Unclaimed mutual fund money: म्युचुअल फंड निवेशकों के बीच जागरूकता भले ही लगातार बढ़ रही हो, लेकिन इसके बावजूद म्युचुअल फंड कंपनियों के पास निवेशकों की बिना दावे वाली रकम (Unclaimed Money) बढ़ती जा रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस रकम के बढ़ने की रफ्तार अब पहले के मुकाबले करीब आधी रह गई है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में म्युचुअल फंड के तहत बिना दावे वाली रकम 10 फीसदी बढ़कर 3,811 करोड़ रुपये हो गई है। हालांकि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। आप बहुत ही आसानी से अपना पैसा ट्रेस और क्लेम कर सकते हैं। इसके लिए जटिल प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं है। बस कुछ आसान स्टेप्स फॉलो कर आप अपने अनक्लेम्ड म्युचुअल फंड एसेट का पैसा पा सकते हैं।
रिपोर्ट से पता चलता है कि 31 मार्च 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच म्युचुअल फंड के तहत बिना दावे वाली रकम करीब 10.4 फीसदी बढ़कर 3,811 करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले यह 3,452 करोड़ रुपये थी।
आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष श्रीवास्तव कहते हैं, “इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बिना दावे वाले डिविडेंड की रकम रही। यह रकम 2,689 करोड़ रुपये थी, जो पिछले साल के मुकाबले 15.7 फीसदी ज्यादा है। वहीं, बिना दावे वाली रिडेम्पशन रकम 1,122 करोड़ रुपये रही। इसमें पिछले साल के मुकाबले मामूली गिरावट आई है।”
| वित्त वर्ष | अनक्लेम्ड रकम |
|---|---|
| वित्त वर्ष 2023-24 | 2,862 करोड़ रुपये |
| वित्त वर्ष 2024-25 | 3,452 करोड़ रुपये |
| वित्त वर्ष 2025-26 | 3,811 करोड़ रुपये |
स्त्रोत: सेबी
Also Read: Debt Mutual Fund: ₹1.88 लाख करोड़ जुटाकर जुलाई में की जोरदार वापसी, क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी?
वित्त वर्ष 2024 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस समय म्युचुअल फंड कंपनियों के पास निवेशकों की 2,862 करोड़ रुपये की रकम बिना दावे के पड़ी थी। इसके बाद FY24 से FY25 के बीच अनक्लेम्ड म्युचुअल फंड एसेट में करीब 21 फीसदी का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 3,452 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। हालांकि, FY25 से FY26 के बीच इसकी बढ़ोतरी की रफ्तार घटकर करीब 10 फीसदी रह गई। यानी बिना दावे वाली रकम का आकार भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन इसकी सालाना वृद्धि धीमी पड़ रही है। अब सवाल यह है कि आखिर निवेशकों का इतना पैसा अनक्लेम्ड क्यों रह जाता है और अगर आपका पैसा भी इसमें शामिल है, तो उसे वापस पाने का रास्ता क्या है?
