H-1B Visa: अमेरिका में रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव के लिए नया बिल पेश किया है। इस प्रस्ताव का नाम “End H-1B Visa Abuse Act of 2026” है। अगर यह कानून बनता है तो इससे विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीयों के लिए अमेरिका में काम करना काफी मुश्किल हो सकता है।
H-1B एक वर्क वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को नौकरी देती हैं। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस और मेडिकल जैसे क्षेत्रों में होता है। इस वीजा पर काम करने वाले लोगों में बड़ी संख्या भारतीयों की है, खासकर आईटी सेक्टर में।
यह वीजा न केवल अमेरिका में काम करने का मौका देता है बल्कि आगे चलकर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता भी खोल सकता है।
नए बिल में कई सख्त बदलाव सुझाए गए हैं
सबसे बड़ा प्रस्ताव है कि H-1B वीजा पर तीन साल तक रोक लगा दी जाए। यानी इस दौरान नए वीजा जारी नहीं होंगे।
हर साल जारी होने वाले वीजा की संख्या भी कम करने का प्रस्ताव है। अभी यह सीमा 65 हजार है, जिसे घटाकर 25 हजार करने की बात कही गई है।
बिल के अनुसार H-1B कर्मचारियों को कम से कम 2 लाख डॉलर सालाना वेतन देना होगा। इससे सिर्फ बहुत ही उच्च स्तर की नौकरियों में ही विदेशी लोगों की भर्ती हो सकेगी।
एक और बड़ा बदलाव यह है कि H-1B वीजा धारकों को अपने परिवार को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं होगी।
फिलहाल वीजा के लिए लॉटरी सिस्टम चलता है, लेकिन नए प्रस्ताव में इसे खत्म कर वेतन आधारित चयन प्रणाली लाने की बात कही गई है। ज्यादा सैलरी वाली नौकरी को प्राथमिकता मिलेगी।
कंपनियों के लिए भी नियम कड़े किए गए हैं। उन्हें साबित करना होगा कि उस पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी उपलब्ध नहीं है और हाल ही में उन्होंने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी नहीं की है।
इसके अलावा, स्टाफिंग कंपनियों को H-1B वीजा के इस्तेमाल से रोका जाएगा और वीजा धारक एक से ज्यादा नौकरी नहीं कर पाएंगे।
बिल में यह भी कहा गया है कि OPT प्रोग्राम को खत्म किया जाए और H-1B वीजा से ग्रीन कार्ड में बदलाव की प्रक्रिया को रोका जाए। साथ ही वीजा स्टेटस बदलने से पहले व्यक्ति को अमेरिका छोड़ना होगा।
अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर एक नया बिल पेश किया गया है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह बिल Eli Crane ने पेश किया है और कई रिपब्लिकन सांसदों ने इसका समर्थन किया है।
बिल के समर्थकों का कहना है कि H-1B वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल हो रहा है। उनका आरोप है कि कंपनियां सस्ते विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देकर अमेरिकी नागरिकों के अवसर कम कर रही हैं। इसी को देखते हुए इस बिल में कई सख्त बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक H-1B वीजा की सालाना सीमा 65,000 से घटाकर 25,000 करने की बात कही गई है। साथ ही न्यूनतम वेतन 2 लाख डॉलर सालाना तय करने और वीजा धारकों को अपने परिवार को अमेरिका लाने से रोकने का सुझाव दिया गया है।
बिल पेश करते हुए Eli Crane ने कहा कि सरकार को बड़े कॉरपोरेट्स के मुनाफे के बजाय मेहनतकश अमेरिकी नागरिकों के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बिल अमेरिकियों के लिए रोजगार के मौके बढ़ाएगा और वीजा प्रक्रिया को मजबूत बनाएगा।
Brandon Gill ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था सबसे पहले वहां के नागरिकों के हित में होनी चाहिए, न कि विदेशियों के लिए।
Paul Gosar ने आरोप लगाया कि H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर सस्ते विदेशी श्रमिकों को लाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बिल ऐसे सिस्टम पर रोक लगाने का काम करेगा।
Andy Ogles ने कहा कि सस्ते विदेशी श्रमिकों की वजह से अमेरिकी कामगारों को नौकरी से हटाया जा रहा है। उन्होंने इसे रोकने की जरूरत बताई।
वहीं, Rosemary Jenks ने कहा कि यह अब तक का सबसे सख्त H-1B बिल है। उनके अनुसार, इस वीजा को पहले अस्थायी जरूरतों को पूरा करने के लिए लाया गया था, लेकिन अब इसका उद्देश्य बदल गया है।
इस बिल को Brian Babin, Wesley Hunt, Keith Self और Tom McClintock सहित अन्य सांसदों का भी समर्थन मिला है।
अमेरिका में प्रस्तावित एक नए बिल को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बिल में H-1B वीजा से जुड़े नियमों को कड़ा करने और कुछ अहम बदलाव करने की बात कही गई है, जिसका कई वर्गों ने विरोध शुरू कर दिया है।
सबसे ज्यादा चिंता अमेरिकी टेक कंपनियों को है। ये कंपनियां सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, एआई, डेटा साइंस और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में H-1B कर्मचारियों पर निर्भर रहती हैं। अगर वीजा की संख्या सीमित की जाती है और न्यूनतम वेतन को 2 लाख डॉलर तक बढ़ाया जाता है, तो कंपनियों के लिए भर्ती महंगी हो सकती है और योग्य लोगों की कमी भी बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, यूनिवर्सिटीज और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भी इस प्रस्ताव से नुकसान हो सकता है। खासकर OPT प्रोग्राम खत्म होने की संभावना से छात्र चिंतित हैं। यह प्रोग्राम उन्हें पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम का अनुभव लेने और आगे H-1B वीजा हासिल करने का मौका देता है।
इमिग्रेशन से जुड़े विशेषज्ञ और समर्थक भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे काम करने की आजादी सीमित होगी, वर्कफोर्स में विविधता कम होगी और लंबे समय के लिए अमेरिका में बसने का रास्ता मुश्किल हो जाएगा।
इस प्रस्ताव का सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। वीजा की संख्या घटने से अमेरिका में नौकरी के मौके कम हो सकते हैं। साथ ही, 2 लाख डॉलर की सैलरी शर्त के कारण केवल ऊंचे पदों पर काम करने वाले लोगों को ही अवसर मिल पाएगा। परिवार को साथ ले जाने में आने वाली दिक्कतें और ग्रीन कार्ड पाने के रास्ते में बढ़ती बाधाएं भी लोगों को अमेरिका जाने से रोक सकती हैं।
अभी यह प्रस्ताव कानून नहीं बना है, बल्कि केवल एक बिल के रूप में पेश किया गया है। किसी भी बिल को कानून बनने के लिए कई चरणों से गुजरना होता है।
सबसे पहले इसे अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से मंजूरी लेनी होती है। इसके बाद यह बिल अमेरिका के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। अगर राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तभी यह बिल आधिकारिक रूप से कानून बनता है।
यानी फिलहाल यह प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला अभी बाकी है।