शेयर बाजार

US–Iran टकराव बढ़ा तो क्या होगा सेंसेक्स-निफ्टी का हाल? इन सेक्टर्स को सबसे ज़्यादा जोखिम

फरवरी 2022 में जब रूस और यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ था, तब निफ्टी पहले हफ्ते में लगभग 3 प्रतिशत गिरा और करीब तीन महीने तक कमजोर रहा।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- March 03, 2026 | 9:47 AM IST

Stock Market: मिडिल ईस्ट में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ रहा है। इसमें भारत भी शामिल है। भारतीय बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सोमवार को करीब 1.25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट लेकर बंद हुए।

ब्रोकरेज कंपनी एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि अगर यह तनाव जारी रहता है, तो निफ्टी में गिरावट आ सकती है। उनका अनुमान है कि निफ्टी 24,500–25,000 के स्तर तक आ सकता है। अगर यह संघर्ष 1–2 हफ्ते से ज्यादा चला, तो बाजार और नीचे जा सकता है क्योंकि भारत तेल आयात पर काफी निर्भर है। साथ ही शेयर बाजार की वैल्यूएशन पहले से हाई है और विदेशी निवेशक पैसा निकाल सकते है। इससे रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, उनका मानना है कि अगर हालात एक हफ्ते में सामान्य हो जाते हैं, तो बाजार पहले की तरह जल्दी संभल सकता है।

यूक्रेन-रूस युद्ध के समय Stock Market का रिएक्शन?

फरवरी 2022 में जब रूस और यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ था, तब निफ्टी पहले हफ्ते में लगभग 3 प्रतिशत गिरा और करीब तीन महीने तक कमजोर रहा। लेकिन अक्टूबर 2023 में मिडिल ईस्ट में तनाव और जून 2025 में ईरान से जुड़े घटनाक्रम के दौरान भारतीय बाजार ज्यादा मजबूत रहा।

इन दोनों मौकों पर तीन महीनों के अंदर बाजार में क्रमशः 10.5 प्रतिशत और 2.2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। इससे पता चलता है कि अगर संकट लंबा और बहुत गंभीर न हो, तो भारतीय शेयर बाजार जल्दी संभल जाता है।

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किन सेक्टर पर पड़ सकता है असर?

अगर यह संकट लंबा चलता है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, एयरलाइंस और मिडिल ईस्ट में ज्यादा काम करने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां दबाव में आ सकती हैं। जैसे लार्सन और टुब्रो (L&T) और केईसी इंटरनेशनल। इनका उस क्षेत्र में बड़ा ऑर्डर बुक है।

एयरलाइन कंपनी इंडिगो पर ईंधन की बढ़ती कीमत और उड़ानों के रद्द होने का असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर मेटल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो ऑटो, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं।

कौन से सेक्टर सुरक्षित?

ब्रोकरेज के अनुसार, इस माहौल में अपस्ट्रीम तेल कंपनियां कुछ हद तक सुरक्षित हो सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि तेल की कीमत बढ़ने से उनकी कमाई बढ़ती है। इसमें ONGC और Oil India Limited जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि सरकार विंडफॉल टैक्स लगा सकती है।

मेटल सेक्टर की कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को भी कमोडिटी कीमतों में तेजी से फायदा मिल सकता है। आईटी सेक्टर पर सीधा असर कम माना जा रहा है और अगर रुपया कमजोर होता है तो इन्फोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीस जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है। क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है।

First Published : March 3, 2026 | 9:22 AM IST