विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त के पहले पखवाड़े में भारत के खपत आधारित क्षेत्रों (consumption-led sectors) में अपना निवेश बढ़ाया। वहीं, उन्होंने टेलीकॉम, रियल एस्टेट और दूसरे कैपिटल-इंटेंसिव (ज्यादा पूंजी वाले) सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी घटाई। निवेश के इस रुझान से संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों का भारत की कंजम्पशन स्टोरी पर भरोसा कायम है और वे खपत आधारित अर्थव्यवस्था की बढ़ती ग्रोथ का फायदा उठाना चाहते हैं।
सैमको सिक्योरिटीज के एक नोट के अनुसार, FPIs ने 1 से 15 अगस्त के दौरान भारतीय इक्विटी में कुल 16,621 करोड़ रुपये का निवेश किया। फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा 6,535 करोड़ रुपये का निवेश आया। इसके बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में 4,405 करोड़ रुपये और हेल्थकेयर सेक्टर में 2,910 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। आईटी सेक्टर में भी जबरदस्त खरीदारी देखी गई, जिसमें FPIs ने इस पखवाड़े के दौरान 2,530 करोड़ रुपये का निवेश किया।

Also Read: जेपी मॉर्गन की यूनिट पर SEBI का तगड़ा एक्शन, ट्रेडर्स के लिए मानी जा रही बड़ी चेतावनी
विदेशी निवेशकों के लिए कंज्यूमर-ओरिएंटेड सेक्टर मुख्य फोकस बने रहे। कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में कस्टडी में मौजूद पिछली एसेट्स (AUC) के 1.23 फीसदी के बराबर इनफ्लो दर्ज किया गया, जो इस अवधि के दौरान सभी सेक्टरों में सबसे ज्यादा था। यह लगातार तीसरा पखवाड़ा था जब कंज्यूमर-ओरिएंटेड सेक्टर AUC-लिंक्ड इनफ्लो में सबसे आगे रहे, जो भारत की कंजम्पशन स्टोरी में संस्थागत निवेशकों की लगातार दिलचस्पी को दिखाता है।
इसके बाद ऑटो सेक्टर में 0.82 फीसदी की बढ़त देखी गई, जिसे बेहतर मांग और अच्छी कमाई में बढ़ोतरी की उम्मीदों का सहारा मिला। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर में क्रमशः 0.74 फीसदी और 0.64 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जबकि हेल्थकेयर सेक्टर में 0.55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के एलोकेशन में बदलाव खास तौर पर टेलीकॉम और रियल एस्टेट सेक्टर में देखा गया। इस दो हफ्ते की अवधि में टेलीकॉम सेक्टर से सबसे ज्यादा 3,322 करोड़ रुपये की निकासी हुई। यह इसके पिछले AUC के मुकाबले 0.89 फीसदी की गिरावट थी, जो सभी सेक्टरों में सबसे बड़ी गिरावट थी।
रियल एस्टेट सेक्टर से 1,014 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जो इसके पिछले AUC का 0.82 फीसदी था। पावर और कैपिटल गुड्स सेक्टर में भी बिकवाली देखी गई, जहां क्रमशः 1,164 करोड़ रुपये और 1,556 करोड़ रुपये की निकासी हुई। कंस्ट्रक्शन सेक्टर से 404 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई।
सैमको सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट राज गाइकर के मुताबिक, FPI की रुझान पॉजिटिव रहा, लेकिन सेक्टर के हिसाब से निवेश का पैटर्न बताता है कि विदेशी निवेशक टेलीकॉम और ज्यादा पूंजी वाले सेक्टर से हटकर कंजम्पशन (खपत), ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर से जुड़े बिजनेस को प्राथमिकता दे रहे हैं।
यह ट्रेंड बताता है कि निवेशक बदलते आर्थिक और बाजार के माहौल को देखते हुए भारतीय बाजार के बड़े, आसानी से कैश में बदले जा सकने वाले (लिक्विड) और अपेक्षाकृत सुरक्षित (डिफेंसिव) सेक्टर को फिर से प्राथमिकता दे रहे हैं।