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STT बढ़ने के बाद 1 अप्रैल से F&O ट्रेडिंग का बड़ा टेस्ट; पास या फेल क्या है एनालिस्ट की राय?

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बजट 2026-27 में घोषित फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी

Last Updated- March 25, 2026 | 7:24 PM IST
Stock Market
विश्लेषकों का मानना है कि STT में बढ़ोतरी का असर शॉर्ट टर्म में दिख सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में ट्रेडिंग व्यवहार पर इसका बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बजट 2026-27 में घोषित फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। सरकार ने फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया है। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम पर टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% और ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर टैक्स 0.125% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इस कदम का मकसद डेरिवेटिव्स सेगमेंट में, खासकर रिटेल निवेशकों के बीच, अत्यधिक सट्टेबाजी (स्पेकुलेशन) को नियंत्रित करना है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में इसको लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। सेबी के अध्ययनों के अनुसार, F&O ट्रेडिंग में 90% से ज्यादा रिटेल निवेशकों को नुकसान होता है।

हाल ही में STT में की गई बढ़ोतरी खुदरा निवेशकों को डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भाग लेने से हतोत्साहित करने के लिए उठाया गया पहला कदम नहीं है। इससे पहले, नवंबर 2024 में भी सेबी ने कई कदम उठाए थे। जैसे अनिवार्य अग्रिम प्रीमियम भुगतान, कुछ स्प्रेड बेनिफिट्स पर रोक और एक्सपोजर लिमिट्स को सख्त करना, ताकि इस सेगमेंट में अत्यधिक गतिविधि को नियंत्रित किया जा सके।

निफ्टी 50 इंडेक्स ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर

इन कदमों के बावजूद ट्रेडिंग गतिविधि मजबूत बनी हुई है। BS रिसर्च ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, Nifty 50 इंडेक्स ऑप्शंस का प्रीमियम टर्नओवर पिछले पांच महीनों में लगातार बढ़ा है। नवंबर 2025 में कुल टर्नओवर 9.13 लाख करोड़ रुपये था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 9.46 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद जनवरी 2026 में यह 11.53 लाख करोड़ रुपये और फरवरी 2026 में 12.83 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 23 मार्च तक यह आंकड़ा 11.42 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है, जो इस सेगमेंट में लगातार मजबूत गतिविधि को दर्शाता है।

प्रीमियम टर्नओवर में यह तेज उछाल हाल के महीनों में बाजार में बढ़ी अस्थिरता (वोलैटिलिटी) के कारण देखा गया है। India VIX 2026 में अब तक 150% से ज्यादा बढ़ चुका है। पिछले एक महीने में ही यह वोलैटिलिटी इंडेक्स करीब 75% तक उछलकर 25 के आसपास पहुंच गया है, जो बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव को दिखाता है।

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STT बढ़ोतरी का सीमित असर

विश्लेषकों का मानना है कि STT में बढ़ोतरी का असर शॉर्ट टर्म में दिख सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में ट्रेडिंग व्यवहार पर इसका बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट विनय रजानी ने कहा कि STT बढ़ने से रिटेल निवेशकों और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की ट्रेडिंग लागत सीधे बढ़ेगी, जिससे पहले से ही कम मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, “इससे F&O वॉल्यूम में कुछ गिरावट आ सकती है, लेकिन इसका असर ज्यादा समय तक नहीं रहेगा।” उनका मानना है कि रिटेल भागीदारी थोड़े समय के लिए घट सकती है, जबकि इंस्टीट्यूशनल हेजिंग जारी रह सकती है। पिछले अनुभव भी यही बताते हैं कि शुरुआत में थोड़ी नरमी आती है, लेकिन बाद में बाजार स्थिर हो जाता है।

चॉइस ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) सचिन गुप्ता ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि टैक्स बढ़ाने से अकेले बाजारों में उथल-पुथल होने की संभावना नहीं है।

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ऑप्शंस वॉल्यूम में बढ़ती एक्टिविटी

बढ़ती ऑप्शंस एक्टिविटी वॉल्यूम में भी दिखाई दे रही है। नवंबर 2025 में कुल इंडेक्स ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या 2.59 बिलियन थी। यह दिसंबर में बढ़कर 2.99 बिलियन और जनवरी 2026 में 3.56 बिलियन हो गई। फरवरी में यह थोड़ी गिरकर 3.55 बिलियन रही। मार्च 2026 तक कुल कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या 2.34 बिलियन दर्ज की गई है।

