इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) ने कंपनियों को यह इजाजत देने का प्रस्ताव किया है कि वे सार्वजनिक निर्गम लाए बिना सीधे गिफ्ट सिटी में स्टॉक एक्सचेंजों पर इक्विटी शेयर सूचीबद्ध करा सकती हैं। एक परामर्श पत्र के अनुसार इसके लिए पात्रता की शर्तों, खुलासे की अनिवार्यता और कीमत तय करने के तरीकों का पालन करना होगा।
मसौदे के तहत इश्यू लाने वाली कंपनी अगर भारत या विदेश में सूचीबद्ध नहीं हैं, वे यहां सीधे सूचीबद्ध हो सकती हैं बशर्ते वे तीन में से कम से कम एक वित्तीय शर्त पूरी करती हों, जैसे कि कम से कम 2 करोड़ डॉलर का परिचालन राजस्व, 10 लाख डॉलर का कर पूर्व लाभ या सूचीबद्धता के बाद 5 करोड़ डॉलर का बाजार पूंजीकरण।
दुनिया भर में अमेरिका में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैसडेक, लंदन स्टॉक एक्सचेंज और टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज जैसे बड़े एक्सचेंजों पर बिना सार्वजनिक निर्गम के सीधी सूचीबद्धता की इजाजत पहले से ही है। इन एक्सचेंजों में मुनाफे, राजस्व, बाजार पूंजीकरण और शेयरधारक आधार से जुड़ी निश्चित सीमाएं होती हैं।
परामर्श पत्र में कहा गया है, जिन कंपनियों ने अपने संस्थापकों और/या संस्थागत निवेशकों से मिली पूंजी के बल पर सफलतापूर्वक अपना कारोबार बढ़ाया और विस्तार किया है, उन्हें शायद निकट भविष्य में और फंड जुटाने की जरूरत न पड़े। लेकिन, ऐसी कंपनियां अपनी पहुंच बढ़ाने, निवेशकों का भरोसा जीतने, कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों को बेहतर बनाने और मौजूदा शेयरधारकों के लिए प्राइस डिस्कवरी और लिक्विडिटी का जरिया बनाने के लिए सार्वजनिक पेशकश के बिना भी अपने शेयरों को सूचीबद्ध कराने का विकल्प चुन सकती हैं।
परामर्श पत्र में स्पॉटिफाई, स्लैक टेक्नॉलजीज, पलांटिर टेक्नॉलजीज, कॉइनबेस ग्लोबल और रॉबलॉक्स कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के उदाहरण दिए गए हैं। ये वे कंपनियां हैं जिन्होंने विदेश में बिना सार्वजनिक पेशकश के सीधी सूचीबद्धता कराई है।
फिलहाल, खास तरह की स्टाफिंग और टेक्नॉलजी सॉल्यूशन देने वाली कंपनी ट्राईफेक्टा इंक लगभग 10-15 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए गिफ्ट सिटी में सूचीबद्धता के लिए आईपीओ की प्रक्रिया में है। इस आईपीओ में नए शेयर जारी करना और ऑफ़र फॉर सेल दोनों शामिल हैं। इससे पहले इस साल कई चुनौतियों के कारण एडटेक कंपनी एक्सईडी ने अपना 1.2 करोड़ डॉलर का आईपीओ वापस ले लिया था।
रेगुलेटर ने कहा कि बुक बिल्डिंग प्रक्रिया और अंडरराइटिंग की व्यवस्था न होने पर सार्वजनिक पेशकश के बिना सूचीबद्धता कीमत तय करने में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं। सही और पारदर्शी तरीके से कीमत तय करने के लिए उसने सुझाव दिया है कि संदर्भ या आधार कीमत किसी स्वतंत्र और पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता की मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर तय की जा सकती है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि सही कीमत का पता लगाने के लिए सूचीबद्धता के पहले दिन कॉल ऑक्शन मैकेनिज्म जैसा एक खास प्री-ओपन प्राइस डिस्कवरी सेशन किया जा सकता है, जिसमें खरीद और बिक्री के ऑर्डर के आधार पर बाजार की संतुलित कीमत तय की जाएगी। इस नए प्रस्ताव में उन कंपनियों को भी आईपीओ के बिना सूचीबद्ध होने की इजाज़त दी गई है, जिनके पास ‘सुपीरियर वोटिंग राइट्स’ (एसआर शेयर) हैं, बशर्ते ऐसे शेयरों को शेयरधारकों ने मंजूरी दी हो और फाइलिंग से कम से कम तीन महीने पहले तक अपने पास रखा हो।
आईएफएससीए ने मंजूरी की आसान प्रक्रिया तय की है। इसके तहत कंपनियों को 15 दिनों के भीतर किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज से सैद्धांतिक मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद जारीकर्ता को एक जानकारी दस्तावेज जमा कराना होगा, जिसे किसी पंजीकृत निवेश बैंकर ने जांचा-परखा हो। इस दस्तावेज में जरूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि निवेशक सोच-समझकर फ़ैसला कर सकें। दस्तावेज में जोखिम के कारण, पूंजी का ढांचा, वित्तीय विवरण, कानूनी मामले, संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी जैसी बातें शामिल होंगी।
पर्याप्त फ्लोट सुनिश्चित करने के लिए भारत में बनी कंपनियों को घरेलू स्तर पर न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों का पालन करना होगा, जबकि विदेशी कंपनियों के लिए भी सूचीबद्धता के बाद कम से कम 10 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखने की शर्त हो सकती है। इन प्रस्तावित नियमों का मकसद गिफ्ट सिटी को वैश्विक स्तर पर पूंजी जुटाने वाले केंद्र के तौर पर और आकर्षक बनाना है।