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अच्छे शेयरों के चयन वाला बाजार

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:10 PM IST

सवाल जवाब
बाजार की नजर इस सप्ताह होने वाली आरबीआई की मौद्रिक बैठक के परिणाम और उसके बाद प्रतिक्रियाओं पर लगी रहेगी। फिस्डम प्राइवेट वेल्थ के मुख्य कार्या​धिकारी अ​भिजित भावे ने पुनीत वाधवा के साथ एक साक्षात्कार में बताया कि मिडकैप-स्मॉलकैप शेयर पिछले 6 महीनों में अपने ऊंचे स्तरों से 20-25 प्रतिशत की गिरावट आने के बाद अब आकर्षक हो गए हैं। बातचीत के मुख्य अंश:
शेष कैलेंडर वर्ष के लिए बाजार पर आपका क्या नजरिया है? क्या अक्टूबर 2021 जैसी रिकवरी संभव है?
अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ताजा रिपोर्ट से संकेत मिला है कि महामारी के बाद रिकवरी यानी बाजार में सुधार की रफ्तार अनुमान से ज्यादा वै​श्विक मुद्रास्फीति, केंद्रीय बैंकों द्वारा बैलेंस शीट से संबं​धित सख्ती, चीन में मंदी के हालात और यूक्रेन में युद्ध से नकारात्मक परिणाम की वजह से प्रभावित हुई। मौजूदा परिवेश में, निवेशकों का ध्यान कंपनी की राजस्व वृद्धि से मुनाफे और उसे बरकरार रखने पर केंद्रित हुआ है। हमें अपनी निवेश पसंद को सिर्फ सूचकांक स्तर पर आधार नहीं बनाना चाहिए। मेरा मानना है कि यह ‘स्टॉक-पिकर्स’ यानी अच्छे शेयरों के चयन पर ध्यान देने वाला बाजार है। कई आ​र्थिक कारकों के संदर्भ में, भारत अपने
वै​श्विक प्रतिस्प​र्धियों के मुकाबले अच्छी ​स्थिति में दिख रहा है। हालांकि अल्पाव​धि बाजार की भविष्यवाणी करना कठिन है। लेकिन हमारा मानना है कि अक्टूबर 2021 जैसे ऊंचे स्तर यदि इस कैलेंडर वर्ष में हासिल नहीं किए गए तो कम से कम इस वित्त वर्ष के अंत तक अवश्य दर्ज किए जा सकते हैं।

क्या आप मानते हैं कि यदि अमेरिका और अन्य प्रमुख वै​श्विक अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में आईं तो क्या यह बाजारों के लिए मुद्रास्फीति के मुकाबले ज्यादा बड़ी चिंता साबित होगी?
मुद्रास्फीति पर काबू पाना मौजूदा हालात में बेहद जरूरी हो गया है। जहां हमारा यह मानना है कि सख्त मौद्रिक नीति से आ​र्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है, वहीं देर से कदम उठाने से हालात बदतर हो सकते हैं। ऊंची मुद्रास्फीति से वास्तविक ब्याज दरें प्रभावित होंगी जो सं​क्षिप्त मंदी की अव​धि के मुकाबले ज्यादा बदतर है। आगामी दो तिमाहियों के दौरान मुद्रास्फीति और जिंस कीमतें नियंत्रित में आएंगी जिससे इ​क्विटी बाजारों में तेजी के लिए आधार तैयार होगा।

क्या मौजूदा स्तरों पर मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश के लिए रिस्क-रिवार्ड अनुकूल है?
पिछले 6 महीनों में अपने ऊंचे स्तरों से 20-25 प्रतिशत गिरने के बाद, मिडकैप और स्मॉलकैप अब आकर्षक हो गए हैं। यह सोचने की कोई वजह नहीं है कि इस बार समय अलग रहेगा। पिछले समय में, हमने देखा कि भारतीय इ​क्विटी बाजारों ने तीन-पांच साल के दौरान मजबूत प्रतिफल दिया, जिसके बाद गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप के संदर्भ में निवेश्कों को एमएफ/पीएमएस जैसे प्रबं​धित पोर्टफोलियो में निवेश करना होगा, क्योंकि यह बाजार कुछ खास शेयरों में वृद्धि के अवसरों तक सीमित रह सकता है।

क्या अ​स्थिर दौर में विदेशी बाजारों में किस्मत आजमाना सही है?
मैं परिसंप​त्ति वर्ग में विविधता के फायदों में भरोसा रखता हूं। भारत वै​श्विक बाजार पूंजीकरण में करीब 3.1 प्रतिशत का योगदान देता है, इसलिए यदि विदेशी इ​क्विटी निवेश को पोर्टफोलियो में शामिल नहीं किया जाए तो वै​श्विक तौर पर मजबूत ब्रांडों और शेयरों में निवेश करने के अवसर समाप्त हो जाएंगे। यह समय अंतरराष्ट्रीय निवेश बरकरार रखने का है और आपके पोर्टफोलियो में विदेशी इ​क्विटी 10 से 12 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।

क्या निवेशकों को घरेलू अर्थव्यवस्था से संबं​धित दबाव से जुड़े क्षेत्रों या निर्यात केंद्रित क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए?
चाइना-प्लस रणनीति के साथ, मजबूत बैलेंस शीट वाले और रसायन, टेक्सटाइल और आईटी जैसे निर्यात-केंद्रित व्यवसाय निवेशकों के लिए आकर्षक पसंद हो सकते हैं।

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First Published - August 1, 2022 | 12:41 AM IST

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