म्युचुअल फंड में अनक्लेम्ड रकम बढ़ने के पीछे सिर्फ निवेशकों की लापरवाही नहीं, बल्कि कई तकनीकी और प्रक्रियागत वजहें भी जिम्मेदार हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पुराने रिकॉर्ड और अपडेट न की गई जानकारी इस समस्या को और बढ़ा सकती है।
बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम कहते हैं, “म्युचुअल फंड में बिना दावे वाली रकम आमतौर पर तब जमा होती है, जब एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की ओर से मिलने वाली रकम– जैसे रिडेम्पशन की रकम या IDCW– निवेशक के बैंक खाते तक नहीं पहुंच पाती या या उन्हें भुनाया नहीं जाता है।”
श्रीवास्तव बताते हैं कि इसकी एक बड़ी वजह यह है कि निवेशक अक्सर अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी या बैंक खाता बदल लेते हैं, लेकिन म्युचुअल फंड कंपनी या RTA के पास अपनी नई जानकारी अपडेट नहीं करते। ऐसे में भुगतान (पेमेंट) नहीं हो पाता और रकम अनक्लेम्ड रह जाती है।
पुराने फोलियो, फिजिकल फॉर्म के जरिए किए गए निवेश और निवेशक की मृत्यु के बाद नॉमिनी दर्ज नहीं होने जैसी वजहों से भी यह समस्या बढ़ सकती है। म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या अब 27.86 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में अगर पुराने या इनएक्टिव रिकॉर्ड की संख्या थोड़ी भी ज्यादा हो, तो बिना दावे वाली रकम का कुल आकार काफी बढ़ सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाल में बिना दावे वाली रकम 3,452 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,811 करोड़ रुपये होने के पीछे कई वजहें हैं। इनमें परिचालन से जुड़ी दिक्कतों के साथ-साथ निवेशकों से जुड़े कुछ कारण भी शामिल हैं।
पुराने बैंक और कॉन्टैक्ट डिटेंल: कई निवेशक अपना बैंक खाता, पता या मोबाइल नंबर बदल लेते हैं, लेकिन म्युचुअल फंड कंपनी या रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास अपनी नई जानकारी अपडेट नहीं करते। ऐसे में रिडेम्पशन की रकम या चेक सही जगह नहीं पहुंच पाता या चेक जमा नहीं हो पाता।
फिजिकल चेक की समयसीमा खत्म होना: डिविडेंड या रिडेम्पशन की रकम के लिए जारी किए गए फिजिकल चेक या डिमांड ड्राफ्ट को समय पर जमा नहीं करने पर उनकी वैधता खत्म हो जाती है। ऐसे में रकम अनक्लेम्ड पूल में चली जाती है।
अधूरा या अपडेट न हुआ KYC: अगर निवेशक का KYC पूरा नहीं है या उसकी जानकारी अपडेट नहीं है, जैसे PAN या पहचान से जुड़े दस्तावेजों का वेरिफिकेशन नहीं हुआ है, तो फंड हाउस बैंक खाते में सीधे भुगतान नहीं कर पाते। ऐसी रकम को अलग अनक्लेम्ड स्कीम में रखा जा सकता है।
बिना नॉमिनी के निवेशक की मृत्यु: अगर किसी निवेशक की मृत्यु हो जाती है और उसने नॉमिनी दर्ज नहीं किया है, तो उसके परिवार या कानूनी वारिसों को निवेश की जानकारी न होने पर रकम लंबे समय तक बिना दावे के पड़ी रह सकती है।
पुराने फिजिकल निवेश या निष्क्रिय फोलियो: डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था आम होने से पहले किए गए कई पुराने निवेश अभी भी कागजी रूप में हो सकते हैं। लंबे समय तक इन निवेशों पर ध्यान नहीं देने से निवेशक उन्हें भूल सकते हैं या उनके दस्तावेज खो सकते हैं।
