पीजीआईएम इंडिया म्युचुअल फंड के अनुसार शेयर बाजार में उन कंपनियों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है, जिनकी बिक्री में वृद्धि और इक्विटी पर रिटर्न (आरओई) औसत से बेहतर है। इस वित्त वर्ष में अब तक ‘हाई क्वॉलिटी और हाई ग्रोथ’ वाले ऐसे शेयर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेगमेंट के तौर पर उभरे हैं।
फंड ‘हाई क्वॉलिटी और हाई ग्रोथ’ वाले शेयरों को ऐसी कंपनियों के तौर पर वर्गीकृत करता है, जिनकी तीन साल की बिक्री में वृद्धि और तीन साल का इक्विटी पर रिटर्न औसत से ज्यादा रहा है। परिसंपत्ति प्रबंधक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन शेयरों ने वित्त वर्ष 27 में अब तक 27 फीसदी का रिटर्न दिया है, जो ‘हाई ग्रोथ या हाई क्वॉलिटी’ वाली कंपनियों (18 फीसदी) और ‘लो-ग्रोथ और लो-क्वॉलिटी’ वाली कंपनियों (21 फीसदी) से बेहतर है।
फंड हाउस का कहना है कि अभी जो बेहतर प्रदर्शन दिख रहा है, वह पिछले कुछ सालों के उन रुझान के उलट है जिनमें कम ग्रोथ और कम क्वॉलिटी वाले शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। उसके मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) विनय पहाड़िया के मुताबिक यह बदलाव 2024 के आम चुनावों से जुड़ी अस्थिरता के बाद शुरू हुआ और मौजूदा वित्त वर्ष में इसने तेजी पकड़ी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रुझान भी क्वॉलिटी-ग्रोथ वाली कंपनियों के लंबे समय से बेहतर प्रदर्शन के अनुरूप है। इसमें यह भी बताया गया है कि इस सेगमेंट ने पिछले पांच वर्षों में 33 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि की दर (सीएजीआर) हासिल की है, जबकि 500 अग्रणी कंपनियों के के मामले में यह दर 18 फीसदी रही है।
पहाड़िया ने क्वॉलिटी-ग्रोथ शेयरों के प्रति बढ़ती पसंद का कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निवेश में संभावित सुधार और घरेलू कमाई के चक्र में स्थिरता को बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी और वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेशों के नए सिरे से मूल्यांकन से भारत विदेशी निवेशकों के लिए और आकर्षक बन सकता है।
उन्होंने कहा, मौजूदा आर्थिक माहौल स्थिर है, लेकिन इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है और यह अच्छी क्वॉलिटी और तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए अनुकूल है।