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एक्सप्लेनर: सिर्फ 2 सेकंड में 88 ऑर्डर! नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में कैसे हुई हेरफेर? समझें पूरा मामला

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Closing Auction Manipulation: सेंसेक्स एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन में बड़े ऑर्डर लगाकर बंद स्तर प्रभावित करने का आरोप है

Last Updated- August 21, 2026 | 12:14 PM IST
SEBI
प्रतीकात्मक फोटो

Closing Auction Manipulation: शेयरों का बंद भाव तय करने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया गया नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम यानी CAS खुद बाजार में कथित हेरफेर के मामले में फंस गया है। बाजार नियामक सेबी का आरोप है कि सेंसेक्स में शामिल शेयरों में बड़े खरीद-बिक्री ऑर्डर लगाकर इंडेक्स के क्लोजिंग लेवल को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इसका मकसद एक्सपायरी वाले दिन विकल्प सौदों से मुनाफा कमाना था।

सेबी ने 13 अगस्त को बीएसई के क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान हुए कारोबार को लेकर जेपी मॉर्गन चेस की सब्सिडियरी यूनिट कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है।

मार्केट रेगुलेटर ने दोनों कंपनियों के कुल 3.68 करोड़ रुपये के कथित अनुचित लाभ को जब्त करने का निर्देश दिया है। यह आदेश मामले में संबंधित पक्षों को पहले सुने बिना तत्काल कार्रवाई के रूप में जारी किया गया है।

क्या है क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम?

सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को 3 अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया था। पहले चरण में कैश मार्केट के उन शेयरों को शामिल किया गया, जिन पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स उपलब्ध हैं। नई व्यवस्था में इन शेयरों का सामान्य कारोबार दोपहर 3:15 बजे बंद हो जाता है। इसके बाद 3:15 से 3:20 बजे के बीच प्रत्येक शेयर का संदर्भ मूल्य तय किया जाता है।

क्लोजिंग ऑक्शन की शुरुआत 3:20 बजे होती है। यह सेशन 3:28 से 3:30 बजे के बीच किसी भी समय अचानक बंद हो सकता है। इस दौरान सेंसेक्स में शामिल किसी शेयर का भाव उसके संदर्भ मूल्य से अधिकतम 3 फीसदी ऊपर या नीचे जा सकता है।

इसके बाद 3:35 बजे तक एक संतुलन मूल्य तय होता है। यह वह एकल मूल्य होता है, जिस पर सबसे ज्यादा शेयरों की खरीद-बिक्री पूरी हो सकती है। सूचकांक का बंद स्तर उसमें शामिल कंपनियों के शेयरों के बंद भाव के आधार पर तय होता है। एक्सपायरी वाले दिन यह स्तर इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर संबंधित सूचकांक के डेरिवेटिव सौदों का निपटान होता है।

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13 अगस्त को क्या हुआ?

13 अगस्त को सेंसेक्स डेरिवेटिव की वीकली एक्सपायरी थी। उस दिन सेंसेक्स का संदर्भ स्तर 77,829.60 था, जबकि आखिर में सूचकांक 78,080 पर बंद हुआ। क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान सेंसेक्स में तीन बार बहुत कम समय में तेज उछाल दर्ज किया गया।

पहला उछाल दोपहर 3 बजकर 20 मिनट और 41 सेकंड से 43 सेकंड के बीच आया। इन 2 सेकंड में सेंसेक्स 362.02 अंक बढ़कर 77,661.40 से 78,023.42 पर पहुंच गया। दूसरा उछाल 3 बजकर 24 मिनट और 8 सेकंड से 20 सेकंड के बीच आया। इस दौरान करीब 12 सेकंड में सूचकांक 132.67 अंक चढ़ा।

