facebookmetapixel
Advertisement
‘डिजिटल अरेस्ट’ को अलग अपराध बनाने पर विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्टकम वेतन से ISRO छोड़ रहे वैज्ञानिक? इस्तीफों के बाद सरकार ने नियम किए सख्तपेपर लीक बिल पर लोकसभा में घमासान, सत्ता और विपक्ष आमने-सामनेकॉपीराइट के नाम पर उगाही का आरोप, Delhi High Court ने केंद्र और Meta को नोटिस भेजापीएम का पोस्ट हटाने का मामला, मेटा के अधिकारी जोल कैपलन तलबसोशल मीडिया पर भ्रामक खबरों से निपटने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 2 घंटे में देना होगा जवाबइंडिगो ने परिचालन संकट से ली सीख, सिस्टम मजबूत कर अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर फोकसटाटा कम्युनिकेशंस और टीटीबीएस लाएंगी छोटे उद्यमों के लिए एआई प्लेटफॉर्मभारत के स्पेस-टेक स्टार्टअप में बढ़ा निवेश, पांच साल में जुटाए 87 करोड़ डॉलरटाटा संस का मुनाफा 5 साल के निचले स्तर पर, राजस्व बढ़ने के बावजूद 36% की गिरावट

सेबी ने SDI नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा, RBI गाइडलाइंस के अनुरूप लाने की तैयारी

Advertisement

असल में सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स या एसडीआई ऐसी वित्तीय योजनाएं होती हैं जिन्हें अतरलीकृत (इलिक्विड) को पूल करके बनाया जाता है

Last Updated- May 04, 2026 | 10:50 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सोमवार को सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स (एसडीआई) से जुड़े नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा। इसका मकसद इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मानक परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण (एसएसए) दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाना है। आरबीआई ने इससे जुड़े निर्देश 2021 में जारी किए थे। 

असल में सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स या एसडीआई ऐसी वित्तीय योजनाएं होती हैं जिन्हें अतरलीकृत (इलिक्विड) को पूल करके बनाया जाता है और फिर इन्हें खरीदने-बेचने वाली प्रतिभूतियों में बदला जाता है। इस पूल में मॉर्गेज, ऑटो लोन या रिसीवेबल शामिल होते हैं।

यह प्रस्ताव उस फीडबैक के बाद आया है जिसमें सेबी के नियमनों और आरबीआई के दिशानिर्देशों के बीच अंतर बताया गया था, खासतौर पर आरबीआई से नियमन वाली संस्थाओं की ओर से शुरू की गई  प्रतिभूतियों से जुड़े लेनदेन के बारे में।  

सेबी ने आरबीआई से नियमित होने वाली संस्थाओं को एक परिसंपत्ति के प्रतिभूतिकरण की भी अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। इसमें उन्हें इस शर्त से छूट दी गई है कि किसी भी देनदार का हिस्सा परिसंपत्ति पूल के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। मौजूदा स्थितियों के तहत ऐसी लिस्टिंग पर रोक है, भले ही उन्हें आरबीआई के निर्देशं के तहत अनुमति हो।

Advertisement
First Published - May 4, 2026 | 10:31 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement