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SEBI का नया प्रस्ताव: अब बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव में भी नहीं फंसेंगे ऑप्शंस ट्रेडर्स, ब्रोकर्स को भी मिलेगी राहत

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सेबी ने ऑप्शंस ट्रेडिंग को आसान बनाने और बड़े उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए नए स्ट्राइक प्राइस फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा है, जिससे ट्रेडर्स को हेजिंग में मदद मिलेगी

Last Updated- May 25, 2026 | 10:02 PM IST
SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सोमवार को एक ऐसी व्यवस्था का प्रस्ताव किया, जिसमें ऑप्शंस के अनुबंधों के लिए स्ट्राइक प्राइस की शुरुआत और उनके लगातार प्रबंधन का नियंत्रण किया जाएगा। शेयर बाजार में सबसे ज्यादा वॉल्यूम इसी सेगमेंट में है।

प्रस्तावित उपायों में ऑप्शन अनुबंध शुरू करने के नियम शामिल हैं ताकि ‘इन-द-मनी’ और ‘आउट-ऑफ-द-मनी’ अनुबंधों की न्यूनतम संख्या की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। साथ ही ट्रेडिंग की निरंतरता बनाए रखने के लिए मौजूदा बाजार कीमतों के आसपास ‘स्ट्राइक’ की उपलब्धता की रोजाना समीक्षा की जा सके। इसके अलावा उन ‘स्ट्राइक प्राइस’ को समय-समय पर हटाया जा सके, जो मौजूदा बाजार स्तर से काफी दूर हैं।

यह प्रस्ताव उन चिंताओं के बीच आया है जिनमें अंतर्निहित संपत्तियों में दिन के दौरान तेज उतार-चढ़ाव के कारण कीमतें उपलब्ध सबसे दूर की स्ट्राइक प्राइस से भी ज्यादा या कम हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में ट्रेडरों के पास हेज करने या पोजीशन लेने के लिए उपयुक्त ऑप्शन अनुबंध नहीं बचते।

सोमवार को जारी परामर्श पत्र में बाजार नियामक ने बताया कि अगर कीमतें सबसे दूर की उपलब्ध स्ट्राइक से भी ज्यादा तेजी से बदलती हैं तो बाजार के प्रतिभागियों को सही ऑप्शन अनुबंध न होने की वजह से परेशानी हो सकती है। इस प्रस्तावित फ्रेमवर्क का मकसद ज्यादा व्यवस्थित और तुरंत प्रतिक्रिया से इस अंतर को दूर करना है।

फिलहाल, लंबी अवधि के इंडेक्स ऑप्शंस के लिए स्ट्राइक इंटरवल्स को तर्कसंगत बनाने से जुड़ा सिर्फ एक ही नियामकीय ढांचा मौजूद है। स्टॉक एक्सचेंज अंतर्निहित परिसंपत्तियों और वायदा अनुबंधों पर आधारित ऑप्शंस के स्ट्राइक इंटरवल्स का प्रबंधन करने के लिए अलग से अपने तरीके अपनाते हैं।

स्ट्राइक प्राइस पहले से तय उस कीमत को कहते हैं, जिस पर किसी ऑप्शंस ट्रेडर के पास अंतर्निहित प्रतिभूतियों को खरीदने या बेचने का अधिकार तो होता है, लेकिन उसकी कोई बाध्यता नहीं होती। स्ट्राइक इंटरवल दो स्ट्राइक प्राइस के बीच के अंतर को कहते हैं और इसे प्रोडक्ट की उपलब्धता और बाजार की लिक्विडिटी के बीच संतुलन बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

सेबी ने पाया कि स्ट्राइक इंटरवल का ट्रेडिंग गतिविधियों और बाजार हिस्सेदारों के लिए उत्पादों की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ता है। अनुबंधों में बार-बार किए जाने वाले बदलावों या संशोधनों के बारे में ब्रोकरों के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और ऐप्लिकेशंस पर भी रोजाना अपडेट्स की जरूरत होती है, जिससे सिस्टम से जुड़े खर्च बढ़ जाते हैं।

सेबी ने कहा, इसमें एक ऐसा प्रावधान होगा, जिसके तहत बाजार अवधि के दौरान इंट्राडे में अंतर्निहित परिसंपत्ति की कीमत में होने वाले बदलाव की दिशा में नए स्ट्राइक प्राइस (यानी ऑप्शन अनुबंध) पेश किए जा सकें। सेबी ने कहा कि इस तरह के इंट्राडे बदलावों के लिए लाइव मार्केट ऑपरेशन के दौरान स्टॉक ब्रोकरों या बाजार हिस्सेदारों के सिस्टम में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

उद्योग के जानकारों का कहना है कि मौजूदा स्ट्राइक प्राइस में बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव को काफी हद तक शामिल किया गया है। फिर भी इस बारे में कोई भी ढांचा बनाना स्वागत योग्य कदम है। उदाहरण के लिए एनएसई के निफ्टी 50 इंडेक्स ऑप्शंस शृंखला में 26 मई की एक्सपायरी के लिए 144 स्ट्राइक प्राइस हैं, जो 20,100 से लेकर 27,250 तक हैं जबकि निफ्टी का हालिया बंद भाव 24,032 था। इसका मतलब है कि मौजूदा इंडेक्स स्तर से लगभग 16.4 फीसदी नीचे और 13.4 फीसदी ऊपर तक के स्ट्राइक प्राइस उपलब्ध हैं।

हालांकि, ट्रेडिंग की गतिविधियां मुख्य रूप से ‘एट-द-मनी’ और ‘नियर आउट-ऑफ-द-मनी’ (ओटीएम) अनुबंध के आस-पास ही केंद्रित हैं। ऑप्शन शृंखला के आंकड़ों से पता चलता है कि सबसे ज्यादा ‘पुट ओपन इंटरेस्ट’ 24,000 के स्ट्राइक के आस-पास जमा हैं। इसके बाद 23,500 और 23,000 के स्ट्राइक आते हैं। वहीं, ‘कॉल’ साइड पर गतिविधियां 24,500, 25,000 और आस-पास के स्ट्राइक पर केंद्रित हैं। इससे खुदरा ट्रेडरों और कम समय के लिए बाजार में आने वाले लोगों की अपेक्षाकृत सस्ते ओटीएम अनुबंधों की पसंद का पता चलता है, जिनका इंडेक्स ऑप्शंस मार्केट में वॉल्यूम पर दबदबा है।

प्रस्तावित फ्रेमवर्क सभी ऑप्शन सेगमेंट पर लागू होगा। इसमें इक्विटी, करंसी और कमोडिटी शामिल हैं। सेबी ने कहा कि लिक्विडिटी और भागीदारी के स्तर के आधार पर अलग-अलग उप-श्रेणियों में नियम और फॉर्मूले अलग-अलग हो सकते हैं। इस फ्रेमवर्क की समय-समय पर बाजार प्रतिभागियों से सलाह-मशविरा करके समीक्षा भी की जाएगी। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 15 जून तक आम लोगों से सुझाव मांगे हैं।

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First Published - May 25, 2026 | 8:17 PM IST

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