अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने को लेकर बातचीत विफल होने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3 डॉलर बढ़कर 104.47 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 98.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल सप्लाई अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक है और यहां जारी तनाव से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान की ओर से दिए गए जवाब को ‘अस्वीकार्य’ बताया। इसके बाद यह उम्मीद कमजोर पड़ गई कि दोनों देशों के बीच पिछले 10 हफ्तों से जारी संघर्ष जल्द खत्म हो सकेगा।
अब बाजार की नजर ट्रंप की इस हफ्ते होने वाली चीन यात्रा पर है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से ईरान मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। उम्मीद है कि चीन, ईरान पर दबाव डालकर युद्धविराम की दिशा में मदद कर सकता है।
सऊदी अरामको के मुख्य कार्याधिकारी अमीन नासिर ने कहा कि पिछले दो महीनों में दुनिया को करीब 1 अरब बैरल तेल की कमी झेलनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि अगर तेल सप्लाई फिर शुरू भी हो जाए, तब भी बाजार को सामान्य होने में समय लगेगा।
शिपिंग डेटा से पता चला है कि पिछले हफ्ते दो तेल टैंकर बिना ट्रैकिंग सिस्टम चालू किए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से निकले। माना जा रहा है कि ईरानी हमलों से बचने के लिए ऐसा किया गया। इससे पश्चिम एशिया से तेल निर्यात को लेकर चिंता और बढ़ गई है।