2025-2026 प्रीमियम टर्नओवर (₹ करोड़) कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या
नवम्बर-2025 9,13,277 2,58,78,88,973
दिसम्बर-2025 9,46,923 2,99,70,70,367
जनवरी-2026 11,53,154 3,55,67,76,860
फरवरी-2026 12,83,969 3,55,39,74,028
मार्च-2026 11,42,635 2,33,97,62,041

(23 मार्च तक का डेटा)

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के डेरिवेटिव एनालिस्ट चंदन तापारिया ने कहा कि STT बढ़ने के बावजूद कुल वॉल्यूम मजबूत रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रुझान बताते हैं कि STT बढ़ोतरी ने डेरिवेटिव्स के कुल वॉल्यूम पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं डाला है।

तापारिया ने कहा, “नियामकीय बदलावों के बावजूद बाजार का टर्नओवर स्थिर बना हुआ है।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके बजाय ट्रेडिंग प्रेफरेंस बदल सकती हैं। उन्होंने समझाया, “रेट संशोधनों के बाद STT कलेक्शन में काफी वृद्धि हुई। इस बार भी कुल वॉल्यूम में गिरावट नहीं आएगी; बल्कि ट्रेडिंग प्रेफरेंस में बदलाव हो सकता है।”

तापारिया ने कहा कि फ्यूचर्स में बढ़ी लागत ट्रेडर्स को ऑप्शंस रणनीतियों की ओर ले जा सकती है। उन्होंने कहा, “इंडेक्स फ्यूचर्स में ज्यादा STT से ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी, जिससे ट्रेडर्स ऑप्शंस की ओर रुख करेंगे। फ्यूचर्स में इम्पैक्ट कॉस्ट काफी बढ़ेगी, जिससे निवेशक फ्यूचर्स पोजीशन को ऑप्शंस रणनीतियों जैसे सिंथेटिक फ्यूचर्स के माध्यम से दोहरा सकेंगे।”

उन्होंने आगे बताया कि सीधे फ्यूचर्स पोजीशन लेने के बजाय, हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स कम टैक्स लागत में समान एक्सपोजर पाने के लिए कॉल खरीदने और पुट बेचने, या इसके विपरीत जैसी कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि कम वॉल्यूम और घटते कमीशन के कारण ब्रोकर्स को शॉर्ट टर्म में रेवेन्यू में दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे कैपिटल मार्केट के शेयरों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के फंड फ्लो डेरिवेटिव स्ट्रेटेजीज में थोड़े घट सकते हैं, जबकि लॉन्ग-ओनली निवेशकों को लाभ होगा। वहीं, सरकार बिना मुख्य बाजार संरचना को प्रभावित किए राजस्व प्राप्त करेगी।

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STT कलेक्शन बढ़ा

आयकर विभाग द्वारा पिछले सप्ताह जारी ताजा अस्थायी आंकड़ों के अनुसार FY26 में 17 मार्च तक, सरकार का STT कलेक्शन बढ़कर 55,717 करोड़ रुपये हो गया है, जो FY25 में 53,095 करोड़ रुपये था।

सचिन ने कहा कि ट्रेडर्स की एक्सपायरी डे स्ट्रेटेजीज की अप्रोच में बदलाव आ सकता है। सस्ते आउट-ऑफ-द-मनी ऑप्शंस खरीदना अब कम आकर्षक होगा, क्योंकि टैक्स पहले से ही कम प्रीमियम में काफी हिस्सा ले लेगा। इसके बजाय, निवेशक धीरे-धीरे इन-द-मनी ऑप्शंस या स्प्रेड जैसी अधिक संरचित रणनीतियों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां लागत का प्रभाव बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा, “समय के साथ, अत्यधिक ट्रेडिंग में कमी वास्तव में बाजार में ज्यादा स्थिरता ला सकती है। भले ही तुरंत इसका प्रभाव थोड़ा प्रतिबंधात्मक लगे, लेकिन लंबी अवधि में इसका परिणाम एक संतुलित और स्थायी डेरिवेटिव्स बाजार हो सकता है।”

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First Published - March 25, 2026 | 7:24 PM IST

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