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SEBI चेयरमैन का बड़ा बयान: ‘न ज्यादा न कम’, बाजार में संतुलन के लिए ‘4T’ फॉर्मूले पर जोर

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सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने निवेशकों की सुरक्षा और बाजार विकास के बीच संतुलन पर जोर देते हुए '4T' फॉर्मूले से पारदर्शिता बढ़ाने का संकल्प जताया है

Last Updated- March 01, 2026 | 9:56 PM IST
Tuhin Kanta Pandey
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय | फाइल फोटो

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन के रूप में अपने पहले वर्ष में तुहिन कांत पांडेय ने निवेशकों की सुरक्षा और बाजार विकास के बीच संतुलन कायम करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि समस्या डेरिवेटिव में नहीं ब​ल्कि वि​शिष्ट क्षेत्र में अत्यधिक सट्टेबाजी से जुड़ी है। खुशबू तिवारी और समी मोडक के साथ बातचीत में पांडेय ने सेबी में भरोसा बहाल करने, हितों के टकराव से बचने के उपायों की समीक्षा, एफऐंडओ विनियमन सहित वि​भिन्न मुद्दों पर बात की। संपादित अंश:

जब आपने पदभार संभाला था तो सेबी की विश्वसनीयता पर जो​खिम दिख रहा था। आपके कार्यकाल का पहला साल कैसा रहा और प्राथमिकताएं कैसे निर्धारित कीं?

जब मैं सेबी में आया तो पहले ही दिन मुझसे मेरी प्राथमिकताओं के बारे में पूछा गया। मैंने ‘चार टी’ ट्रस्ट (विश्वास), ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता), टेक्नॉलजी (प्रौद्योगिकी) और टीम वर्क को स्पष्ट किया। यह सब इष्टतम विनियमन के व्यापक उद्देश्य पर आधारित है। इसका मतलब है कि न तो अत्यधिक विनियमन और न ही कम विनियमन। हमारा काम तीन स्तंभों पर आधारित है – निवेशकों की सुरक्षा, बाजार विकास और विनियमन। ये तीनों आपस में जुड़े हैं। 

विश्वसनीयता संबंधी चिंता को देखते हुए भरोसा स्पष्ट रूप से एक प्राथमिकता थी। आपने इसे बहाल करने के लिए कैसे काम किया?

भरोसा अमूर्त है लेकिन यह अंततः विश्वसनीयता से आता है। आप जो कहते हैं उसे करना होता है। हमने हितों के टकराव की चिंता को दूर करने के लिए कदम उठाए। एक स्वतंत्र समिति का गठन किया, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट सार्वजनिक है। हमने बोर्ड स्तर पर इस पर चर्चा की है और आगामी बोर्ड बैठकों में इस पर और विचार-विमर्श करेंगे। मैं इसके परिणाम के बारे में पहले से कोई राय नहीं देना चाहता लेकिन कई सिफारिशें सुविचारित हैं। कुछ पहलुओं के लिए सेबी से परे कार्रवाई की आवश्यकता है, जिसमें सरकारी स्तर पर कार्रवाई भी शामिल है। 

क्या वर्तमान ढांचा हितों के टकराव की चिंता को पूरी तरह दूर करता है?

पहले भी, कई सुरक्षा उपाय व्यवहार में मौजूद थे। समिति खुलासे, अस्वीकृति, रिकॉर्ड रखने और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं का सुझाव देकर इसमें ज्यादा स्पष्टता लाई है। एक कमी जिसकी हमने पहचान की, वह सिस्टम था। 

प्रतिभूति बाजार संहिता पर सेबी की वित्तीय स्वायत्तता के बारे में चिंता जताई गई। सरकार के साथ चर्चा कैसे आगे बढ़ रही है?

प्रतिभूति बाजार संहिता (एसएमसी) को अब संसद के समक्ष रखा गया है। वर्तमान में इसकी समीक्षा संसद की वित्त पर स्थायी समिति द्वारा की जा रही है। समिति के साथ चर्चा संसदीय प्रक्रिया के तहत गोपनीय है इसलिए मैं विवरण पर टिप्पणी नहीं कर सकता। 

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने पिछले एक साल में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इसकी वजह?

