सोमवार को अमेरिका डॉलर के मुकाबले रुपये ने नया निचला स्तर बनाया। डीलरों का कहना है कि यूरोप में बदतर हो रहे ऊर्जा संकट के बीच वैश्विक तौर पर कमजोर आर्थिक वृद्धि की आशंका के बीच डॉलर में मजबूती आई है। घरेलू मुद्रा पूर्ववर्ती बंद भाव 79.25 के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की तुलना में 79.44 पर बंद हुई। रुपये के लिए निचले स्तर पर बंद होने का पिछला रिकॉर्ड 5 जुलाई को 79.35 प्रति अमेरिकी डॉलर था। 2022 में अब तक रुपये में डॉलर के मुकाबले 6.4 प्रतिशत की कमजोरी आ चुकी है।
करीब 6 प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के खिलाफ डॉलर का मापक अमेरिकी डॉलर सूचकांक सोमवार को 107.74 की 20 वर्षीय ऊंचाई पर पहुंच गया। ब्लूमबर्ग के आंकड़े से पता चलता है कि इस सूचकांक के लिए पिछला बंद भाव 107.01 था।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ऊंची मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के सख्त प्रयासों पर ज्यादा जोर देने से वैश्विक तौर परआर्थिक वृद्धि में मंदी की आशंका गहरा गई है। यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से भी यूरोप में गंभीर ऊर्जा किल्लत को बढ़ावा मिला है जिससे वृद्धि को लेकर परिदृश्य खराब हो रहा है। अमेरिकी डॉलर की सुरक्षा के उपायों के बीच, भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर चिंताओं से भी वैश्विक निवेश की निकासी से रुपये पर दबाव पड़ा है।
भारत ने जून में 25.63 अरब डॉलर का सर्वाधिक व्यापार घाटा दर्ज किया।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2022 में अब तक 30.3 अरब डॉलर मूल्य की भारतीय परिसंपत्तियां बेची हैं, जो वर्ष 2008 के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा हैं। वर्ष 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट पैदा हुआ था।
मुद्रा व्यापारियों में भी 12 जुलाई को जून के मुद्रास्फीति पर आधारित घरेलू उपभोक्ता कीमत सूचकांक के आंकड़े जारी होने से पहले अनिश्चितता देखी गई है। मुख्य खुदरा मुद्रास्फीति कई महीनों से आरबीआई के 2-4 प्रतिशत के उचित स्तर से ऊपर बनी हुई है। रॉयटर्स के एक सर्वेक्षण में अनुमान जताया गया कि जून की मुद्रास्फीति एक महीने पहले के 7.04 प्रतिशत के मुकाबले 7.03 प्रतिशत पर रहेगी।