SEBI New Rules: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने कर्मचारियों के सेवा नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकना, निवेश संबंधी नियमों को अधिक पारदर्शी बनाना और कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाना है। नए नियमों के तहत कर्मचारियों के निवेश, खुलासे (Disclosure), नौकरी बदलने और उपहार स्वीकार करने से जुड़े प्रावधानों को और सख्त किया गया है।
संशोधित नियमों के तहत अब ‘परिवार’ और ‘आश्रित’ की परिभाषा को पहले से व्यापक बना दिया गया है। इसमें गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे, जो किसी कर्मचारी पर काफी हद तक आर्थिक रूप से निर्भर हैं।
इस बदलाव के बाद निवेश और अन्य वित्तीय जानकारी के खुलासे से जुड़े नियम इन सभी लोगों पर भी लागू होंगे।
SEBI ने पूर्व कर्मचारियों के लिए दो साल की ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि अनिवार्य कर दी है। इसका मतलब है कि कोई भी कर्मचारी सेबी की नौकरी छोड़ने के बाद अगले दो वर्षों तक किसी भी व्यक्ति या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष चल रही कार्यवाही, निपटान (Settlement), मंजूरी या अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) मामलों में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेगा।
इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी किसी नई नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी भी देनी होगी।
नए नियमों के तहत SEBI कर्मचारियों के लिए ‘अनुमत’ और ‘प्रतिबंधित’ निवेश की स्पष्ट श्रेणियां तय की गई हैं।
अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान सीधे शेयरों, इक्विटी में बदलने वाले वित्तीय साधनों (Equity Convertible Instruments) और डेरिवेटिव्स में नया निवेश नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, म्यूचुअल फंड, REITs और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश माध्यमों के जरिए निवेश करने की अनुमति जारी रहेगी।
SEBI ने कुछ विनियमित निवेश उत्पादों में निवेश की सीमा भी तय कर दी है। नए नियमों के अनुसार, ऐसे निवेश कर्मचारी के कुल निवेश का 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेंगे।
हालांकि, जीवनसाथी को मिलने वाले Employee Stock Options (ESOPs) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन (Discretionary Portfolio Management Services) जैसी कुछ श्रेणियों को सीमित छूट दी गई है।
SEBI ने उपहार स्वीकार करने से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब कर्मचारियों को 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के उपहार की जानकारी देना अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा 10,000 रुपये थी।
साथ ही, नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक और पारंपरिक अवसरों पर दिए जाने वाले सामान्य उपहार किन परिस्थितियों में स्वीकार किए जा सकते हैं।