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कोविड के बाद सबसे तेज रिकवरी: बाजार में V-शेप रैली, सेंसेक्स-निफ्टी 6 हफ्तों के हाई पर

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बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 468.7 लाख करोड़ रुपये हो गया

Last Updated- April 21, 2026 | 10:35 PM IST
Closing Auction Session

बाजार में हाल के समय में कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। लेकिन अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर पड़ने वाले असर को लेकर अनिश्चितता बनी रहने के बावजूद अब बाजार में तेज सुधार दिख रहा है।

शेयर बाजार में आज भी अच्छी तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी 6 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर बंद हुए। सेंसेक्स 753 अंक की बढ़त के साथ 79,273 पर बंद हुआ। निफ्टी 212 अंक की तजी के साथ 24,577 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 468.7 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इस महीने अब तक बाजार में व्यापक तेजी आई है और बीएसई 500 सूचकांक 12.1 फीसदी चढ़ गया है। अगर तेजी इसी तरह बनी रही तो अप्रैल 2020 के बाद से बाजार का यह सबसे अच्छी मासिक उछाल होगी। मार्च 2020 में कोविड संकट के दौरान बेंचमार्क सूचकांक में 24 फीसदी की भारी गिरावट के बाद लगभग 15 फीसदी की तेजी आई थी।

मौजूदा सुधार बाजार में आई वैसी ही तेज गिरावट के बाद हुई है। मार्च में बाजार 11 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गए थे जो मार्च 2020 के बाद से सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। लगातार गिरावट और फिर से उछाल का यह सिलसिला अंग्रेजी अक्षर ‘वी’ के आकृति का पैटर्न दिखाता है जो कोविड काल की याद दिलाता है या फिर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आई गिरावट के बाद बाजार में आए उछाल जैसा ही है। ‘वी’ आकार के सुधार का मतलब होता है कि भारी गिरावट के बाद अचानक से तेज सुधार आना।

जानकारों का कहना है कि ट्रेडिंग के ऐसे रुझान से पता चलता है कि निवेशक बाजार में आई तेज गिरावट को लंबे समय तक चलने वाले गिरावट का संकेत मानने के बजाय, खरीदने के मौके के तौर पर देख रहे हैं। घरेलू स्तर पर बाजार को मजबूत तरलता का सहारा मिला है। नतीजतन, सुधार केवल लार्ज कैप तक ही सीमित नहीं है बल्कि बाजार में व्यापक स्तर पर तेजी आई है। इस महीने बढ़ने वाले हर दो शेयर पर 1 शेयर गिरावट में रहा है। जो बीएसई के लिए 2009 के बाद से सबसे मजबूत बढ़त-गिरावट अनुपात है।

हालांकि विश्लेषकों ने आगाह किया है कि इस तेजी को बनाए रखना इस बात पर निर्भर करेगा कि भू-राजनीतिक जोखिम कैसे बदलते हैं और उनका असर आ​​र्थिक वृद्धि तथा कंपनियों के मुनाफे पर कितना पड़ता है।

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First Published - April 21, 2026 | 10:08 PM IST

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