facebookmetapixel
Advertisement
नोकिया ने भारत में नेतृत्व ढांचा बदला, समर मित्तल और विभा मेहरा को नई जिम्मेदारीनिप्पॉन स्टील इंडिया के सीईओ उम्मेन जून में सेवानिवृत्त होंगेजेएसडब्ल्यू मोटर्स ने दसॉ सिस्टम्स से किया करार, ईवी डिजाइन और उत्पादन को मिलेगी रफ्तारफेम-2 के बकाये अटके, ऑटो कंपनियां अब भी भुगतान के इंतजार मेंएलपीजी संकट में क्लबों का जुगाड़, लकड़ी के चूल्हे और इलेक्ट्रिक कुकिंग का सहारागैस पाइपलाइन विस्तार को रफ्तार, सरकार ने मंजूरी प्रक्रिया तेज कीदेश में एलपीजी सप्लाई की कोई कमी नहीं, घबराने की जरूरत नहीं: सरकारStock Market Update: शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 800 से ज्यादा अंक टूटा; निफ्टी 23100 के करीबStocks to Watch Today: IREDA से लेकर RIL और Infosys तक, शुक्रवार को इन 10 स्टॉक्स में रखें नजरअगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसन

भारतीय बाजार पर ‘युद्ध’ की मार: सोमवार को सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के आसार, जानें एक्सपर्ट की राय

Advertisement

चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका यह युद्ध तेल की कीमतों पर असर डाल रहा है और दुनिया भर के शेयर बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है

Last Updated- March 22, 2026 | 9:38 PM IST
BSE
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ईरान युद्ध में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पिछले बंद स्तर से काफी नीचे खुलने की संभावना है और इस सप्ताह भी बाजार में उथल-पुथल जारी रहने की आशंका है। सप्ताहांत में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला तो वह उसके बिजली संयंत्रों पर हमला करेगा। वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर ट्रंप ने अपनी धमकी पर अमल किया तो वह पश्चिम एशिया की प्रमुख बुनियादी सुविधाओं पर हमला करेगा। चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका यह युद्ध तेल की कीमतों पर असर डाल रहा है और दुनिया भर के शेयर बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। 

विश्व का लगभग 20 फीसदी तेल और गैस ढोने वाला होर्मुज स्ट्रेट लगभग ठप हो गया है। जंग शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 44.6 फीसदी का इजाफा हुआ है और शुक्रवार को ब्रेंट 106.9 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। भारतीय शेयर बाजार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा था और पश्चिम एशिया की इस जंग ने निवेशकों के भरोसे को और भी तोड़ दिया है।

युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, मुद्रास्फीति, भुगतान संतुलन और रुपये के अवमूल्यन के मामले में भारत के लिए हालात उतने ही खराब होते जाएंगे क्योंकि भारत तेल का बड़ा आयातक देश है। शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सर्वकालिक निचले स्तर 93.72 पर पहुंच गया।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पश्चिम एशिया में घटनाएं क्या मोड़ लेती हैं। फिलहाल, स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है, और इसका असर सोमवार के शुरुआती कारोबार में दिख सकता है। ऐसा नहीं लगता कि कोई भी पक्ष पीछे हट रहा है। हमें कोई शांति मध्यस्थता करने वाला भी नहीं दिख रहा है। अगर होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी खत्म हो जाती है तो हमारे लिए स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है। 

मौजूदा युद्ध ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को फिर से जोखिम से बचने के लिए मजबूर किया है। मार्च में एफपीआई ने 82,700 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जो अक्टूबर 2024 के बाद की उनकी सबसे बड़ी मासिक शुद्ध बिकवाली है। भट्ट ने बताया कि रुपये के अवमूल्यन के कारण एफपीआई को बिना बिक्री के भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। तेल और आम वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है, जिससे बाजार में स्थिरता लौटने तक निवेशक सतर्क हो रहे हैं।

इस युद्ध ने अगले वित्त वर्ष में कंपनियों के मुनाफे में सुधार की धारणाओं को भी उलट दिया है, जो बाजार में तेजी का एकमात्र संभावित कारण दिख रहा था।

स्वतंत्र इक्विटी विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा, दो अंकों में लाभ वृद्धि के सभी अनुमानों पर फिर से विचार करना होगा क्योंकि किसी ने भी ईरान युद्ध और ऊर्जा की कीमतों पर इसके व्यापक असर को ध्यान में नहीं रखा था। अगले महीने जब आय सत्र शुरू होगा तो आय अनुमानों में गिरावट आएगी।

बालिगा ने कहा कि निवेशक उन शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं, जिन पर उन्हें पूरा भरोसा है क्योंकि अब उनका मूल्यांकन आकर्षक लग रहा है। साथ ही उन्हें आगे की अस्थिरता के लिए भी तैयार रहना चाहिए। बालिगा ने कहा, जिनके पास कुछ नकदी है, अगर आप अभी निवेश नहीं करते हैं तो आप कभी निवेश नहीं कर पाएंगे। कोई भी यह नहीं जानता कि गिरावट कहां जाकर रुकेगी और यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि आप कभी भी सबसे निचले स्तर पर खरीदारी नहीं कर पाते हैं।

लेकिन कुछ विशेषज्ञ इसके विपरीत सावधानी बरतने की सलाह देते हैं और कहते हैं कि निवेशकों को सक्रिय निवेश से पहले हालात स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए। 

भट्ट ने कहा, युद्ध रुकने की स्पष्टता के बाद बाजार फिर से पटरी पर आ जाएंगे। लेकिन आप गिरावट के सबसे निचले स्तर का अनुमान नहीं लगा सकते। खुदरा निवेशकों के लिए इंतजार करना उचित है क्योंकि रिकवरी के बाद भले ही उन्हें 3 से 4 फीसदी अधिक भुगतान करना पड़े, फिर भी वह जोखिम उठाने लायक होता है।

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी युद्ध की शुरुआत से अब तक क्रमशः 8.3 फीसदी और 8.2 फीसदी गिर चुके हैं। दोनों सूचकांक गिरावट के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। सेंसेक्स अपने उच्चतम बंद स्तर से 13 फीसदी और निफ्टी 12 फीसदी लुढ़क चुका है।

Advertisement
First Published - March 22, 2026 | 9:37 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement