Motor Insurance Stocks: देश में टू-व्हीलर, कार और कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री बढ़ने लगी है। इसका असर अब मोटर इंश्योरेंस सेक्टर में भी दिख रहा है। जीएसटी के बाद गाड़ियां थोड़ी सस्ती हुई हैं, जिससे ज्यादा लोग खरीद रहे हैं और इंश्योरेंस भी बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में मोटर इंश्योरेंस करीब 8 प्रतिशत बढ़ा था, जो अब फरवरी तक बढ़कर करीब 11 प्रतिशत हो गया है। आगे भी गाड़ियों की बिक्री ठीक रहने की उम्मीद है, इसलिए इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़त जारी रह सकती है।
कुछ समय के लिए हिस्सेदारी घटने के बाद अब प्राइवेट बीमा कंपनियां फिर से आगे निकल गई हैं। फरवरी 2026 में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर करीब 72 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल 68 प्रतिशत थी। इसकी वजह है कि प्राइवेट कंपनियों का नेटवर्क मजबूत है, डीलरों के साथ अच्छी पकड़ है और वे डेटा का बेहतर इस्तेमाल करती हैं। वहीं, सरकारी बीमा कंपनियां इस मामले में पीछे रह गई हैं।
हालांकि अभी भी इंश्योरेंस कंपनियों का खर्च और क्लेम ज्यादा है, यानी मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। लेकिन अब इसमें थोड़ा सुधार दिखने लगा है। नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ रही है, कीमतों में स्थिरता है और कंपनियां अपने कामकाज को बेहतर बना रही हैं। इससे आगे चलकर उनकी कमाई धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है।
प्राइवेट बीमा कंपनियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। उनका खर्च और क्लेम का स्तर पिछले कुछ समय में कम हुआ है, जो यह दिखाता है कि वे अपना काम ज्यादा अच्छे तरीके से संभाल रही हैं और खर्च भी कंट्रोल में है। आगे भी यह सुधार जारी रहने की उम्मीद है, खासकर क्योंकि नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ रही है, जिससे उन्हें ज्यादा फायदा मिल सकता है।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, ICICI Lombard ने हाल के महीनों में मोटर इंश्योरेंस में अच्छी रिकवरी दिखाई है और यह बाकी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। कंपनी मोटर इंश्योरेंस पर फोकस कर रही है, सही कीमत तय कर रही है और अपने कामकाज को बेहतर बना रही है, जिससे आगे भी स्थिर ग्रोथ की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने इस शेयर पर ‘खरीदें’ की सलाह बरकरार रखी है और 2260 रुपये का टारगेट दिया है। फिलहाल शेयर करीब 1808 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। इस हिसाब से इसमें करीब 25 प्रतिशत तक की तेजी की संभावना बताई गई है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)