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क्या बाजार शीर्ष पर हैं? ब्रोकरों की राय

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:12 AM IST

प्रमुख सूचकांक – बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 अपने मार्च 2020 के निचले स्तरों से करीब 50 प्रतिशत चढऩे के बाद अब समेकित हो गए हैं और पिछले कुछ सप्ताहों से नए कारकों का इंतजार कर रहे हैं। अगस्त में अब तक मिड और स्मॉल-कैप द्वारा अपने लार्ज-कैप प्रतिस्पर्धियों को मात देने से उम्मीद अब प्रमुख सूचकांकों पर टिक गई है। लेकिन क्या यह उम्मीद बरकरार रहेगी? क्या बाजारों में कोविड-19 महामारी की वजह से पैदा हुई लॉकडाउन की स्थिति के बाद आर्थिक गतिविधि में फिर शुरू होने से आए सकारात्मक बदलावों का असर दिख चुका है?
हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक तरलता पर जोर बनाए रखेंगे जिससे बाजारों और भारतीय बाजारों के मूल्यांकन को समर्थन मिलेगा। उनका कहना है कि बाजारों में खिंचाव दिख रहा है। इस पृष्ठभूमि में, वे सतर्क बने हुए हैं और कुछ विश्लेषक अब मामूली गिरावट का भी अनुमान जता रहे हैं।

क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट
भारतीय शेयर बाजार में भारी तेजी के बाद मिड-कैप के लिए भी मूल्यांकन महंगा हो गया है। निफ्टी सूचकांक का मूल्यांकन 21.2 के 12 महीने के पीई पर है, जो उसके 10 वर्षीय औसत से दो स्टैंडर्ड डेविएशन ऊपर है, जबकि निफ्टी मिडकैप 50 सूचकांक 20.6 पर कारोबार कर रहा है, जो अपने 10 वर्षीय औसत से एक स्टैंडर्ड डेविएशन ऊपर है। आय को लेकर सकारात्मक बदलाव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों से अप्रत्याशित समर्थन को देखते हुए इक्विटी बाजारों में भरोसा लौटा है। इसके अलावा, भारत में कई क्षेत्रों में कंपनियोंं ने बड़ी मात्रा में पूंजी उगाही की है, जिससे पता चलता है कि विदेशी इक्विटी पूंजी भारत में आ रही है। इन कारकों के साथ साथ वैश्विक रूप से कम ब्याज दर के परिवेश से भी मूल्यांकन ऊंचा बना रह सकता है।

जेपी मॉर्गन
संभावित वृद्घि और आर्थिक लेनदेन में गिरावट से भारतीय इक्विटी बाजार के मल्टीपल पर दबाव पड़ेगा। हम वित्त, मैटेरियल और ऊर्जा  (रिलायंस इंडस्ट्रीज को छोड़कर) जैसे वृद्घि/निवेश चक्रीयता से जुड़े क्षेत्रों के लिए निवेश घटाने की सलाह दे रहे हैं। हम उपभोक्ता, सेवा और हेल्थकेयर-केंद्रित कंपनियों पर दीर्घावधि नजरिये के साथ ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

आईसीआईसीआई सिक्यो.
सूचकांक आर्थिक सुधार की उम्मीद पर ध्यान केंद्रित करता है और ऐसे खास शेयरों के चयन का सुझाव देगा जो आय की गुणवत्ता, विकास संभावनाओं की निरंतरता और मजबूत बुनियादी आधार से जुड़े हों। हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आईटी, फार्मा और निजी बैंकों जैसे मजबूत क्षेत्रों पर सकारात्मक बने हुए हैं।

दौलत कैपिटल
हमने मार्च के निचले स्तरों से बाजार में आई भारी तेजी के बाद भारतीय इक्विटी बाजारों पर अपना नजरिया नकारात्मक किया है। निफ्टी अब अपनी सर्वाधिक ऊंचाई से 9 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुका है और यह सबसे खराब आय/जीडीपी रीडिंग्स में से एक है। हमारा मानना है कि वास्तविक बदलाव जल्द आ सकता है और मूल्यांकन के सामान्य होने में मदद मिलेगी। हालांकि हम मौजूदा हालात में किसी खास स्तरों या समय-सीमा के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन अब कई बदलावों का असर दिखेगा।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च
अमेरिकी बाजारों से शुरू हुई वैश्विक इक्विटी बाजारों में कुछ गिरावट अपरिहार्य है। वर्ष 2000 और 2007 में, अमेरिकी बाजार पूंजीकरण-जीडीपी अनुपात 100 प्रतिशत को पार कर गया था और तब अमेरिकी बाजार काफी बुरी तरह से गिर गए थे। अब यह अनुपात 177 प्रतिशत की रिकॉर्ड ऊंचाई पर बना हुआ है। चूंकि वैश्विक स्तर पर बड़ी तादाद में रोजगार समाप्त हुए हैं, यह काफी हद तक तर्कसंगत लग रहा है कि कई निवेशक अल्पावधि में कुछ मौकों पर मुनाफावसूली शुरू करेंगे। इसलिए, हमारी नजर में, इससे अल्पावधि में वैश्विक सूचकांकों में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट को बढ़ावा मिल सकता है।

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First Published - August 20, 2020 | 12:11 AM IST

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