इस साल अब तक 37 लार्जकैप योजनाओं में से करीब 50 प्रतिशत का प्रदर्शन निफ्टी-100 सूचकांक के मुकाबले कमजोर रहा है।
वैल्यू रिसर्च के आंकड़े से पता चलता है कि 17 योजनाओं ने इस साल बेंचमार्क के -6.4 प्रतिशत प्रतिफल को मात दी, जिनमें से सिर्फ तीन योजनाओं ने सकारात्मक प्रतिफल दिया। जेएम कोर-11 फंड -17.6 प्रतिशत के प्रतिफल के साथ सबसे खराब प्रदर्शक रहा है है।
निफ्टी-50 में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, दिवीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और विप्रो जैसे कुछ खास नामों के शानदार प्रदर्शन से अच्छी तेजी दर्ज की गई। बीएस रिसर्च ब्यूरो द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार, वहीं निफ्टी-100 में शामिल सिर्फ 29 प्रतिशत शेयरों ने
दो अंक में प्रतिफल दिया, जिसे फार्मा शेयरों से मदद मिली। 30 सितंबर तक प्रमुख पांच निफ्टी शेयरों का इस सूचकांक में भारांक 44 प्रतिशत था और इसमें आरआईएल का योगदान 14.9 प्रतिशत तक रहा। प्रमुख चार क्षेत्रों – वित्तीय सेवा, आईटी, तेल एवं गैस और उपभोक्ता वस्तु – का सूचकांक भारांक में 84 प्रतिशत योगदान है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक बाजार धारणा में सुधार नहीं आता, तब तक लार्जकैप योजनाएं प्रभावित बनी रह सकती हैं। कोविड-19 महामारी से ऊंची बाजार भागीदारी और मजबूत व्यवसायों वाली कंपनियों के अनुकूल स्थिति को बढ़ावा मिल सकता है। यूनियन एमएफ के मुख्य कार्याधिकारी प्रदीप कुमार जी ने कहा, ‘आगे ऐसी अवधि आएगी जब कुछ शेयरों का प्रदर्शन अलग रहेगा, जिससे प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। श्रेणीकरण से भी निवेश से संबंधित शेयरों की संख्या कुछ हद तक सीमित हुई है, लेकिन लंबी अवधियों के दौरान बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन की अच्छी संभावना है।’
फंड प्रबंधकों को 2018 और 2019 में प्रमुख सूचकांकों को मात देने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है और बड़ी पूंजी कुछ शेयरों तक केंद्रित देखी गई। योजनाओं के श्रेणीकरण के साथ साथ टोटल रिटन्र्स इंडेक्स की पेशकश जैसे नियामकीय बदलावों से भी प्रदर्शन प्रभावित हुआ। शुरू में एमएफ योजनाओं की एनएवी प्रतिफल की गणना के लिए लाभांश में शामिल की जाती थी। भारतीय इक्विटी के लिए औसत सालाना लाभांश प्रतिफल 1-1.5 प्रतिशत है।
एसऐंडपी इंडेक्सेस वर्सेज ऐक्टिव इंडिया के अनुसार, दिसंबर 2019 में समाप्त एक वर्ष के दौरान करीब 40 प्रतिशत लार्ज-कैप फंडों का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर रहा।