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अमेरिका-ईरान में शांति समझौते की आहट से 100 के नीचे आया क्रूड, शेयर बाजार में भी दिखी तेजी

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अमेरिका-ईरान शांति समझौते के संकेत से कच्चे तेल की कीमतें गिरने से शेयर बाजार में भारी उछाल आया और रुपया दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ

Last Updated- May 25, 2026 | 10:57 PM IST
Stock Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका-ईरान युद्ध के स्थायी समाधान के संकेत से कच्चे तेल की कीमतों में आज खासी गिरावट आई और शेयर बाजार तथा रुपये में भी मजबूती देखी गई। डॉलर के मुकाबले रुपया 2 हफ्ते के उच्चतम स्तर 95.23 पर बंद हुआ। शुक्रवार को रुपया 95.69 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.7 फीसदी घटकर 94.6 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई जो 21 अप्रैल के बाद सबसे कम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते के लिए एक समझौता ज्ञापन पर काफी हद तक बातचीत कर ली है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाएगा। शांति समझौते की खबर से ब्रेंट क्रूड दो सप्ताह से अधिक समय में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आया।

सेंसेक्स 1,074 अंक या 1.4 फीसदी की बढ़त के साथ 76,489 पर बंद हुआ। निफ्टी 312 अंक या 1.3 फीसदी चढ़कर 24,032 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों में 15 अप्रैल के बाद एब दिन की सबसे बड़ी बढ़त देखी गई। 

बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 5.86 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 468.7 लाख करोड़ रुपये रहा।

डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार तीसरे दिन मजबूती आई और यह 20 मई के सर्वकालिक निचले स्तर 96.83 प्रति डॉलर से 1.68 फीसदी चढ़ा है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘रुपया लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और यह एशिया में दूसरी सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई।’ उन्होंने कहा, ‘अमेरिका-ईरान वार्ता में नई सफलता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर की ओर से रुपये के संभावित अवमूल्यन का संकेत देने वाले बयान से रुपये को लाभ मिला। 

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने संकेत दिया कि रुपये का मूल्य नॉमिनल और वास्तविक प्रभावी ब्याज दर (आरईईआर) दोनों ही दृष्टिकोण से कम आंका गया है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए जो भी आवश्यक होगा वह करेगा। 

नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि रुपये की छह मुद्राओं की बास्केट में व्यापार-भारित वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) अप्रैल के अंत में घटकर 88.06 हो गई जो मार्च के अंत में 89.23 थी।

तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों के जोखिम लेने की प्रवृत्ति को बढ़ाया और भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को राहत प्रदान की। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने मुद्रास्फीति, राजकोषीय दबाव और कंपनियों के मार्जिन को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।

शेयर मार्केट बाय फोनपे के बाजार विश्लेषक मयंक जैन ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने बैंकिंग, वाहन और बड़े शेयरों में आक्रामक शॉर्ट-कवरिंग और भारी खरीदारी के लिए प्रेरित किया, जिससे हाल में घरेलू ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर चिंता प्रभावी रूप से बेअसर हो गई।’

रुपया डॉलर के मुकाबले 0.5 फीसदी मजबूत होकर 95.23 पर बंद हुआ। सोमवार की मजबूती के बावजूद इस साल डॉलर के मुकाबले रुपये में 5.6 फीसदी की गिरावट आई है।

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख शेषाद्री सेन के अनुसार बाजार आय और मूल्यांकन को प​श्चिम ए​शिया युद्ध के बाद ​स्थिति सामान्य होने को ध्यान में रखते हुए मूल्य निर्धारण कर रहे हैं। हालांकि होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक व्यवधान से कंपनियों की आय और शेयरों के मूल्यांकन पर दबाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि शेयरों के दाम में नरमी आई है लेकिन अभी भी वे महंगे बने हुए हैं। निफ्टी वित्त वर्ष 2027 की आय अनुमान के आधार पर अपने दीर्घकालिक औसत के अनुरूप कारोबार कर रहा है।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर एक सूचकांक को छोड़कर सभी बढ़त में रहे। निफ्टी बैंक सूचकांक में 2.3 फीसदी की तेजी आई। सेंसेक्स की बढ़त में सबसे ज्यादा योगदान एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक का रहा।

मई में चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के बाद तेल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भी तेजी आई। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के शेयरों में 3 से 4 फीसदी के बीच बढ़त दर्ज की गई।

भू-राजनीतिक और वैश्विक व्यापक आर्थिक जोखिमों के बीच बाजार के प्रतिभागी मौजूदा तेजी की स्थिरता को लेकर सतर्क दिखे।

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के सेन ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि को भारत के शेयर बाजार के लिए संभावित बाधा के रूप में रेखांकित किया और चेताया कि अमेरिका और भारत में यील्ड के बीच अंतर कम होने से विदेशी निवेश को नुकसान हो सकता है, रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और मूल्यांकन मल्टीपल में कमी आ सकती है। 

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First Published - May 25, 2026 | 10:14 PM IST

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