म्युचुअल फंड उद्योग का बढ़ता आकार: भारत में म्युचुअल फंड का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पहले से अनक्लेम्ड रकम पर लिक्विड या ओवरनाइट स्कीमों से मिलने वाला रिटर्न भी जुड़ता रहता है। इससे समय के साथ बिना दावे वाली कुल रकम का आकार बढ़ सकता है।
Also Read: SIF की रफ्तार तेज: जुलाई में AUM 30% बढ़कर ₹23,177 करोड़, फोलियो 1 लाख के करीब
अगर आपका कोई पुराना म्युचुअल फंड निवेश है, तो हो सकता है कि उसकी कोई रकम अब भी अनक्लेम्ड पड़ी हो। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसे खोजने के लिए निवेशकों के पास अब कई आसान और आधिकारिक विकल्प मौजूद हैं।
श्रीवास्तव कहते हैं, “बिना दावे वाले म्युचुअल फंड की पहचान कई तरीकों से की जा सकती है। निवेशक सेबी के MITRA प्लेटफॉर्म के जरिए इसकी जानकारी हासिल कर सकते हैं, जो MF Central पर उपलब्ध है। इसके अलावा, आप सीधे म्युचुअल फंड कंपनियों (AMC) की वेबसाइट से भी पता लगा सकते हैं। हालांकि, इन सभी तरीकों की अपनी कुछ सीमाएं हैं।”
निगम के मुताबिक, निवेशकों या उनके कानूनी वारिसों के लिए अनक्लेम्ड म्युचुअल फंड रकम का पता लगाना अब पहले के मुकाबले काफी आसान है। इसके लिए कई आधिकारिक माध्यम उपलब्ध हैं। निवेशक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, RTA और संबंधित म्युचुअल फंड कंपनियों की वेबसाइट के जरिए यह जांच सकते हैं कि उनके नाम पर कोई डिविडेंड या रिडेम्पशन रकम बिना दावे के तो नहीं पड़ी है। इसके लिए प्रमुख विकल्पों में MF Central का MITRA प्लेटफॉर्म, RTA की वेबसाइट और AMC या AMFI का पोर्टल शामिल हैं।
1. MF Central और MITRA प्लेटफॉर्म: MITRA (Mutual Fund Investment Tracing and Retrieval Assistant) सेबी के मार्गदर्शन में CAMS और KFintech ने मिलकर MITRA प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसके जरिए निवेशक सभी म्युचुअल फंड कंपनियों में अपनी बिना दावे वाली रकम और निष्क्रिय फोलियो का पता लगा सकते हैं। निष्क्रिय फोलियो से मतलब ऐसे फोलियो से है, जिनमें 10 साल से ज्यादा समय से कोई लेनदेन नहीं हुआ है।
कैसे इस्तेमाल करें: एमएफ सेंट्रल की वेबसाइट पर जाकर MITRA विकल्प चुनें। यहां PAN, जन्मतिथि, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या नाम और पते जैसी जानकारी के आधार पर खोज की जा सकती है।
2. रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) की वेबसाइट: CAMS और KFintech दोनों RTA बिना दावे वाली डिविडेंड और रिडेम्पशन रकम की जानकारी हासिल करने के लिए ऑनलाइन सर्च सुविधा देते हैं। PAN, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद OTP के जरिए संबंधित अनक्लेम्ड रकम की जानकारी देखी जा सकती है।
3. कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS): निवेशक NSDL/CDSL या CAMS/KFintech की ओर से मिलने वाले मासिक या तिमाही कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) को भी देख सकते हैं। इसमें एक्टिव फोलियो के साथ किसी भी बिना दावे वाली डिविडेंड या रिडेम्पशन रकम की जानकारी अलग से दी जाती है।
4. AMC और AMFI की वेबसाइट: हर म्युचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट और AMFI पोर्टल पर निवेशकों के लिए ‘Unclaimed Amounts’ सेक्शन होता है। निवेशक यहां PAN या फोलियो नंबर के जरिए अपनी बिना दावे वाली रकम की जानकारी खोज सकते हैं।
Also Read: रिटर्न में पिछड़कर भी रहे एसआईपी की पसंद निवेश के लिए कितने सही हैं लार्ज कैप फंड?
