लगातार चार वर्षों तक भारत के विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने से देश के शेयर बाजारों में वृद्धि से जुड़े शेयरों (ग्रोथ स्टॉक) का दबदबा बढ़ गया है।
एमएससीआई इंडिया ग्रोथ इंडेक्स ने पिछले 12 महीनों के आधार पर फरवरी की समाप्ति 19.9 फीसदी की बढ़त के साथ की जबकि एमएससीआई इंडिया वैल्यू इंडेक्स में 12.6 फीसदी का इजाफा हुआ। अगर यह बढ़त बरकरार रहती है तो मार्च 2026 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में ग्रोथ इंडेक्स की बढ़त वित्त वर्ष 25 की तुलना में कहीं ज्यादा होगी। मार्च 2026 के अब तक के आंकड़े ग्रोथ इंडेक्स (पिछले 12 महीनों के आधार पर 5.1 फीसदी रिटर्न) का वैल्यू इंडेक्स (1.8 फीसदी) की तुलना में बेहतर प्रदर्शन दिखा रहे हैं।
मार्च 2025 में समाप्त वित्त वर्ष में एमएससीआई इंडिया वैल्यू इंडेक्स का रिटर्न 1.9 फीसदी रहा जबकि इसी अवधि में एमएससीआई इंडिया ग्रोथ इंडेक्स का रिटर्न 6.4 फीसदी रहा।
सरकार की अद्यतन पद्धति के अनुसार वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछली गणना के तहत अनुमानित 7.4 फीसदी से अधिक है।
सामान्य तौर पर शेयर बाजारों में वृद्धि की रणनीति उन कंपनियों को लक्षित करती है, जिनमें औसत से ज्यादा तेजी से अपने कारोबार का विस्तार करने की क्षमता होती है। यह इस आधार पर काम करती है कि ये लाभ उच्च मूल्यांकन होने पर भी उच्च प्रतिफल में तब्दील होंगे। कीमत रणनीति अपेक्षाकृत कम मूल्यांकन पर कारोबार करने वाले शेयरों को खरीदती है। उदाहरण के लिए एक कंपनी जो अपनी परिसंपत्तियों के मूल्य से कम पर कारोबार कर रही है।
हालांकि कुछ निवेशक यह भी तर्क देते हैं कि यह विभाजन ज़रूरी नहीं कि दोतरफा हो। बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण के अनुसार, दिसंबर और जनवरी में कीमत रणनीति ने वृद्धि रणनीति से मामूली रूप से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन 2023 के बाद से उसका प्रदर्शन काफी कम रहा है। इस विश्लेषण में शुरुआती और अंतिम बिंदुओं की परवाह किए बिना लाभ का स्पष्ट अनुमान लगाने के लिए पिछले 12 महीनों के प्रतिफल का विश्लेषण किया गया।
पीएल कैपिटल के शोध निदेशक (इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज) अमनीश अग्रवाल ने फरवरी के अंत में कहा था, यह वह समय नहीं है जब वृद्धि को हर कीमत पर प्राथमिकता दी जाएगी। जिन कंपनियों में उच्च क्षमता है और जो उचित मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, उनके बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना है, भले ही समग्र रूप से वृद्धि का रुझान बना रहे। उन्होंने कहा, बाजार को वृद्धि पसंद है।
आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक कारक अहम भूमिका निभा सकते हैं। अमेरिका और इजरायल इस समय ईरान के साथ युद्ध में उलझे हुए हैं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और पश्चिम एशिया में उथल-पुथल मची हुई है। भारत अपनी जरूरत के कच्चे तेल का 85 फीसदी से अधिक आयात करता है और इसकी बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
युद्ध विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा को भी कम करता है और निवेश को प्रभावित कर सकता है। वित्त वर्ष 2026 में भारतीय बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगभग 1 लाख करोड़ डॉलर की शुद्ध बिक्री की है।
वैल्यू-फोकस्ड इन्वेस्टमेंट मैनेजर क्वांटम एडवाइजर्स के पोर्टफोलियो मैनेजर नीलेश शेट्टी ने कहा, वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने के माहौल में वैल्यू शेयर बेहतर प्रदर्शन करते हैं। 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद भारतीय बाजारों में शुरुआती प्रतिक्रिया में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई, जिससे यह संकेत मिला कि संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना नहीं है।
शेट्टी के अनुसार अगर हालात इसके विपरीत रहे तो बाजार में काफी गिरावट आ सकती है। प्लेटफॉर्म कंपनियों सहित कई ग्रोथ स्टॉक्स आकर्षक मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं। शेट्टी ने कहा कि बाजार में और गिरावट आने से खरीदारी के और मौके मिल सकते हैं। इस महीने की शुरुआत में उनके 2 अरब डॉलर के पोर्टफोलियो में 7 फीसदी नकदी थी।