तीसरी तेज बढ़त 3 बजकर 25 मिनट और 49 सेकंड से 3 बजकर 26 मिनट और 17 सेकंड के बीच दर्ज हुई। इन 28 सेकंड में सेंसेक्स 405.08 अंक उछल गया। सेबी की निगरानी में सामने आया कि इन तेज उछालों के दौरान कॉप्थॉल प्रमुख खरीदार था।

केवल 2 सेकंड में लगाए गए 88 खरीद ऑर्डर

पहली तेजी के दौरान महज 2 सेकंड में कुल 88 खरीद ऑर्डर लगाए गए। इनमें कॉप्थॉल के ऑर्डर की कीमत करीब 66.58 करोड़ रुपये थी। यह उस दौरान लगाए गए कुल खरीद ऑर्डर के मूल्य का लगभग 99.91 फीसदी था। कॉप्थॉल ने सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयरों में कुल 32 सीमित मूल्य वाले खरीद ऑर्डर लगाए थे। ये सभी ऑर्डर संदर्भ मूल्य से 3 फीसदी ऊपर लगाए गए थे।

दूसरी तेजी के दौरान कुल खरीद ऑर्डर के मूल्य में कॉप्थॉल की हिस्सेदारी करीब 96.09 फीसदी यानी 126.59 करोड़ रुपये थी। तीसरे उछाल के दौरान इसकी हिस्सेदारी लगभग 85.21 फीसदी यानी 98.12 करोड़ रुपये रही। इस दौरान भी सेंसेक्स में शामिल सभी शेयरों में संदर्भ मूल्य से 3 फीसदी ऊपर खरीद ऑर्डर लगाए गए थे।

मानसी शेयर पर क्या आरोप?

सेबी के मुताबिक मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने अलग तरीका अपनाया। ब्रोकरेज ने सेंसेक्स में शामिल 8 शेयरों में बड़े बिक्री ऑर्डर लगाए। इन ऑर्डर के कारण करीब 4 से 5 मिनट तक सेंसेक्स के संकेतक संतुलन मूल्य पर नीचे की ओर दबाव बना रहा। ऑर्डर रद्द होते ही यह दबाव हट गया।

नियामक के अनुसार मानसी के पास सेंसेक्स के पुट विकल्प खुले हुए थे। कथित तौर पर सेंसेक्स का संकेतक स्तर नीचे जाने से इन विकल्प सौदों को फायदा हुआ। पुट विकल्पों को लाभ की स्थिति में बंद करने के बाद ब्रोकरेज ने शेयर बेचने के ऑर्डर रद्द कर दिए।

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सेबी ने कैसे जोड़ी पूरी कड़ी?

सेबी ने नकद बाजार में लगाए गए बड़े ऑर्डर को अलग घटना के रूप में नहीं देखा। नियामक ने ऑर्डर की कीमत, आकार, समय और सेंसेक्स के शेयरों में इनके फैलाव की जांच की। इसके अलावा ऑर्डर का संकेतक संतुलन मूल्य पर असर, बाद में ऑर्डर रद्द करने की गतिविधि और दोनों संस्थाओं के साथ-साथ चल रहे वायदा एवं विकल्प सौदों का भी विश्लेषण किया गया।

कॉप्थॉल के पास सेंसेक्स विकल्प में लॉन्ग कॉल और शॉर्ट पुट पोजीशन थीं। इन पोजीशन को सेंसेक्स में तेजी होने पर फायदा मिलता। सेबी की शुरुआती राय है कि नकद बाजार में आक्रामक खरीदारी से सूचकांक को ऊपर धकेलने में मदद मिली और विकल्प पोजीशन को लाभ पहुंचा।

नियामक ने कहा कि दोनों संस्थाओं के ऑर्डर शुरुआती जांच में सामान्य कारोबारी मकसद से लगाए गए नहीं लगते। हालांकि, सेबी को अभी ऐसा कोई शुरुआती प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह पता चले कि दोनों ने मिलकर या आपसी तालमेल से काम किया।

कितना अनुचित लाभ कमाने का आरोप?

