नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के शुरुआती दिनों में भारी उतार-चढ़ाव के बाद आर्बिट्राज फंड की नेट ऐसेट वैल्यू (एनएवी) अब सामान्य हो गई है। आर्बिट्राज फंड म्युचुअल फंडों की वह श्रेणी थी, जिस पर इस नए सिस्टम का सबसे ज्यादा असर पड़ा। बंद भाव तय करने के तरीके में बदलाव से उनकी नकदी और वायदा पोजीशन के मूल्यांकन में अंतर आ गया था। पहले दिन उनकी एनएवी में करीब 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह बढ़ोतरी इस श्रेणी के लिए लगभग एक महीने के औसत रिटर्न के बराबर थी।
लेकिन अगले तीन कारोबारी सत्रों में एनएवी में गिरावट आ गई और लगभग सारा मुनाफा चला गया। तब से, इनमें रोजाना होने वाले उतार-चढ़ाव काफी कम रहे हैं। यह रुझान एक महीने के रिटर्न में भी दिखता है। 14 अगस्त तक आर्बिट्राज फंडों ने औसतन 0.45 फीसदी का रिटर्न दिया है, जो इस श्रेणी के सामान्य दायरे के आसपास ही है।
तेज उतार-चढ़ाव की वजह से आर्बिट्राज फंड खरीदने वाले निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ गया था क्योंकि असामान्य उतार-चढ़ाव के दौरान उन्हें बढ़ी हुई एनएवी पर यूनिट मिल सकती थीं। इसलिए, वितरकों ने निवेशकों को सलाह दी थी कि वे उतार-चढ़ाव शांत होने का इंतजार करें या किस्तों में निवेश करने का तरीका अपनाएं।
इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक और बिजनेस हेड अंकुर पुंज ने कहा, आर्बिट्राज फंडों की एनएवी अब सामान्य हो रही हैं क्योंकि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का शुरुआती असर कम हो रहा है। रोजाना होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से नए सिस्टम के तहत एग्जीक्यूशन और हेजिंग डायनामिक्स में बदलाव की वजह से मूल्यांकन पर हुए असर के कारण थे, न कि आर्बिट्राज के मौके में किसी बुनियादी बदलाव की वजह से।
उन्होंने कहा कि आर्बिट्राज फंड में ऐसी घट-बढ़ आमतौर पर नहीं आती हैं। जैसे-जैसे फंड मैनेजर और बाजार के भागीदार नए सिस्टम के हिसाब से ढलेंगे, ये दिक्कतें कम हो जाएंगी।
मनी हनी वेल्थ सर्विसेज के संस्थापक अनूप भैया ने कहा, नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की वजह से हाल में आर्बिट्राज फंडों के एनएवी में जो अस्थायी बाधा आई थी, वह अब पूरी तरह सामान्य हो गई है क्योंकि बाजार इस सिस्टम के हिसाब से ढल गया है। कभी-कभार वाली ऐसी तकनीकी गड़बड़ियां आर्बिट्राज रणनीतियों के मूल स्वरूप को नहीं बदलती हैं। ये रणनीतियां कम से कम डायरेक्शनल रिस्क के साथ नकदी और डेरिवेटिव बाजार के बीच की कीमतों के अंतर का फायदा उठाती हैं।
भैया ने कहा कि जो निवेशक अल्पावधि से मध्यम अवधि के लिए एकमुश्त पैसा लगाना चाहते हैं, उनके लिए आर्बिट्राज फंड अच्छा विकल्प हैं। ये पारंपरिक सावधि जमाओं के मुकाबले कम उतार-चढ़ाव वाले और कर के लिहाज से फायदेमंद विकल्प हैं।
आर्बिट्राज फंड एक बड़ी श्रेणी बन गए हैं। इनकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) लगभग 3 लाख करोड़ रुपये हैं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से कम समय के लिए अतिरिक्त या एकमुश्त पैसा रखने के लिए किया जाता है। इनका मकसद कम उतार-चढ़ाव के साथ नकदी और वायदा बाजार के बीच कीमतों के अंतर से कमाई करना होता है। आमतौर पर इनमें 6 से 8 फीसदी का रिटर्न मिल जाता है। इस श्रेणी में बड़ी रकम निवेश की जाती है।