अनक्लेम्ड म्युचुअल फंड रकम का पता चलने के बाद अगला सवाल उसे वापस पाने का है। निगम के मुताबिक, इसके लिए निवेशक को KYC और बैंक डिटेल अपडेट करने से लेकर जरूरी फॉर्म और दस्तावेज जमा करने तक कुछ चरण पूरे करने होते हैं। उन्होंने क्लेम की पूरी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी।
1. अनक्लेम्ड रकम की पुष्टि करें: सबसे पहले संबंधित AMC का नाम, फोलियो नंबर और उस स्कीम की जानकारी हासिल करें, जिसमें आपकी अनक्लेम्ड रकम पड़ी है।
2. KYC और बैंक डिटेल अपडेट करें: अगर आपका बैंक खाता, मोबाइल नंबर या पता बदल गया है, तो क्लेम करने से पहले बैंक मैंडेट चेंज फॉर्म जमा करें या अपना KYC अपडेट कराएं।
3. रिक्वेस्ट फॉर्म डाउनलोड कर भरें: संबंधित AMC या RTA की वेबसाइट से Release of Unclaimed Amount Form या Common Transaction Slip डाउनलोड कर उसे भरें।
4. आवेदन जमा करें: हस्ताक्षर (साइन) किए हुए फॉर्म के साथ जरूरी दस्तावेज संबंधित AMC के Investor Service Centre (ISC) या RTA की शाखा (CAMS/KFintech) में जमा करें। इसे आप खुद जाकर या कूरियर के जरिए जमा कर सकते हैं।
5. भुगतान और रकम की गणना: अगर क्लेम 3 साल के भीतर किया जाता है, तो निवेशक को मूल अनक्लेम्ड रकम के साथ लिक्विड/ओवरनाइट स्कीम में रखी गई रकम से हुई आय या ब्याज भी मिलता है। अगर क्लेम 3 साल के बाद किया जाता है, तो निवेशक को मूल रकम के साथ केवल तीसरे साल के अंत तक अर्जित ब्याज मिलता है। तीसरे साल के बाद की कमाई सेबी के नियमों के मुताबिक निवेशक शिक्षा से जुड़े फंड में भेज दी जाती है। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद रकम कुछ ही दिनों में सीधे निवेशक के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।
मूल निवेशक के लिए-
आवेदन फॉर्म: सही तरीके से भरा और हस्ताक्षर किया हुआ Release of Unclaimed Amount Form।
पहचान प्रमाण: PAN कार्ड और आधार कार्ड/पासपोर्ट/वोटर आईडी की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी।
बैंक प्रमाण (जरूरी): निवेशक के नाम और बैंक खाता नंबर वाला मूल कैंसल चेक, या
3 महीने से ज्यादा पुराना न हो ऐसा बैंक स्टेटमेंट/पासबुक की कॉपी, जिस पर बैंक मैनेजर का सत्यापन हो।
KYC की पुष्टि: KYC पूरा होने का प्रमाण।
निवेशक की मृत्यु के मामले में (नॉमिनी/कानूनी वारिस द्वारा क्लेम)-
ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट फॉर्म: Form T2/T3।
मृत्यु प्रमाण पत्र: मृत निवेशक के मृत्यु प्रमाण पत्र की मूल या नोटरी से सत्यापित कॉपी।
क्लेम करने वाले की जानकारी: नॉमिनी या कानूनी वारिस के PAN कार्ड, KYC की पुष्टि और बैंक प्रमाण (कैंसल चेक) की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी।
कानूनी वारिस से जुड़े दस्तावेज: अगर कोई नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो क्लेम की रकम के आधार पर सेबी के नियमों के मुताबिक इंडेम्निटी बॉन्ड, एफिडेविट और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र या वसीयत का प्रोबेट देना पड़ सकता है।
AMFI की वेबसाइट पर अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) सेक्शन में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यदि 7 कार्यदिवसों के भीतर, निवेशक का पैसा नहीं मिलता है या फिर उनके दावे को नामंजूर किया जाने की वजह भी उन्हें नहीं बताई जाती है तो ऐसे में निवेशक संबंधित AMC या RTA के ऑफिस में जाकर या AMC के निवेशक सेवा केंद्र में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकता हैं।
शिकायत भेजने के लिए AMC का पता और ईमेल आईडी की जानकारी AMC की वेबसाइट के “Contact Us” सेक्शन में मिल जाती है। अगर AMC या RTA तय समय में शिकायत का समाधान नहीं करते, या निवेशक समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो वह अपनी शिकायत SEBI के SCORES पोर्टल पर दर्ज कर सकता है।