Gopal Snacks Share: गोपाल स्नैक्स के लिए पिछले कुछ साल किसी मुश्किल परीक्षा से कम नहीं रहे। पहले प्रमोटर परिवार के बंटवारे से डिस्ट्रीब्यूटर और कर्मचारी छूटे। फिर राजकोट प्लांट में आग लग गई और दुकानों तक माल पहुंचना मुश्किल हो गया। बिक्री और कमाई दोनों पर असर पड़ा। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं।
Antique Stock Broking का मानना है कि कंपनी मुश्किल दौर से बाहर निकल रही है। ब्रोकरेज ने शेयर पर ‘खरीदें’ की राय देते हुए ₹425 का टारगेट दिया है। रिपोर्ट के समय शेयर ₹259 पर था। यानी करीब 64 फीसदी बढ़त की संभावना जताई गई है।
कंपनी के शेयर बाजार में आने के बाद प्रमोटर परिवार में बंटवारा हुआ। इसका असर सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहा। कई डिस्ट्रीब्यूटर और कर्मचारी भी कंपनी से अलग हो गए। इससे गोपाल स्नैक्स की बाजार में पकड़ कमजोर हुई।
हालात इतने खराब हुए कि जब नमकीन उद्योग करीब 15 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा था, तब कंपनी के पारंपरिक स्नैक्स कारोबार में 9 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि कंपनी ने जल्दी नुकसान की भरपाई शुरू की। डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क दोबारा खड़ा किया गया और मार्केटिंग बढ़ाई गई। वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही तक करीब 80 फीसदी पुराने डिस्ट्रीब्यूटर वापस जुड़ चुके थे।
दिसंबर 2024 में राजकोट प्लांट में लगी आग कंपनी के लिए दूसरा बड़ा संकट बनी। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की करीब 65 फीसदी बिक्री से जुड़ी सप्लाई लगभग 110 दिनों तक प्रभावित रही। हर दिन करीब ₹1 करोड़ का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है।
कंपनी ने मोडासा और नागपुर प्लांट से उत्पादन बढ़ाया। बाहर की इकाइयों का भी सहारा लिया गया। दो हफ्ते में करीब आधी सप्लाई बहाल हो गई, लेकिन पूरी व्यवस्था संभालने में कई महीने लगे।
अलग-अलग प्लांट से माल भेजने के कारण दुकानों पर समय से सामान नहीं पहुंच रहा था। स्टॉक खत्म होने से डिस्ट्रीब्यूटर करीब 8 से 10 फीसदी कारोबारी मौके गंवा रहे थे।
अब राजकोट प्लांट फिर से चालू हो चुका है। गोंडल में बनाई गई अस्थायी इकाई का इस्तेमाल बंद किया जा रहा है। इससे सप्लाई आसान होगी और माल ढुलाई का खर्च भी घटेगा।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि बेहतर सप्लाई व्यवस्था और लंबी अवधि के माल ढुलाई समझौतों से मार्जिन में 50 से 60 आधार अंक का फायदा मिल सकता है। राजकोट में बेसन बनाने और बायो-कोल के इस्तेमाल से 20 से 30 आधार अंक का अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है।
गुजरात कंपनी का सबसे मजबूत बाजार है और यहां से उसकी करीब 65 फीसदी बिक्री आती है। कंपनी के पास राज्य में 313 डिस्ट्रीब्यूटर और लगभग 2.25 लाख दुकानों का नेटवर्क है। अब कंपनी ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर जोड़ने के बजाय मौजूदा दुकानों पर बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रही है। करीब 70,000 दुकानों पर हफ्ते में दो बार सामान पहुंचाया जा रहा है। कंपनी इसे ज्यादा से ज्यादा दुकानों तक ले जाना चाहती है। इससे हर दुकान की बिक्री 30 से 40 फीसदी बढ़ सकती है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि गुजरात सहित कंपनी के मुख्य बाजारों की बिक्री वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच सालाना 16 फीसदी बढ़ सकती है।
गोपाल स्नैक्स अब महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में तेजी से पैर पसार रही है। वित्त वर्ष 2026 में इन बाजारों से करीब 25 फीसदी बिक्री आई थी। कंपनी काशीपुर, हिरियूर और मनेंद्रगढ़ में थर्ड पार्टी यूनिट्स से उत्पादन करा रही है। इससे दूर के बाजारों तक कम खर्च और कम समय में माल पहुंचाया जा सकता है। कंपनी 2026 के दौरान 250 से 300 नए डिस्ट्रीब्यूटर जोड़ने की तैयारी में है। Antique का अनुमान है कि इन नए बाजारों की बिक्री वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच सालाना करीब 32 फीसदी बढ़ सकती है।
गोपाल स्नैक्स की पहचान गाठिया और नमकीन से है, लेकिन आगे की कमाई में वेफर्स अहम भूमिका निभा सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार वेफर्स का मार्जिन पारंपरिक नमकीन से करीब 4 फीसदी ज्यादा है। कंपनी वेफर्स की बिक्री बढ़ाने के लिए दुकानदारों को ज्यादा प्रोत्साहन दे रही है। डिस्ट्रीब्यूटर और बिक्री टीम के लक्ष्य भी वेफर्स से जोड़े गए हैं। साथ ही Cristos को प्रीमियम ब्रांड बनाने की कोशिश हो रही है।
कंपनी ने अब किराना दुकानों से बाहर भी बिक्री बढ़ानी शुरू कर दी है। Blinkit, Zepto, BigBasket और DMart Daily जैसे प्लेटफॉर्म पर कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में ई-कॉमर्स बिक्री करीब 3.5 गुना बढ़ी। DMart में बिक्री भी लगभग दोगुनी हो गई। रेलवे और ई-कॉमर्स की वैकल्पिक बिक्री में 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। रेलवे कारोबार के ₹20 करोड़ से ज्यादा पहुंचने की संभावना है।
कंपनी के प्लांटों की क्षमता का अभी सिर्फ करीब 35 फीसदी इस्तेमाल हो रहा है। इसका मतलब है कि उत्पादन बढ़ाने के लिए तुरंत कोई बड़ा नया प्लांट लगाने की जरूरत नहीं है। मैनेजमेंट का मानना है कि मौजूदा क्षमता से ही कंपनी का राजस्व दोगुना हो सकता है। बिक्री बढ़ने पर स्थायी खर्च ज्यादा उत्पादों पर बंटेगा और मुनाफे का मार्जिन सुधरेगा।
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का EBITDA मार्जिन 6.7 फीसदी था। Antique को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2029 तक यह बढ़कर 11.9 फीसदी हो सकता है। इसी अवधि में कंपनी की आय सालाना 21 फीसदी, EBITDA 46 फीसदी और समायोजित मुनाफा 65 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है। राजस्व ₹1,508 करोड़ से बढ़कर करीब ₹2,650 करोड़ और समायोजित मुनाफा ₹45 करोड़ से बढ़कर करीब ₹201 करोड़ हो सकता है।
वापसी की कहानी मजबूत है, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी हैं। कंपनी की गुजरात पर निर्भरता काफी ज्यादा है। Haldiram, Balaji, PepsiCo और Bikaji जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला भी आसान नहीं है। पाम तेल, आलू और चने की कीमत बढ़ी तो मार्जिन पर दबाव आ सकता है। कंपनी के ₹5 वाले पैक ज्यादा बिकते हैं, इसलिए हर बार कीमत बढ़ाना आसान नहीं होता।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)