Auto Sector Outlook: फरवरी 2026 ऑटो सेक्टर के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन फरवरी साबित हुआ है। टू-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल दोनों सेगमेंट में मजबूत बिक्री देखने को मिली। टू-व्हीलर सेगमेंट में करीब 34 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज हुई, जबकि पैसेंजर व्हीकल यानी कारों की बिक्री करीब 11 प्रतिशत बढ़ी। मजबूत मांग के चलते कंपनियों के पास स्टॉक यानी इन्वेंट्री भी कम बनी हुई है, जो एक पॉजिटिव संकेत है।
टू-व्हीलर सेगमेंट में तेजी लगातार बनी हुई है। पूरे वित्त वर्ष में अब तक इस सेगमेंट में करीब 8.7 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है। इसमें स्कूटर सेगमेंट सबसे आगे रहा, जहां करीब 14.6 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, जबकि मोटरसाइकिल की ग्रोथ 6.1 प्रतिशत रही।
मोटरसाइकिल में भी मिड सेगमेंट यानी 150-250cc और उससे ऊपर के सेगमेंट ने सबसे ज्यादा तेजी दिखाई। वहीं, एंट्री लेवल 100cc सेगमेंट में भी रिकवरी के संकेत दिखे। हालांकि 125cc सेगमेंट अभी भी पीछे चल रहा है।
टू-व्हीलर कंपनियों में TVS ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और सालाना आधार पर करीब 19 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की। वहीं हीरो मोटोकॉर्प और होंडा की ग्रोथ सीमित रही, जबकि बजाज ऑटो की बिक्री में हल्की गिरावट देखने को मिली।
मार्केट शेयर की बात करें तो TVS और रॉयल एनफील्ड ने अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि बाकी कंपनियों का हिस्सा थोड़ा घटा है।
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पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में भी अच्छी मांग बनी हुई है। इस साल अब तक कारों की बिक्री करीब 7 प्रतिशत बढ़ी है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान एसयूवी सेगमेंट का रहा, जहां करीब 10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।
महिंद्रा, टोयोटा और किआ जैसी कंपनियों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि हुंडई की बिक्री में गिरावट आई। मारुति सुजुकी की ग्रोथ सीमित रही, लेकिन बाजार में उसकी पकड़ बनी हुई है।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, चौथी तिमाही में भी ऑटो सेक्टर में मांग मजबूत बनी हुई है। मजबूत रिटेल डिमांड के कारण कंपनियों के पास स्टॉक कम है, जिससे कीमतों में छूट धीरे-धीरे कम हो सकती है। हालांकि, बढ़ती लागत और गैस की संभावित कमी जैसे जोखिम आगे की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, मौजूदा माहौल में ऑटो सेक्टर में निवेश के लिए मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और TVS मोटर सबसे बेहतर विकल्प हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)