भारत पर निवेशकों की भावना मोटे तौर पर सकारात्मक बनी हुई है। हालांकि विदेशी निवेश का  प्रवाह चक्रीय है, संरचनात्मक नहीं। निवेशक रिटर्न, मुद्रा में उठापटक, वैश्विक ब्याज दरों और वैकल्पिक अवसरों के आधार पर लगातार पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित करते हैं।

क्या कर निवास प्रमाण पत्र पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से एफपीआई के लिए भारत का आकर्षण प्रभावित होगा?

इस तरह का कोई भी फैसला स्वाभाविक रूप से कुछ अनिश्चितता पैदा करता है। हालांकि सरकार इसे कैसे लागू करती है, यह अधिक मायने रखेगा। फिलहाल मुझे नहीं लगता कि निपटाए गए मामलों को फिर से खोलने के लिए आक्रामक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। 

क्या सेबी एफपीआई के लिए खुलासे की सीमा पर पुनर्विचार करेगा?

हम प्रतिक्रिया की जांच कर रहे हैं। कुछ एफपीआई ने इस पर प्रकाश डाला है कि भारत उनके वैश्विक पोर्टफोलियो का एक बहुत छोटा हिस्सा है, फिर भी वे सिर्फ एक या दो शेयर में निवेश के कारण मानदंडों का उल्लंघन करते हैं। ये वास्तविक मुद्दे हैं और हम समीक्षा कर रहे हैं कि क्या समायोजन की आवश्यकता है। अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

क्या हाल के उपायों के बाद वायदा और विकल्प खंड, विशेष रूप से विकल्प में नुकसान कम हुआ है?

वायदा के साथ कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है और अधिकांश विकल्प ट्रेडिंग में भी कोई समस्या नहीं है। चिंता मुख्य रूप से कम अवधि के साप्ताहिक ऑप्शन को लेकर है। हम वर्तमान में डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। हम डेरिवेटिव बाजार को खत्म नहीं करना चाहते हैं क्योंकि यह जोखिम प्रबंधन और मूल्य खोज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यदि साप्ताहिक ऑप्शन में खुदरा निवेशकों को लगातार नुकसान हो रहा है तो क्या सेबी आगे और सख्ती पर विचार करेगा?

हम सबूत के आधार पर काम करेंगे। बाजार को लगातार अनिश्चितता की स्थिति में नहीं रखा जा सकता है। यदि हस्तक्षेप उचित है तो इसे सही तरीके से किया जाएगा।

आईपीओ का उपयोग तेजी से पूंजी निर्माण के बजाय प्रवर्तकों के निवेश निकालने के लिए किया जा रहा है। क्या यह संरचनात्मक मुद्दा है?

ऐसा नहीं लगता। वर्ष2020 में आईपीओ आय का लगभग 87 फीसदी हिस्सा ओएफएस से आया था। आज इसमें मोटे तौर पर 55 फीसदी ओएफएस और 45 फीसदी नए शेयर शामिल हैं। इसके अलावा ओएफएस के माध्यम से पूंजी निकास को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए। प्रवर्तक लाभांश के माध्यम से भी निकासी कर सकते हैं।

पिछले एक साल में आप अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि किसे मानेंगे?

मेरे लिए उपलब्धियों को अलग करना उचित नहीं होगा। मेरी संतुष्टि सेबी को एक संस्था के रूप में विकसित होते हुए देखने में निहित है। 

क्या कोई ऐसा क्षेत्र है जहां सेबी बाजार को आगाह करना चाहेगा?

प्रवर्तन महत्त्वपूर्ण बना हुआ है, विशेष रूप से अंदरूनी व्यापार, फ्रंट-रनिंग और बाजार में उलटफेर को लेकर। प्रवर्तन के साथ-साथ, हम निवारक उपायों में भारी निवेश कर रहे हैं। बेहतर निगरानी, बेहतर सिस्टम और उन न्यासियों तक पहुंच जो अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी को संभालते हैं। 

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First Published - March 1, 2026 | 9:56 PM IST

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