सेबी ने कॉप्थॉल का कथित अनुचित लाभ 2.96 करोड़ रुपये और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग का लाभ 71.65 लाख रुपये आंका है। दोनों को मिलाकर यह रकम करीब 3.68 करोड़ रुपये बैठती है। नियामक ने इस रकम को जब्त कर सावधि जमा में रखने और उस पर सेबी के पक्ष में अधिकार दर्ज करने का निर्देश दिया है।

दोनों संस्थाओं को अगले आदेश तक शेयर बाजार के क्लोजिंग ऑक्शन सत्र में सीधे या किसी दूसरे माध्यम से हिस्सा लेने से रोक दिया गया है। वे इस दौरान ऑर्डर लगाने, उनमें बदलाव करने या उन्हें रद्द करने की गतिविधि भी नहीं कर सकेंगी। इसके साथ ही दोनों पर व्यापक रूप से प्रतिभूति बाजार तक पहुंचने की पाबंदी भी लगाई गई है।

सेबी ने तुरंत कार्रवाई क्यों की?

सेबी के मुताबिक तत्काल कार्रवाई इसलिए जरूरी थी, क्योंकि दोनों संस्थाओं ने 20 अगस्त को एक्सपायर होने वाले अगले साप्ताहिक सेंसेक्स विकल्प अनुबंध में पहले ही पोजीशन बना रखी थीं।

नियामक को आशंका थी कि क्लोजिंग ऑक्शन में हिस्सा लेने की अनुमति जारी रहने पर इसी तरह की गतिविधि दोबारा हो सकती है। इसलिए जांच पूरी होने का इंतजार किए बिना अंतरिम निर्देश जारी किए गए।

अब आगे क्या होगा?

यह अंतरिम और एकतरफा आदेश है। इसका मतलब है कि जरूरी कार्रवाई से पहले दोनों संस्थाओं का पक्ष नहीं सुना गया। गंभीर या तत्काल मामलों में सेबी ऐसा आदेश जारी कर सकता है। अब मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। इसमें दोनों संस्थाओं के साथ अन्य संदिग्ध पक्षों की भूमिका और संभावित नियम उल्लंघनों की जांच भी शामिल होगी।

कॉप्थॉल और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग को आदेश पर अपना जवाब और आपत्ति दाखिल करने के लिए 21 दिन का समय दिया गया है। दोनों संस्थाएं व्यक्तिगत सुनवाई की मांग भी कर सकती हैं।

नए सिस्टम के लिए क्यों अहम है मामला?

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम लागू होने के बाद यह सेबी की पहली बड़ी कार्रवाई है। इस व्यवस्था को भारतीय बाजार में बंद भाव तय करने की प्रक्रिया को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए शुरू किया गया है।

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने आदेश से कुछ घंटे पहले कहा था कि हेरफेर के जरिये नई व्यवस्था की छवि खराब करने की किसी कोशिश से नियामक सख्ती से निपटेगा।

सेबी का मानना है कि पुराने मात्रा-भारित औसत मूल्य यानी वीडब्ल्यूएपी सिस्टम के मुकाबले क्लोजिंग ऑक्शन में गड़बड़ी पकड़ना आसान है। इसकी वजह यह है कि संदिग्ध गतिविधि एक तय और सीमित समय में होती है, जिससे ऑर्डर लगाने, बदलने और रद्द करने के तरीके की निगरानी बेहतर ढंग से की जा सकती है।

यह मामला सूचकांक की एक्सपायरी से जुड़ी कारोबारी रणनीतियों पर सेबी की बढ़ती निगरानी को भी दिखाता है। इससे पहले नियामक ने अमेरिकी ट्रेडिंग कंपनी जेन स्ट्रीट के खिलाफ बैंक निफ्टी में कथित हेरफेर को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया था। बाद में उस जांच का दायरा सेंसेक्स समेत दूसरे सूचकांकों तक बढ़ा दिया गया था।

 

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - August 21, 2026 | 11:40 AM IST

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