भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सोमवार को सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स (एसडीआई) से जुड़े नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा। इसका मकसद इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मानक परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण (एसएसए) दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाना है। आरबीआई ने इससे जुड़े निर्देश 2021 में जारी किए थे।
असल में सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स या एसडीआई ऐसी वित्तीय योजनाएं होती हैं जिन्हें अतरलीकृत (इलिक्विड) को पूल करके बनाया जाता है और फिर इन्हें खरीदने-बेचने वाली प्रतिभूतियों में बदला जाता है। इस पूल में मॉर्गेज, ऑटो लोन या रिसीवेबल शामिल होते हैं।
यह प्रस्ताव उस फीडबैक के बाद आया है जिसमें सेबी के नियमनों और आरबीआई के दिशानिर्देशों के बीच अंतर बताया गया था, खासतौर पर आरबीआई से नियमन वाली संस्थाओं की ओर से शुरू की गई प्रतिभूतियों से जुड़े लेनदेन के बारे में।
सेबी ने आरबीआई से नियमित होने वाली संस्थाओं को एक परिसंपत्ति के प्रतिभूतिकरण की भी अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। इसमें उन्हें इस शर्त से छूट दी गई है कि किसी भी देनदार का हिस्सा परिसंपत्ति पूल के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। मौजूदा स्थितियों के तहत ऐसी लिस्टिंग पर रोक है, भले ही उन्हें आरबीआई के निर्देशं के तहत अनुमति हो।