रूस और चीन समेत BRICS देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। नई दिल्ली में हुई BRICS बैठक के दौरान सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने पर सहमति जताई। देशों ने साफ कहा कि आतंकियों को किसी भी तरह की मदद, फंडिंग या सुरक्षित ठिकाना देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। BRICS की नई दिल्ली घोषणा में इस हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई। सदस्य देशों ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही, किसी भी वजह से आतंकवाद को सही ठहराने की कोशिश का भी विरोध किया गया।
BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ आतंकी संगठनों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने की बात कही। घोषणा में आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कदम उठाने पर जोर दिया गया।
सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवाद की भी निंदा की और आतंकियों तथा आतंकी संगठनों की जवाबदेही तय करने के लिए सामूहिक कार्रवाई की जरूरत बताई। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित व्यापक संधि को जल्द अपनाने की मांग भी की गई।
नई दिल्ली घोषणा में BRICS के मूल सिद्धांतों पर भी जोर दिया गया। इनमें एक-दूसरे का सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और आपसी सहमति से फैसले लेना शामिल है।
BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार पर लगाए जाने वाले ऐसे प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करते हैं। घोषणा में कहा गया कि व्यापार से जुड़े ऐसे कदम विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
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इसके अलावा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और दुनिया में बढ़ते तनाव पर भी चिंता जताई गई। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग रुख के बावजूद संयुक्त घोषणा पर सहमति बनी। खास तौर पर ईरान और UAE के बीच मतभेदों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी दी गई। भारत ने इन मतभेदों के बीच बातचीत और आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान हुए BRICS प्लस और पहुंच संवाद की भी घोषणा में सराहना की गई।
BRICS समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने फैसलों को लागू करने के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने की जरूरत भी बताई।
मोदी ने ग्लोबल साउथ की भूमिका को लेकर कहा कि विकासशील देशों को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने में बराबर की भूमिका निभाने वाला होना चाहिए। उन्होंने AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के नियम तय करने में विकासशील देशों की भागीदारी पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून से जुड़ी ट्रेनिंग देने का सुझाव भी रखा। इसके अलावा संकट में फंसे नाविकों की मदद के लिए BRICS देशों के बीच एक इमरजेंसी नेटवर्क बनाने की बात कही गई। इस नेटवर्क के जरिए नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकासी जैसी मदद मिल सकेगी।
मोदी ने कहा कि अगर दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। गलवान झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। BRICS समिट में हिस्सा लेने के बाद जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होनी है।
अगले साल BRICS की अध्यक्षता चीन करेगा। जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं है। उन्होंने BRICS देशों से इतिहास के सही पक्ष के साथ मजबूती से खड़े होने की अपील की।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों को किसी भी हमले या धमकी से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उन्होंने BRICS देशों से एकतरफा प्रतिबंधों का मिलकर सामना करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। पजशकियान ने कहा कि BRICS को दुनिया में न्याय की आवाज बनना चाहिए।
उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे को भी अहम बताया। पजशकियान के मुताबिक, फिलिस्तीनी लोगों को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने इसे वैश्विक व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा बताया और BRICS से इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।