क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के मशविरा पत्र पर कारोबारियों की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई हैं। ज्यादातर कारोबारियों का मानना है कि नियामक ने इस ढांचे से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें समझी हैं, भले ही कुछ खास प्रस्तावों पर उनकी राय अलग-अलग हैं।
शनिवार को जारी इस पत्र पर 3 अक्टूबर तक राय मांगी गई है। नियामक ने डेरिवेटिव निपटान के लिए दो विकल्प दिए हैं। पहला ब्लेंडेड वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी) ढांचा है जिसमें लगातार कारोबार के आखिरी 30 मिनट और सीएएस कारोबार को मिलाना या फिर किसी भी बदलाव से पहले कम से कम एक वर्ष तक मौजूदा 30 मिनट के सीटीएस-ओनली वीडब्ल्यूएपी जारी रखना है।
कारोबार के समय पर सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि या तो लगातार कारोबार सीएएस के साथ 3:30 बजे तक और डेरिवेटिव कारोबार 3:45 बजे तक बढ़ाया जाए या फिर लगातार कारोबार 3:15 बजे खत्म करने वाला पूर्व का समय ही रहने दिया जाए।
अन्य प्रस्तावों में सीएएस खाते के अंदर पूरे नहीं हुए आइसबर्ग ऑर्डर की मात्रा पूरी तरह से दिखने वाली नॉर्मल लिमिट ऑर्डर में बदलना शामिल है। साथ ही, इसमें नीलामी व्यवस्था के दौरान सांकेतिक सूचकांक मूल्य (आईआईवी) का प्रसार रोकना शामिल है जबकि प्रतिभूति स्तर- सांकेतिक संतुलित कीमत रहेंगी। आइसबर्ग ऑर्डर एक ऐसा कारोबारी ऑर्डर है जिसमें किसी बहुत बड़े शेयर या जिंस खरीदने या बेचने के ऑर्डर कई छोटे-छोटे हिस्सों (जिन्हें लेग या स्लाइस कहा जाता है) में विभाजित किए जाते हैं।
एक विश्लेषक ने कहा कि ये बदलाव खास ढांचागत चिंता दूर करते हैं।
उन्होंने कहा,‘आइसबर्ग कन्वर्जन और आईआईवी हटाने का मकसद ‘थिन बुक’ और सांकेतिक मूल्य की समस्याएं हल करना है। नकदी खंड का समय 3:30 बजे तक बढ़ाना और ब्लेंडेड वीडब्ल्यूएपी में बदलाव कारोबार की मात्रा बढ़ाने वाला संयोजन है जिससे एक्सचेंज को मदद मिलती है। 3:15 बजे से सीएएस जारी रखने का दूसरा विकल्प मौजूदा स्थिति (अंतर) बनाए रखता है। एक साल तक सीटीएस वीडब्ल्यूएपी का इस्तेमाल करने का विकल्प असल में उसी 30-मिनट वीडब्ल्यूएपी पर वापस ले जाता है जिसे हटाने के लिए सीएएस लाया गया था। कुल मिलाकर ये प्रस्ताव एक्सचेंज के विकल्प कारोबार के लिए सकारात्मक हैं।’
कुछ ब्रोकरेज कंपनियों और नियामकीय विशेषज्ञों ने तुरंत ब्लेंडेड वीडब्ल्यूएपी पर जाने के बजाय निपटान के लिए आखिरी 30 मिनट का सीटीएस वीडब्ल्यूएपी बनाए रखने का सुझाव दिया है। साथ ही, उन्होंने 3:15 के पुराने कट-ऑफ समय के बजाय 3:30 बजे तक लगातार कारोबार और उसके बाद 3:45 तक तक सीएएस और डेरिवेटिव कारोबार जारी रखने का भी समर्थन किया है।
उन्होंने आखिरी 30 मिनट के सीटीएस वीडब्ल्यूएपी को एक अंतरिम निपटान तरीका बनाए रखने का समर्थन किया क्योंकि यह जाना-पहचाना, पारदर्शी और कामकाज के नजरिये से अच्छी तरह समझा हुआ तरीका है।
उन्होंने कहा कि ऐसा करने से सीएएस को अपनी खूबियों के आधार पर विकसित होने का मौका मिलेगा बजाय इसके कि डेरिवेटिव निपटान को ऐसी नीलामी ढांचे पर निर्भर किया जाए जिसमें तरलता और कारोबारियों का व्यवहार अभी भी विकसित हो रहा है।
बीसीबी ब्रोकरेज के प्रबंध निदेशक उत्तम बागड़ी ने इस सलाह-मशविरा वाले तरीके का स्वागत किया। बागड़ी ने कहा,‘सीएएस पर सेबी का विमर्श पत्र व्यावहारिक चुनौतियों को मानता है और लागत और फायदों के बीच एक संतुलित तरीका अपनाना चाहता है। अहम बात यह है कि यह सही विकल्प देकर अद्यतन ढांचे को अंतिम रूप देने से पहले बाजार की व्यापक प्रतिक्रिया जानना खुले विचारों का भी परिचय देता है।’
सेबी ने 3 प्रतिशत सीएएस मूल्य दायरा बनाए रखने का भी प्रस्ताव दिया है जिसमें संदर्भ मूल्य के 1 प्रतिशत के भीतर रद्द करने की अनुमति होगी और उससे आगे केवल मूल्य सुधार बदलावों की अनुमति होगी।
एक्सचेंज सीएएस के दौरान सांकेतिक मूल्य दिखाना बंद कर देगा जबकि प्रतिभूति-स्तर सांकेतिक संतुलन मूल्य प्रकाशित करना जारी रखेगा।
सेबी ने लगातार कारोबार और सीएएस के बीच परिवर्तन समय (ट्रांजिशन पीरियड) पांच मिनट से घटाकर एक मिनट तक करने और सीएएस के बाद डेरिवेटिव कारोबार समय 10 मिनट से घटाकर पांच मिनट करने का भी प्रस्ताव दिया है।