्रस्ट तब तैयार होता है जब कोई व्यक्ति, जिसे सेटलर कहते हैं, अपनी कुछ संपत्ति ट्रस्टियों को सौंप देता है। ट्रस्टी उस संपत्ति का इस्तेमाल तयशुदा लाभार्थियों के फायदे के लिए करते हैं। यह सब एक ट्रस्ट डीड नाम के दस्तावेज के जरिए होता है।

पूरी प्रक्रिया कुछ इस तरह चलती है:

  • सबसे पहले उद्देश्य तय करें। ट्रस्ट परिवार की दौलत को बचाने, नाबालिग बच्चों की देखभाल या किसी खास मकसद के लिए बनाया जा सकता है। इरादा जितना स्पष्ट होगा, उतना अच्छा।
  • फिर ट्रस्टी और लाभार्थी चुनें। ट्रस्टी ऐसे लोग होने चाहिए जिन पर पूरा यकीन हो। आमतौर पर दो या उससे ज्यादा भरोसेमंद लोगों को चुना जाता है।
  • ट्रस्ट डीड तैयार करें। इसमें ट्रस्टी के अधिकार, जिम्मेदारियां और संपत्ति बांटने के नियम साफ-साफ लिखे जाने चाहिए। डीड की भाषा सरल और बिना किसी अस्पष्टता के होनी चाहिए।
  • ट्रस्ट की डीड को स्टैंप पेपर पर तैयार करके साइन करें और अगर इसमें कोई जमीन या मकान जैसी अचल संपत्ति शामिल है, तो इसे स्थानीय सब-रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर कराना जरूरी है, जिसके लिए दो स्वतंत्र गवाहों का होना अनिवार्य होता है।
  • ट्रस्ट शुरू होने के बाद उसका PAN कार्ड बनवाएं, बैंक अकाउंट खोलें और बाकी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करें।

Also Read: CBDT ने नए इनकम टैक्स नियम नोटिफाई किए, 1 अप्रैल 2026 से होंगे लागू

ट्रस्ट के लिए जरूरी कागजात

ट्रस्ट डीड सबसे अहम दस्तावेज है, जिसमें ट्रस्ट की सारी शर्तें लिखी जाती हैं। इसके अलावा ये चीजें चाहिए:

  • सेटलर, ट्रस्टी और गवाहों के पहचान पत्र और पता प्रमाण
  • ट्रस्ट के रजिस्टर्ड ऑफिस का सबूत, जैसे मालिकाना हक के कागज या किराया एग्रीमेंट
  • किराए की जगह के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
  • फोटोग्राफ्स और बेसिक KYC जानकारी

रजिस्ट्रेशन कहां होता है और कितना खर्च

ट्रस्ट बनाने के लिए कोई मोटी रकम जरूरी नहीं है और ज्यादातर मामलों में इसकी शुरुआत बस एक छोटी राशि से हो जाती है, लेकिन अगर ट्रस्ट में जमीन या मकान जैसी अचल संपत्ति शामिल है तो रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में इसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है, जिसकी स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस हर राज्य में अलग-अलग होती है और कानूनी मदद लेने का खर्च आपके ट्रस्ट के काम के आधार पर निर्भर करता है।

कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखें

  • ट्रस्ट की असली ताकत उसकी स्पष्टता और सही अमल में होती है।
  • उद्देश्य, लाभार्थी या संपत्ति में कोई धुंधलापन नहीं होना चाहिए, वरना ट्रस्ट पर कानूनी चुनौती आ सकती है।
  • ट्रस्टी का चयन सोच-समझकर करें, क्योंकि वे फिड्यूशियरी जिम्मेदारी निभाते हैं।
  • संपत्ति का मालिकाना हक पूरी तरह ट्रस्ट को ट्रांसफर होना चाहिए।
  • एक बार ट्रांसफर हो गया तो सेटलर उस पर सीधा नियंत्रण नहीं रख सकता।
  • टैक्स के नियम खासकर गैर-रिश्तेदारों या विदेश से जुड़े मामलों में सावधानी बरतनी पड़ती है।
  • डीड में भविष्य के बदलाव, उत्तराधिकार जैसी बातों का जिक्र होना चाहिए।
  • साफ ड्राफ्टिंग, सही रजिस्ट्रेशन और व्यावहारिक संरचना से बाद में विवाद की गुंजाइश कम हो जाती है।

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First Published - March 21, 2026 | 4:44 PM IST

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